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ठंड जान लेने पर आमादा, 56 हजार से अधिक बच्चों को नहीं मिला स्वेटर और यूनिफार्म

Thu, 20 Jan 2022 11:31 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jan 2022 11:31 PM IST
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Intent to die of cold, more than 56 thousand children did not get sweaters and uniforms
children (symbolic)
हाड़ कंपाने वाली ठंड जान लेने पर आमादा है। इसके बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग जिले के 56,432 से अधिक बच्चों के अभिभावकों के खाते में स्वेटर, जूते-मोजे और यूनिफार्म के लिए धनराशि नहीं भेज सका है। 40,000 बच्चों को चौथे चरण में धनराशि भेजने की बात कही जा रही है, जबकि 16,432 बच्चों की आनलाइन फीडिंग में गड़बड़ी होने के कारण उनके अभिभावकों के खातों में रुपये नहीं भेजे जा सके। अधिकारी चुनाव से पहले खातों में धनराशि भेजने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह कार्य इतना आसान नहीं लग रहा है।
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जिले के प्राइमरी, मिडिल, मदरसा, सहायता प्राप्त और राजकीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक में पढ़ने वाले बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा के तहत पहले यूनिफार्म, स्वेटर, स्कूल बैग और जूता-मोजा स्कूलों में वितरित किया जाता था। इस वर्ष शासन ने बच्चों को सीधा लाभ देने के लिए उनके अभिभावकों के खाते में 1100-1100 रुपये भेजने का निर्णय लिया। जिले के 1,83,986 बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि भेजी जानी थी।
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तीन चरणों में 1,27,554 अभिभावकों के खाते में 14,03,09,400 रुपये भेजे जा चुके हैं। 40,000 बच्चों के अभिभावकों के खातों में चौथे चरण में धनराशि भेजने की बात कही जा रही है। यह धनराशि विधानसभा चुनाव से पहले खाते में आने की संभावना है, मगर समस्या16,432 बच्चों के लिए खड़ी हो गई है।
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इन बच्चों के अभिभावकों के खाता नंबर, आधार और आईएफएससी कोड में गड़बड़ी होने के कारण धनराशि खाते में नहीं पहुंच पा रही है।
कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल बंद हैं। ऐसे में शिक्षक अभिभावकों का खाता कैसे अपडेट कराएं। इसे लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। शीर्ष अधिकारी विधानसभा चुनाव से पहले खातों में धनराशि भेजने की बात कह रहे हैं, लेकिन यह बड़ी चुनौती है।
पहली बार शिक्षकों से उठा विश्वास
बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों से पहली बार शासन का विश्वास उठा है। अभी तक स्कूलों के हेडमास्टरों को यूनिफार्म, स्वेटर, जूता-मोजा और स्कूल बैग वितरित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी। हेडमास्टरों के खातों में 50 प्रतिशत धनराशि का पहले और 50 प्रतिशत का बाद में भुगतान होता था। मगर ऐसा पहली बार हुआ जब शिक्षकों से यह जिम्मेदारी छीनकर सीधे बच्चों के अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजने का निर्णय लिया गया। हालांकि इसके पहले शिक्षक बच्चों को नकद वजीफा भी बांटते थे।

जिले के 1,27,554 बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि पहुंच गई है। जिन बच्चों का डाटा गड़बड़ हुआ है, उनमें सुधार कर चौथे चरण के बाद खातों में धनराशि अंतरित की जाएगी। फिलहाल शासन से अभिभावकों के खाते में सीधे धनराशि आ रही है, इसमें विभाग की भू मिका सिर्फ डाटा ऑनलाइन करने की है।
-सुधीर कुमार सिंह, प्रभारी बीएसए
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