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गुर्दे के मरीजों के साथ दुर्व्यवहार
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गुर्दे के मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
दो टेक्नीशियन के भरोसे की जा रही है मरीजों की डायलिसिस
प्रतापगढ़। जिला अस्पताल के डायलिसिस विभाग में गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां चिकित्सक की भले ही तैनाती विभाग ने कर दी है, मगर अब उन्होंने आना बंद कर दिया है। छह के बजाए दो टेक्नीशियान के भरोसे गुर्दा रोगियों की डायलिसिस की जा रही है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें आननफानन में इमरजेंसी में भर्ती कराया जाता है।
हेरिटेज हॉस्पिटल्स लिमिटेड वाराणसी ने जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर खोल रखा है। पीपीमोड के तहत गुर्दा रोगियों की सप्ताह में तीन बार मुफ्त डायलिसिस की जाती है। विभाग की मानें तो एक मरीज की डायलिसिस पर शासन की ओर से संस्था को लगभग एक हजार रुपये दिए जाते हैं। कंपनी ने जो मानक तैयार कर रखा है उसमें छह बेड हैं। इसके लिए छह टेक्नीशियन, एक डॉक्टर, काउंसलर और एक ऑपरेटर होना चाहिए। जबकि जिला अस्पताल परिसर में संचालित डायलिसिस सेंटर में न तो कोई चिकित्सक है और न ही काउंसलर। दो टेक्नीशियन और उनके दो सहायकों के भरोसे यहां आने वाले मरीजों की डायलिसिस किया जा रही है। मरीजों की हालत बिगड़ने लगती है तो उन्हें आननफानन में जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। जिम्मेदार अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर मनोज खत्री डायलिसिस कक्ष में राउंड लेने चले जाते हैं। किसी दिन तो एक टेक्नीशियन यदि अवकाश पर चला जाता है तो छह मरीजों का इलाज महज एक टेक्नीशियन अपने सहायक के साथ करता है।
डायलिसिस के दौरान दो लोगों की बिगड़ चुकी है हालत
जिला अस्पताल में स्थित डायलिसिस सेंटर में बीते चार माह में लगभग एक हजार लोगों की डायलिसिस हो चुकी है। इनमे से दो लोगों की डायलिसिस के दौरान हालत बिगड़ गई थी। आननफानन में टेक्नीशियन द्वारा दोनों मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। इसके बाद भी लापरवाही बरती जा रही है।
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जब तक डॉक्टर की व्यवस्था नहीं है, तब तक जिला अस्पताल के एक डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। संस्था को पत्र लिखकर डॉक्टर और टेक्नीशियन बढ़ाने की मांग की गई है। यदि ऐसा नहीं होता तो शासन को पत्र भेजा जाएगा।
-डॉ. इम्तियाज, सीएमएस जिला अस्पताल
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दो टेक्नीशियन के भरोसे की जा रही है मरीजों की डायलिसिस
प्रतापगढ़। जिला अस्पताल के डायलिसिस विभाग में गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां चिकित्सक की भले ही तैनाती विभाग ने कर दी है, मगर अब उन्होंने आना बंद कर दिया है। छह के बजाए दो टेक्नीशियान के भरोसे गुर्दा रोगियों की डायलिसिस की जा रही है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें आननफानन में इमरजेंसी में भर्ती कराया जाता है।
हेरिटेज हॉस्पिटल्स लिमिटेड वाराणसी ने जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर खोल रखा है। पीपीमोड के तहत गुर्दा रोगियों की सप्ताह में तीन बार मुफ्त डायलिसिस की जाती है। विभाग की मानें तो एक मरीज की डायलिसिस पर शासन की ओर से संस्था को लगभग एक हजार रुपये दिए जाते हैं। कंपनी ने जो मानक तैयार कर रखा है उसमें छह बेड हैं। इसके लिए छह टेक्नीशियन, एक डॉक्टर, काउंसलर और एक ऑपरेटर होना चाहिए। जबकि जिला अस्पताल परिसर में संचालित डायलिसिस सेंटर में न तो कोई चिकित्सक है और न ही काउंसलर। दो टेक्नीशियन और उनके दो सहायकों के भरोसे यहां आने वाले मरीजों की डायलिसिस किया जा रही है। मरीजों की हालत बिगड़ने लगती है तो उन्हें आननफानन में जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। जिम्मेदार अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर मनोज खत्री डायलिसिस कक्ष में राउंड लेने चले जाते हैं। किसी दिन तो एक टेक्नीशियन यदि अवकाश पर चला जाता है तो छह मरीजों का इलाज महज एक टेक्नीशियन अपने सहायक के साथ करता है।
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डायलिसिस के दौरान दो लोगों की बिगड़ चुकी है हालत
जिला अस्पताल में स्थित डायलिसिस सेंटर में बीते चार माह में लगभग एक हजार लोगों की डायलिसिस हो चुकी है। इनमे से दो लोगों की डायलिसिस के दौरान हालत बिगड़ गई थी। आननफानन में टेक्नीशियन द्वारा दोनों मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। इसके बाद भी लापरवाही बरती जा रही है।
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जब तक डॉक्टर की व्यवस्था नहीं है, तब तक जिला अस्पताल के एक डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। संस्था को पत्र लिखकर डॉक्टर और टेक्नीशियन बढ़ाने की मांग की गई है। यदि ऐसा नहीं होता तो शासन को पत्र भेजा जाएगा।
-डॉ. इम्तियाज, सीएमएस जिला अस्पताल