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मधवापुर जैसा हादसा हुआ तो धधक उठेगा शहर
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 06 Jun 2015 01:39 AM IST
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प्रतापगढ़। मधवापुर जैसा हादसा शहर में भी हो सकता है। शहर की गलियों, मोहल्लों और बाजारों में लटक रहे हाईटेंशन तारों के टूटने से आग लगी तो पूरा शहर धधक उठेगा। भारी तबाही मच जाएगी।
हाईटेंशन तार की चपेट में आने से रानीगंज इलाके में बस जलकर राख हो गई। संयोग था कि बस की सवारियां उतर चुकी थीं। शहर में भी कदम-कदम पर मौत के तार लटक रहे हैं। चौक घंटाघर-कचहरी मार्ग हो या फिर इलाहाबाद-फैजाबाद हाईवे। हर जगह बिजली के तार नीचे तक लटक रहे हैं। शायद ही कोई गली और मोहल्ला बचा हो जहां पर बिजली के तार न लटक रहे हाें। शहर में हर तरफ बिजली के तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। इन्हीं के बीच से गुजरी है 11 हजार की लाइन। अगर तार टूट जाए तो बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
जोगापुर से लेकर सदर मोड़, चौक से लेकर कचहरी, भंगवा चुंगी से लेकर बलीपुर तक, निर्मल तिराहे से स्टेशन रोड के किनारे और सड़क के बीच में बिजली के तार झूल रहे हैं। नीचे तक लटक रहे तारों पर अगर ध्यान न दिया जाए तो लोग करंट की चपेट में आ सकते हैं। हाईवे के किनारे और कहीं-कहीं सड़क के ऊपर से होकर हाईटेंशन का तार गुजरे हुए हैं। अक्सर उधर से गुजरने वाले वाहनों से भी तार टच कर जाते हैं। गनीमत है कि कभी कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
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बाबागंज, चौक, जेल रोड और श्रीराम चौराहे जैसे व्यवस्तम इलाके में हाईटेंशन तार नीचे तक झूल रहे हैं। इसके अलावा घरेलू कनेक्शन के तारों का मकड़जाल हर वक्त लोगों के सिर पर खतरा बनकर मंडराता रहता है। शार्टसर्किट से आग लगने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। अगर दुर्भाग्यवश भीड़-भाड़ वाले इलाके में हाईटेशन का तार टूटकर गिरता है तो न जाने कितने लोग करंट की चपेट में आने से जान गवां सकते हैं। शहर में आग लगने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
जेल रोड, करनपुर बस्ती में तार लोगों के कंधे तक लटक रहे हैं। शहर में निकलते समय ट्रक, बस, बैंडबाजे और डीजे वाले अक्सर इन तारों के झुंड में उलझ जाते हैं। तार को उठाने के लिए ये लोग बांस का सहारा लेते हैं।
बंचिंग केबल लगाया जा रहा है। इससे तारों के मकड़जाल से निजात मिल जाएगी। शहर और टाउन एरिया में एलटी लाइन की व्यवस्था अंडरग्राउंड होनी चाहिए। इसका प्रयास किया जा रहा है।
एसपी मिश्रा, एक्सईएन प्रथम
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हाईटेंशन तार की चपेट में आने से रानीगंज इलाके में बस जलकर राख हो गई। संयोग था कि बस की सवारियां उतर चुकी थीं। शहर में भी कदम-कदम पर मौत के तार लटक रहे हैं। चौक घंटाघर-कचहरी मार्ग हो या फिर इलाहाबाद-फैजाबाद हाईवे। हर जगह बिजली के तार नीचे तक लटक रहे हैं। शायद ही कोई गली और मोहल्ला बचा हो जहां पर बिजली के तार न लटक रहे हाें। शहर में हर तरफ बिजली के तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। इन्हीं के बीच से गुजरी है 11 हजार की लाइन। अगर तार टूट जाए तो बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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जोगापुर से लेकर सदर मोड़, चौक से लेकर कचहरी, भंगवा चुंगी से लेकर बलीपुर तक, निर्मल तिराहे से स्टेशन रोड के किनारे और सड़क के बीच में बिजली के तार झूल रहे हैं। नीचे तक लटक रहे तारों पर अगर ध्यान न दिया जाए तो लोग करंट की चपेट में आ सकते हैं। हाईवे के किनारे और कहीं-कहीं सड़क के ऊपर से होकर हाईटेंशन का तार गुजरे हुए हैं। अक्सर उधर से गुजरने वाले वाहनों से भी तार टच कर जाते हैं। गनीमत है कि कभी कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
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बाबागंज, चौक, जेल रोड और श्रीराम चौराहे जैसे व्यवस्तम इलाके में हाईटेंशन तार नीचे तक झूल रहे हैं। इसके अलावा घरेलू कनेक्शन के तारों का मकड़जाल हर वक्त लोगों के सिर पर खतरा बनकर मंडराता रहता है। शार्टसर्किट से आग लगने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। अगर दुर्भाग्यवश भीड़-भाड़ वाले इलाके में हाईटेशन का तार टूटकर गिरता है तो न जाने कितने लोग करंट की चपेट में आने से जान गवां सकते हैं। शहर में आग लगने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
जेल रोड, करनपुर बस्ती में तार लोगों के कंधे तक लटक रहे हैं। शहर में निकलते समय ट्रक, बस, बैंडबाजे और डीजे वाले अक्सर इन तारों के झुंड में उलझ जाते हैं। तार को उठाने के लिए ये लोग बांस का सहारा लेते हैं।
बंचिंग केबल लगाया जा रहा है। इससे तारों के मकड़जाल से निजात मिल जाएगी। शहर और टाउन एरिया में एलटी लाइन की व्यवस्था अंडरग्राउंड होनी चाहिए। इसका प्रयास किया जा रहा है।
एसपी मिश्रा, एक्सईएन प्रथम