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चिता पर रखने से पहले मर चुकी महिला की आंख से निकला खून
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 09 Oct 2017 12:26 AM IST
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परियावां। लकवा से पीड़ित महिला की इलाज के दौरान इलाहाबाद में मौत हो गई। परिजन रोते बिलखते उसे घर ले आए। कालाकांकर घाट पर अंतिम संस्कार के लिए ले गए। चिता पर रखने की तैयारी के बीच अचानक उसकी आंख से खून बहने लगा। जिसे देखकर लोग बोल उठे कि वह जिंदा है। महिला को लेकर परिजन घर चले आए। जहां दूर से आए कुछ लोग झाड फूंक कर रहे हैं। परिवार के लोगों को भरोसा है कि महिला जिंदा है और रात में बोलेगी। इसे लेकर आसपास के ग्रामीणों का जमघट लगा हुआ है।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के सैयद यासीनपुर के रहने वाली यशवंत की पत्नी ज्योति को 6 अक्तूबर के दिन लकवा मार दिया। उसकी हालत बिगडने पर परिजन उसे लेकर डेरवा आए। जहां प्राइवेट डाक्टर ने उसका उपचार कर दवा दिया। उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इससे परेशान होकर परिजन शनिवार को ज्योति को लेकर इलाहाबाद एसआरएन पहुंचे। जहां डाक्टरों ने उसका उपचार प्रारंभ कर दिया। रात लगभग 2.30 बजे डाक्टर ने ज्योति को मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजन रोने बिलखने लगे। उसका शव लेकर परिजन घर लौट आए। रविवार दोपहर परिजनों के साथ गांव व रिश्तेदार उसका अंतिम संस्कार करने के लिए कालाकांकर घाट पहुंचे। वहां अंतिम संस्कार के लिए चिता सजा दी गई। उसे चिता पर रखने की तैयारी के बीच चूड़ी उतारी जाने लगी। तभी ज्योति की आंख से खून गिरने लगा। यह देख लोग उसके जिंदा होने की बात कहते हुए प्रेत बाधा बताई और घर लेकर चलने का सुझाव दिया। मृत महिला के जिंदा होने की खबर जंगल में आग तरह फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण यशवंत के घर जुट गए। इस बीच कुछ झाडफूंक करने वाले लोग पहुंचे और अपनी विद्या से उसे आधी रात तक बैठा देने का प्रयास करने लगे। यह चमत्कार देखने के लिए ग्रामीणों का जमघट लगा रहा। नवाबगंज एसओ ने बताया कि इस तरह की किसी घटना की जानकारी नही है। वह मामले को दिखवाते हैं।
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नवाबगंज थाना क्षेत्र के सैयद यासीनपुर के रहने वाली यशवंत की पत्नी ज्योति को 6 अक्तूबर के दिन लकवा मार दिया। उसकी हालत बिगडने पर परिजन उसे लेकर डेरवा आए। जहां प्राइवेट डाक्टर ने उसका उपचार कर दवा दिया। उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इससे परेशान होकर परिजन शनिवार को ज्योति को लेकर इलाहाबाद एसआरएन पहुंचे। जहां डाक्टरों ने उसका उपचार प्रारंभ कर दिया। रात लगभग 2.30 बजे डाक्टर ने ज्योति को मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजन रोने बिलखने लगे। उसका शव लेकर परिजन घर लौट आए। रविवार दोपहर परिजनों के साथ गांव व रिश्तेदार उसका अंतिम संस्कार करने के लिए कालाकांकर घाट पहुंचे। वहां अंतिम संस्कार के लिए चिता सजा दी गई। उसे चिता पर रखने की तैयारी के बीच चूड़ी उतारी जाने लगी। तभी ज्योति की आंख से खून गिरने लगा। यह देख लोग उसके जिंदा होने की बात कहते हुए प्रेत बाधा बताई और घर लेकर चलने का सुझाव दिया। मृत महिला के जिंदा होने की खबर जंगल में आग तरह फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण यशवंत के घर जुट गए। इस बीच कुछ झाडफूंक करने वाले लोग पहुंचे और अपनी विद्या से उसे आधी रात तक बैठा देने का प्रयास करने लगे। यह चमत्कार देखने के लिए ग्रामीणों का जमघट लगा रहा। नवाबगंज एसओ ने बताया कि इस तरह की किसी घटना की जानकारी नही है। वह मामले को दिखवाते हैं।
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