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डाक्टरों की हड़ताल का मिलाजुला असर, मरीज हुए परेशान, सरकारी अस्पतालों में कराया इलाज

Sat, 12 Dec 2020 12:57 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 12:57 AM IST
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Mixed effects of doctors' strike, patients worried, treatment in government hospitals
निजी अस्पतालों के हड़ताल से परेशान जिला अस्पताल मरीज लेकर पहुंचे तीमारदार। - फोटो : PRATAPGARH
आयुर्वेद चिकित्सकों को ऑपरेशन की अनुमति देने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को डाक्टरों की हड़ताल का मिलाजुला असर दिखा। निजी अस्पतालों के बंद रहने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ा।
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उन्हें सरकारी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा।
आयुर्वेद चिकित्सकों को ऑपरेशन की अनुमति देने से इंडियन मेडिकल एसोशिएन के पदाधिकारी नाराज हैं। जिलाध्यक्ष ने एक दिन पहले ही जिले के सभी नर्सिंगहोम संचालकों ओर चिकित्सकों से अपील की थी कि शुक्रवार सुबह छह से शाम छह बजे तक किसी भी प्रकार की ओपीडी न की जाए।
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वे हड़ताल पर रहेंगे। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को परेशान भी नहीं करेंगे। उचित समझने पर उनका तत्काल इलाज करेंगे। हालांकि शुक्रवार को बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला।
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शहर में कई नर्सिंगहोम बंद रहे तो कुछ में इलाज चलता रहा। निजी अस्पतालों के बंद रहने के कारण मरीजों को मजबूरन सरकारी अस्पताल का चक्कर काटना पड़ा। जिला अस्पताल में शुक्रवार को मरीजों कीसंख्या डेढ़ हजार के पार पहुंच गई। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सीएमओ को सौंपा।
जिसमें आयुर्वेद चिकित्सकों को ऑपरेशन करने की छूट न दिए जाने की मांग की गई। इस दौरान संघ के उपाध्यक्ष डॉक्टर एसएस गुप्ता, महासचिव अतुत शुक्ला, घनश्याम अग्रवाल, शिवमूर्तिलाल और रवि श्रीवास्तव मौजूद रहे।

सर्जरी आयुर्वेद का अभिन्न अंग, विरोध अनुचित
आयुष इंटरनेशनल मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता एडी तिवारी वैद्य ने कहा है कि शल्य चिकित्सा (सर्जरी) आयुर्वेद का अभिन्न अंग है। आयुर्वेद हजारों साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है। केंद्र सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सकों को सर्जरी का जो अधिकार दिया है, वह सराहनीय कार्य है। सर्जरी का विरोध करना अनुचित है।

आईएमए के हड़ताल के कारण जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़।

आईएमए के हड़ताल के कारण जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़।- फोटो : PRATAPGARH

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