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फसल बर्बादी से परेशान किसान ने जहर खाकर दी जान
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Thu, 23 Apr 2015 11:55 PM IST
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मड़ाई के दौरान गेहूं के दाने काले और कम पैदावार देखकर परेशान सदर तहसील के भदौसी गांव के किसान रामआधार सिंह (55) ने जहर खाकर जान दे दी। इसकी जानकारी होने पर प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मच गई। भागकर अफसर उसके घर पहुंचे। उसकी मौत से परिवारीजनों में कोहराम मचा है। उसने तीस हजार रुपये साहूकार से कर्ज लेकर गेहूं की खेती की थी।
सदर तहसील के अंतू थाना क्षेत्र के भदौसी गांव निवासी रामआधार सिंह (55) के पास सात बीघा जमीन है। चार बीघे खेत में उसने गेहूं की बुवाई की थी। 14 अप्रैल को मड़ाई कराई तो मात्र दो बोरी गेहूं निकला। इससे परेशान होकर उसने कीटनाशक निगल लिया। हालांकि समय रहते इलाज होने से उसकी जान बच गई।
मंगलवार की रात फिर रामआधार गेहूं की मड़ाई करा रहा था। इस बार भी उसे मात्र पांच बोरी अनाज मिला। इससे वह सुधबुध खो बैठा। निराश रामआधार ने बुधवार को जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां हालत नाजुक देखकर डॉक्टराें ने उसे इलाहाबाद रेफर कर दिया। गुरुवार को इलाज के दौरान एसआरएन में रामआधार की मौत हो गई। इसकी जानकारी होने पर परिजन बिलखने लगे।
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भदौसी निवासी रामआधार खेती कर अपना व परिवार का खर्च चलता था। उसके तीन बेटे व तीन बेटियां हैं। दो बेटियों की शादी कर चुका था। बड़ा बेटा दोनों पैरों से विकलांग है। रामआधार ने गांव के ही एक व्यक्ति से कर्ज लेकर गेहूं की बुवाई की थी। सोचा था कि फसल होने पर उसे बेचकर कर्ज चुका देगा। फसल कम होने से वह परेशान था। कर्ज चुकाने की चिंता उसे खाए जा रही थी। जितनी पैदावार हुई थी, उससे उसके परिवार की दो जून की रोटी भी नहीं पूरी हो सकती थी। इससे परेशान होकर उसने 14 अप्रैल को जहर खा लिया था। हालांकि वह बच गया। लेकिन बुधवार को दूसरी बार जहर खाने पर उसकी हालत बिगड़ गई। काफी प्रयास के बाद भी डॉक्टर उसे नहीं बचा सके। रामआधार की पत्नी अनीता, बेटा विवेक (25), अनुभव (17), अविनाश (17) व बेटी रंगोली, रीता, पूजा का रो-रो कर बुरा हाल है।
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सदर तहसील के अंतू थाना क्षेत्र के भदौसी गांव निवासी रामआधार सिंह (55) के पास सात बीघा जमीन है। चार बीघे खेत में उसने गेहूं की बुवाई की थी। 14 अप्रैल को मड़ाई कराई तो मात्र दो बोरी गेहूं निकला। इससे परेशान होकर उसने कीटनाशक निगल लिया। हालांकि समय रहते इलाज होने से उसकी जान बच गई।
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मंगलवार की रात फिर रामआधार गेहूं की मड़ाई करा रहा था। इस बार भी उसे मात्र पांच बोरी अनाज मिला। इससे वह सुधबुध खो बैठा। निराश रामआधार ने बुधवार को जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां हालत नाजुक देखकर डॉक्टराें ने उसे इलाहाबाद रेफर कर दिया। गुरुवार को इलाज के दौरान एसआरएन में रामआधार की मौत हो गई। इसकी जानकारी होने पर परिजन बिलखने लगे।
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भदौसी निवासी रामआधार खेती कर अपना व परिवार का खर्च चलता था। उसके तीन बेटे व तीन बेटियां हैं। दो बेटियों की शादी कर चुका था। बड़ा बेटा दोनों पैरों से विकलांग है। रामआधार ने गांव के ही एक व्यक्ति से कर्ज लेकर गेहूं की बुवाई की थी। सोचा था कि फसल होने पर उसे बेचकर कर्ज चुका देगा। फसल कम होने से वह परेशान था। कर्ज चुकाने की चिंता उसे खाए जा रही थी। जितनी पैदावार हुई थी, उससे उसके परिवार की दो जून की रोटी भी नहीं पूरी हो सकती थी। इससे परेशान होकर उसने 14 अप्रैल को जहर खा लिया था। हालांकि वह बच गया। लेकिन बुधवार को दूसरी बार जहर खाने पर उसकी हालत बिगड़ गई। काफी प्रयास के बाद भी डॉक्टर उसे नहीं बचा सके। रामआधार की पत्नी अनीता, बेटा विवेक (25), अनुभव (17), अविनाश (17) व बेटी रंगोली, रीता, पूजा का रो-रो कर बुरा हाल है।