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कुश की जड़ों से महकता है कन्नौज का इत्र उद्योग
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:13 PM IST
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नदी और तालाब के किनारे उगने वाले कुश की जड़ें बड़ी काम की हैं। बकुलाही नदी के किनारे ठंड के मौसम में गांवों के लोगों के लिए कुश की जड़ें कमाई का जरिया बन गई हैं। इनकी जड़ों से इत्र बनाया जाता है।
बाबागंज विकास क्षेत्र से निकली बकुलाही नदी के किनारे-किनारे भारी मात्रा में कुश पैदा होता है। आमतौर पर ग्रामीण इसकाइस्तेमाल जाड़े के मौसम में आग तापने में करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व कन्नौज से कुछ व्यापारी विकास क्षेत्र बाबागंज के अंजनी गांव में आए और ग्रामीणों को बताया कि कुश की जड़ों से इत्र तैयार होता है और वे इसे 10 रुपये किलो के भाव से उन्हें बेंच दें। तब से कुश की जड़ों की खोदाई शुरू हो गई। ठंड के मौसम में कुश के व्यापारी आते हैं और इसे उठा ले जाते हैं। व्यापारी ददनपाल ने बताया कि ठंड में कुश की जड़ों में अधिक रस होता है। इसलिए इसकी खोदाई जाड़े में ही की जाती है।
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बाबागंज विकास क्षेत्र से निकली बकुलाही नदी के किनारे-किनारे भारी मात्रा में कुश पैदा होता है। आमतौर पर ग्रामीण इसकाइस्तेमाल जाड़े के मौसम में आग तापने में करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व कन्नौज से कुछ व्यापारी विकास क्षेत्र बाबागंज के अंजनी गांव में आए और ग्रामीणों को बताया कि कुश की जड़ों से इत्र तैयार होता है और वे इसे 10 रुपये किलो के भाव से उन्हें बेंच दें। तब से कुश की जड़ों की खोदाई शुरू हो गई। ठंड के मौसम में कुश के व्यापारी आते हैं और इसे उठा ले जाते हैं। व्यापारी ददनपाल ने बताया कि ठंड में कुश की जड़ों में अधिक रस होता है। इसलिए इसकी खोदाई जाड़े में ही की जाती है।
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