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इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड: जांच करने फिर पहुंची सीबीआई
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पूर्व नगर कोतवाल अनिल कुमार। फाइल फोटो
- फोटो : PRATAPGARH
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड: जांच के लिए फिर पहुंची सीबीआई
जिला पंचायत में चश्मदीद लोगों से हुई पूछताछ, तीन दिनों तक दर्ज होगा गवाहों का बयान
एएसपी की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम ने जिले में डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। नगर कोतवाली में चार साल पहले इंस्पेक्टर अनिल की हत्या की जांच करने के लिए छह माह बाद फिर सीबीआई टीम जिले में आ धमकी। एएसपी की अगुवाई में बुधवार को टीम ने घटनास्थल पर कई घंटे तक छानबीन की। कई चश्मदीद लोगों के साथ ही गवाहों के बयान दर्ज किए। सीबीआई टीम तीन दिनों तक रुककर छानबीन करेगी। सीबीआई टीम आने के बाद फिर पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
मूलत: फैजाबाद जिले के रहने वाले अनिल कुमार वर्ष 1998 बैच के दरोगा थे। वह परिवार संग लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर आम्रपाली कालोनी में रहते थे। कानपुर से तबादले पर आए इंस्पेक्टर अनिल कुमार को नगर कोतवाली में तैनाती मिली थी। हालांकि अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ल की हत्या के बाद पुलिस अधीक्षक ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। 19 नवंबर 2015 को वह लखनऊ से कार लेकर आए थे। शहर के वैष्णवी होटल में वह अपने घरेलू नौकर के साथ रुके थे। रात करीब साढ़े आठ बजे मॉडल शाप में बैठे लोगों ने इंस्पेक्टर अनिल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में मृतक इंस्पेक्टर अनिल कुमार के भाई विनोद की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी थी। दूसरे दिन पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए पल्टन बाजार निवासी बोचा सोनी व जीशान को गिरफ्तार कर जेल भेजा। खुलासे को लेकर इंस्पेक्टर अनिल की पत्नी आरती ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने केस दर्ज कर घटना की पड़ताल शुरू की। केस दर्ज करने के बाद करीब चार बार सीबीआई की टीम जांच करने आ चुकी है। बुधवार को सीबीआई के एएसपी एमके जायसवाल की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम फिर जांच करने पहुंची। पहले जिला पंचायत गेस्ट हाउस में घटना के समय मौजूद लोगों से पूछताछ की। शाम को घटनास्थल पर पहुंची। जहां होटल के स्थान पर अब निजी अस्पताल संचालित है। टीम के सदस्य कमरे से लेकर मॉडल शाप व गोली मारने व हत्यारों के भागने वाले स्थान की बारीकी से छानबीन करते रहे। किसी भी सवाल का जवाब देने से टीम के सदस्य बचते रहे। अस्पताल संचालक व होटल के मैनेजर से भी घटना को लेकर सिलसिलेवार पूछताछ होती रही। नौकर के साथ ही इंस्पेक्टर अनिल के साथ रहने वाले कोतवाली में तैनात रहे एक सिपाही को भी टीम खोजती रही।
इनसेट
दिल्ली व लखनऊ से आई टीम बना चुकी है डेमो
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने के लिए छह माह पहले दिल्ली व लखनऊ की संयुक्त टीम जिले में आई थी। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर घटना का डेमो भी बनाया था। उस समय टीम का माथा इस बात पर ठनका था कि यदि नीचे से गोली मारी गई होती तो वह इंस्पेक्टर को लगने के बाद ऊपरी हिस्से की ओर निकलती। जिसे लेकर टीम के लोग संदेह जता रहे थे।
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इनसेट-------
सीएमओ कार्यालय पहुंची टीम
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम बुधवार को कुछ अभिलेखों को लेने के लिए सीएमओ कार्यालय पहुंची। हालांकि उस समय कार्यालय में अफसर व कर्मचारी नहीं थे। हालांकि उस समय कार्यालय बंद हो रहा था।
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जिला पंचायत में चश्मदीद लोगों से हुई पूछताछ, तीन दिनों तक दर्ज होगा गवाहों का बयान
एएसपी की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम ने जिले में डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। नगर कोतवाली में चार साल पहले इंस्पेक्टर अनिल की हत्या की जांच करने के लिए छह माह बाद फिर सीबीआई टीम जिले में आ धमकी। एएसपी की अगुवाई में बुधवार को टीम ने घटनास्थल पर कई घंटे तक छानबीन की। कई चश्मदीद लोगों के साथ ही गवाहों के बयान दर्ज किए। सीबीआई टीम तीन दिनों तक रुककर छानबीन करेगी। सीबीआई टीम आने के बाद फिर पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
मूलत: फैजाबाद जिले के रहने वाले अनिल कुमार वर्ष 1998 बैच के दरोगा थे। वह परिवार संग लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर आम्रपाली कालोनी में रहते थे। कानपुर से तबादले पर आए इंस्पेक्टर अनिल कुमार को नगर कोतवाली में तैनाती मिली थी। हालांकि अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ल की हत्या के बाद पुलिस अधीक्षक ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। 19 नवंबर 2015 को वह लखनऊ से कार लेकर आए थे। शहर के वैष्णवी होटल में वह अपने घरेलू नौकर के साथ रुके थे। रात करीब साढ़े आठ बजे मॉडल शाप में बैठे लोगों ने इंस्पेक्टर अनिल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में मृतक इंस्पेक्टर अनिल कुमार के भाई विनोद की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी थी। दूसरे दिन पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए पल्टन बाजार निवासी बोचा सोनी व जीशान को गिरफ्तार कर जेल भेजा। खुलासे को लेकर इंस्पेक्टर अनिल की पत्नी आरती ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने केस दर्ज कर घटना की पड़ताल शुरू की। केस दर्ज करने के बाद करीब चार बार सीबीआई की टीम जांच करने आ चुकी है। बुधवार को सीबीआई के एएसपी एमके जायसवाल की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम फिर जांच करने पहुंची। पहले जिला पंचायत गेस्ट हाउस में घटना के समय मौजूद लोगों से पूछताछ की। शाम को घटनास्थल पर पहुंची। जहां होटल के स्थान पर अब निजी अस्पताल संचालित है। टीम के सदस्य कमरे से लेकर मॉडल शाप व गोली मारने व हत्यारों के भागने वाले स्थान की बारीकी से छानबीन करते रहे। किसी भी सवाल का जवाब देने से टीम के सदस्य बचते रहे। अस्पताल संचालक व होटल के मैनेजर से भी घटना को लेकर सिलसिलेवार पूछताछ होती रही। नौकर के साथ ही इंस्पेक्टर अनिल के साथ रहने वाले कोतवाली में तैनात रहे एक सिपाही को भी टीम खोजती रही।
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दिल्ली व लखनऊ से आई टीम बना चुकी है डेमो
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने के लिए छह माह पहले दिल्ली व लखनऊ की संयुक्त टीम जिले में आई थी। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर घटना का डेमो भी बनाया था। उस समय टीम का माथा इस बात पर ठनका था कि यदि नीचे से गोली मारी गई होती तो वह इंस्पेक्टर को लगने के बाद ऊपरी हिस्से की ओर निकलती। जिसे लेकर टीम के लोग संदेह जता रहे थे।
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सीएमओ कार्यालय पहुंची टीम
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम बुधवार को कुछ अभिलेखों को लेने के लिए सीएमओ कार्यालय पहुंची। हालांकि उस समय कार्यालय में अफसर व कर्मचारी नहीं थे। हालांकि उस समय कार्यालय बंद हो रहा था।

पूर्व नगर कोतवाल अनिल कुमार हत्या मामले की जांच को वैष्णवी होटल मैनेजर से पूछताछ करते सीबीआई के अ- फोटो : PRATAPGARH