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कांग्रेस का गढ़ रही पट्टी में अब सपा-भाजपा में सीधी टक्कर

Mon, 31 Jan 2022 01:12 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 31 Jan 2022 01:12 AM IST
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In the belt of Congress stronghold, now there is a direct contest between SP-BJP
पट्टी विधानसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी, मगर 1985 के बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सिर्फ हार मिली। 1989 के विधानसभा चुनाव के बाद अब तक इस विधानसभा सीट पर भाजपा और सपा के बीच ही सीधी टक्कर हुई है। 1991 से अब तक हुए सात विधानसभा चुनावों में पांच बार भाजपा ने बाजी मारी। दो बार सपा के हाथ जीत लगी। इस बार भी भाजपा और सपा की सीधी टक्कर बताई जा रही है। पट्टी विधानसभा सीट पर भाजपा, सपा, बसपा व कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
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पट्टी विधानसभा सीट पर आजादी के बाद हुए नौ चुनावों में सात बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। 1951, 1957, 1962 व 1967 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने लगातार चार बार जीत दर्ज की। 1962 के विधानसभा चुनाव में जनसंघ की लहर में भी कांग्रेस अपना गढ़ बचाने में कामयाब रही। यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी रामकिंकर ने जनसंघ को करारी शिकस्त दी थी। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का दामन छोड़कर राम किंकर बीकेडी पार्टी में शामिल हो गए।
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उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी को मात दी थी। इसके बाद 1974 में कांग्रेस के प्रभाकरनाथ द्विवेदी ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1977 में जेएनपी से राजपति मिश्रा ने जीत दर्ज की। हालांकि इसके बाद 1980 और 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वासुदेव सिह जीते। मगर इसके बाद कांग्रेस की जमीन खिसकने लगी। 1989 में चुनाव में जनता दल से मैदान में उतरे राम लखन ने कांग्रेस के विजय रथ को रोक दिया। इस चुनाव के बाद पट्टी के सियासी समीकरण बदल गए। राम मंदिर का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा था। 1991 में पट्टी में पहली बार कमल खिला था। भाजपा से प्रो. शिवाकांत ओझा ने जीत दर्ज की थी।
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इस चुनाव में भाजपा की सपा से टक्कर हुई थी। 1993 में सपा से रामलखन ने भाजपा प्रत्याशी शिवाकांत ओझा को हराया था। 1993 के बाद 1996, 2002 और 2007 में भाजपा से राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। इन तीनों चुनावों में दो बार सपा और एक बार बसपा ने टक्कर दी थी। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी के राम सिंह पटेल ने भाजपा के मोती सिंह को शिकस्त दी थी। हालांकि जीत-हार का फैसला महज 156 वोटों के अंतर से हुआ था। वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव परिणाम फिर से मोती सिंह के पक्ष में रहा। सपा के राम सिंह पटेल को हराकर वह विधायक बने। इस बार पट्टी विधानसभा सीट पर भाजपा और सपा के बीच ही टक्कर बताई जा रही है। दोनों ही दलों से पुराने धुरंधर मैदान में हैं।
भाजपा से मोती सिंह जीत की लगा चुके हैं हैट्रिक
पट्टी में भाजपा से मोती सिंह लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। 1996, 2002 व 2007 में मोती सिंह ने लगातार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई थी।
अब तक बसपा का नहीं खुला खाता
आजादी के बाद से पट्टी विधानसभा सीट पर 17 बार चुनाव हो चुके हैं। अभी तक यहां बसपा का खाता नहीं खुल सका है। हर बार बसपा को यहां से हार का सामना करना पड़ा है।

जातीय समीकरण पर एक नजर
पट्टी विधानसभा में तीन लाख 53 हजार 164 मतदाता हैं। इनमें सामान्य वर्ग के 148200 मतदाता हैं। जिनमें करीब 60 हजार ब्राह्मण, 55 हजार ठाकुर, 13200 वैश्य और अन्य सामान्य जातियों के 20 हजार मतदाता हैं। पिछड़ों में यादव, कुर्मी सहित कुल 86864 मतदाता हैं। एससी मतदाता करीब 82 हजार हैं। मुस्लिम 36100 हैं।
पट्टी सीट से अब तक रहे विधायक
वर्ष विधायक पार्टी
1951 रामआधार, प्रतापगढ़ नार्थ वेस्ट,
राम किंकर पट्टी नार्थ वेस्ट कांग्रेस
1957 हरिकेश बहादुर कांग्रेस
1962 राम किंकर कांग्रेस
1967 राम किंकर कांग्रेस
1969 रामकिंकर बीकेडी
1974 प्रभाकरनाथद्विवेदी कांग्रेस
1977 राजपति मिश्रा जेएनपी
1980 वासुदेव सिंह कांग्रेस
1985 वासुदेव सिंह कांग्रेस
1989 रामलखन जेडी
1991 शिवाकांत ओझा भाजपा
1993 रामलखन सपा
1996 राजेंद्र प्रताप सिंह भाजपा
2002 राजेंद्र प्रताप सिंह भाजपा
2007 राजेंद्र प्रताप सिंह भाजपा
2012 राम सिंह पटेल सपा
2017 राजेंद्र प्रताप सिंह भाजपा
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