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विधायक ने कोविड फंड में दिए अपनी निधि के दस लाख रुपये वापस मांगे

Sun, 05 Jul 2020 12:42 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2020 12:42 AM IST
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MLA asks for one million rupees of his fund given in covid fund
सदर विधायक राजकुमार पाल ने पहले अपनी निधि से दस लाख रुपये कोविड केयर फंड में दिए और अब वह वापस मांग रहे हैं। इससे जिले के अफसर असमंजस में हैं। हालांकि मामला उनके कार्यक्षेत्र से बाहर का होने का कारण फाइल शासन में भेज दी गई है।
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भाजपा समर्थित अपना दल एस से चुने गए सदर विधायक राजकुमार पाल ने मार्च माह में वैश्विक महामारी कोरोना से जंग लडने के लिए अपनी निधि से दस लाख रुपये कोविड केयर फंड में दे दिए। यह धनराशि सीएमओ को मिलने के बाद वह रुपये को खर्च भी कर चुके हैं।
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इन दिनों गर्मी बढ़ने से हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया तो उन्होंने हैंडपंपों का रिबोर कराने के लिए कोविड केयर फंड में दी गई धनराशि को वापस मांग लिया है। राजकुमार पाल के विधायक बनने के बाद उन्हें अभी तक विधायक निधि के एक करोड़ रुपये मिले हैं। 90 लाख रुपये सड़क, इंटरलॉकिंग में खर्च चुके हैं और दस लाख रुपये सीएमओ को दे चुके हैं।
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ऐसी दशा में अब उनकी निधि में रुपये नहीं हैं। दूसरी किस्त के एक करोड़ रुपये आने ही थे कि उसी दौरान कोरोना काल प्रारंभ हो गया। विधायक ने सीडीओ को पत्र लिखकर सीएमओ को दिए गए रुपये को वापस मांगे हैं। हालांकि जिले के अफसरों ने रुपये वापस देने से हाथ खड़े करते हुए शासन को फाइल भेज दी है। पीडी आरसी शर्मा ने बताया कि मामला हमारे कार्यक्षेत्र के बाहर का होने के कारण फाइल शासन में भेज दी गई है।
ग्राहक सेवा केंद्र संचालक ने महिला के बीस हजार रुपये गायब किए
गांव की अनपढ़ महिलाओं को ग्राहक सेवा केंद्र संचालक ठग रहे हैं। ऐसा ही एक मामला अंतू इलाके के छतरपुर गांव का प्रकाश में आया है। महिला ने संचालक को बीस हजार रुपये जमा करने को दिए, मगर सात माह बाद जब वह निकालने पहुंची तो खुलासा हुआ कि खाते में रुपये जमा ही नहीं हुए थे।

अंतू इलाके के रघना (छतरपुर) गांव की महिला रानी देवी पत्नी रामसुंदर ने गांव के फ्रेंचाइजी संचालक अजीत प्रताप को दिसंबर माह में जमा करने के लिए बीस हजार रुपये दिए थे। सात माह बाद जब रुपये निकालने गई तो खुलासा हुआ कि रुपये खाते में जमा ही नहीं हुए थे। एलडीएम अनिल कुमार ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में आया है। शाखा प्रबंधक से रुपये दिलाने को कहा गया है। न देने पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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