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दम तोड़ रहीं औद्योगिक इकाइयां, 11 में लटक गया ताला

Thu, 03 Jan 2019 12:47 AM IST
shailendra Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़ Published by: shailendra Kumar Updated Thu, 03 Jan 2019 12:47 AM IST
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Industrial locking machine, hanging lock in 11
प्रतीकात्मक तस्वीर
 व्यवसायिक रूप से बेहद कमजोर जिले में औद्योगिक इकाइयां दम तोड़ रही हैं। यहां उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय से कोई प्रयास नहीं हुए हैं। सुविधाएं न मिलने के कारण औद्योगिक क्षेत्र बेहाल पड़ा है। बिजली, पानी और सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। हालत यह है कि औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित 26 इकाइयों में से 11 में ताला लटक गया है। इससे औद्योगिक क्षेत्र में कोई भी व्यापारी काम करना नहीं चाहता है। यही कारण है कि यहां लंबे समय से लोगों को रोजगार भी नहीं मिला।
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जिले में उद्योगों की स्थापना के  लिए बेल्हा के सुखपालनगर को औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया। एक एकड़ में फैले औद्योगिक क्षेत्र में कुल 26 इकाइयों की स्थापना के लिए व्यवसाइयों को जमीन आवंटित की गई। मसाला, आंवले से तैयार उत्पाद, हवाई चप्पल और राइस मिल सहित विभिन्नि छोटे-छोटे उद्योग यहां स्थापित हुए।  इनमे 11 इकाइयों में ताले लटक गए हैं।
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औद्योगिक क्षेत्र में व्यापारियों की सुरक्षा की दृष्टि से भी कुछ नहीं है। लो वोल्टेज के साथ ही पीने के  पानी और सुरक्षा के दृष्टि से भी कुछ नहीं है। पुलिस चौकी की स्थापना की मांग काफी दिनों से चल रही है, मगर अब तक कुछ नहीं हो सका है। पूरे औद्योगिक क्षेत्र की बाउंड्री नहीं बनी हुई है, इससे व्यापारी असुरक्षा के चलते कोई ठोस पहल नहीं करना चाहते हैं। व्यापारी कभी नेताओं, तो कभी अफसरों से फरियाद करते हैं, मगर नतीजा सिर्फ आश्वासन होता है। आलम यह है कि आज तक न तो बाउंड्री बनी, न पुलिस चौकी और न ही बिजली उपकेंद्र की स्थापना हुई। इससे निराश व्यापारियों ने ताला लगा दिया है।
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प्रतिमाह होती है उद्योग बंधु की बैठक
डीएम की अध्यक्षता में जिले के उद्योग बंधु की बैठक प्रति माह होती है। व्यापारी मुद्दा उठाते हैं, मगर बैठक सिर्फ चाय पार्टी तक ही सिमट कर रह जाती है।  

लगभग दो सौ लोगों को मिला था रोजगार
जिले में उद्योग के नाम पर कुछ भी नहीं है। 15 इकाइयां जो चल रही हैं, उनमें अधिकांश कार्य मशीन से होते हैं। ऐसे में सभी इकाइयों में महज दो सौ लोग हैं, जो रोजागार से जुड़े हुए हैं। जबकि सेवायोजन कार्यालय में एक व्यक्ति को भी रोजगार देने की सूचना नहीं है।  

प्रपोजल तैयार होता है, मगर नहीं मिलती है धनराशि  
औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए प्रपोजल तो तैयार किया जाता है, मगर विकास के लिए धनराशि नहीं आती है। इससे व्यवसाइयों की उम्मीदें धूमिल होती जा रही हैं।

औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित 26 इकाइयों में से 11 में ताला लग चुका है। मगर उनका विवाद न्यायालय में होने के कारण दूसरे को आवंटन नहीं किया जा सकता है। सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी और बाउंड्री बनवाने की मांग कई बार की गई, मगर अभी तक धनराशि नहीं मिलने के कारण संभव नहीं हो सका है।  
रामजी, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र।  

जिले को उद्योग के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का प्रयास किया जाएगा। व्यापारी मिलकर अपनी समस्याएं रखें। उनकी दिक्कतें दूर की जाएंगी। आंवले के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट का प्रयास चल रहा है।  

हरिबंश सिंह, सांसद।  

जिले में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री से बात की जाएगी। एटीएल की जमीन खाली पड़ी है, लेकिन मामला कोर्ट में लंबित है। इसकी वजह से उस पर कुछ काम नहीं हो पा रहा है।  
संगमलाल गुप्ता, विधायक, सदर।
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