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MPMLA COURT : फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह दोषी करार
Tue, 15 Mar 2022 11:39 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 15 Mar 2022 11:39 PM IST
सार
- बीमार होने के कारण नहीं हुए उपस्थित, 22 मार्च को एमपीएमएलए कोर्ट सुनाएगी सजा
- एमएलसी चुनाव के लिए अक्षय प्रताप सिंह कर चुके हैं नामांकन, संकट में सियासी भविष्य
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Akshay pratap singh
- फोटो : Pratapgarh
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विस्तार
धोखाधड़ी कर गलत पते पर शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में कुंडा के बाहुबली विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया के करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी को कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है एमपीएमएलए कोर्ट ने इस मामले में उन्हें दोषी करार दिया है। मंगलवार को उनके उपस्थित न होने पर कोर्ट ने सजा सुनाने के लिए 22 मार्च की तिथि मुकर्रर की है।
कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस की संस्तुति करने वाले पुलिस अफसरों व राजस्व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। चूंकि अक्षय प्रताप एमएलसी पद के लिए नामांकन कर चुके हैं, ऐसे में उनका सियासी भविष्य कोर्ट के निर्णय पर टिका हुआ है।
नगर कोतवाली में छह सितंबर 1997 को एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। तत्कालीन कोतवाल डीपी शुक्ला की जांच में खुलासा हुआ था कि गोपालजी ने शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए अपना पता बस अड्डा, नगर कोतवाली प्रतापगढ़ दर्शाया था। जबकि उनका वास्तविक पता जामो, सुल्तानपुर और हालमुकाम बेेेंती थाना हथिगवां है।
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एमपीएमएलए और एफटीसी द्वितीय बलरामदास जायसवाल की कोर्ट ने मंगलवार को मुकदमे के परीक्षण में पाया कि निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी ने तथ्य छिपाकर गलत पते पर शस्त्र लाइसेंस हासिल किया था। अक्षय प्रताप सिंह के अधिवक्ता ने कोर्ट में उपस्थित होकर उनके बीमार होने की बात कहते हुए हाजिरी माफ करने की मांग की।
कोर्ट ने अधिवक्ता की मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार देते हुए 22 मार्च को साढ़े दस बजे कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर शस्त्र लाइसेंस देने के लिए संस्तुति करने वाले पुलिस अधिकारियों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है।
एमपीएमएलए कोर्ट का फैसला ऐसे समय में आया है जब एमएलसी चुनाव के नामांकन का दौर चल रहा है और दोषी करार दिए गए अक्षय प्रताप सिंह नामांकन कर चुके हैं। नामांकन कार्य से जुड़े अफसर कोर्ट का निर्णय आने से पहले कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं।
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कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस की संस्तुति करने वाले पुलिस अफसरों व राजस्व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। चूंकि अक्षय प्रताप एमएलसी पद के लिए नामांकन कर चुके हैं, ऐसे में उनका सियासी भविष्य कोर्ट के निर्णय पर टिका हुआ है।
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नगर कोतवाली में छह सितंबर 1997 को एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। तत्कालीन कोतवाल डीपी शुक्ला की जांच में खुलासा हुआ था कि गोपालजी ने शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए अपना पता बस अड्डा, नगर कोतवाली प्रतापगढ़ दर्शाया था। जबकि उनका वास्तविक पता जामो, सुल्तानपुर और हालमुकाम बेेेंती थाना हथिगवां है।
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एमपीएमएलए और एफटीसी द्वितीय बलरामदास जायसवाल की कोर्ट ने मंगलवार को मुकदमे के परीक्षण में पाया कि निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी ने तथ्य छिपाकर गलत पते पर शस्त्र लाइसेंस हासिल किया था। अक्षय प्रताप सिंह के अधिवक्ता ने कोर्ट में उपस्थित होकर उनके बीमार होने की बात कहते हुए हाजिरी माफ करने की मांग की।
कोर्ट ने अधिवक्ता की मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार देते हुए 22 मार्च को साढ़े दस बजे कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर शस्त्र लाइसेंस देने के लिए संस्तुति करने वाले पुलिस अधिकारियों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है।
एमपीएमएलए कोर्ट का फैसला ऐसे समय में आया है जब एमएलसी चुनाव के नामांकन का दौर चल रहा है और दोषी करार दिए गए अक्षय प्रताप सिंह नामांकन कर चुके हैं। नामांकन कार्य से जुड़े अफसर कोर्ट का निर्णय आने से पहले कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं।