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अहं से नरक हो रही जिंदगी

Fri, 14 Oct 2016 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़। Updated Fri, 14 Oct 2016 11:29 PM IST
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igo clash in faimly
nawazuddin siddiqui with his family
लव मैरेज हो या अरेंज। सात फेरे लेकर जनम-जनम तक साथ रहने की कसम खाने वाले मामूली बात पर अलग हो जा रहे हैं। इस साल तीन माह के भीतर महिला सहायता प्रकोष्ठ में इस तरह के करीब 130 मामले आए। इनमें तकरीबन 60 मामले को सुलझाया गया। लेकिन कुछ का फिर विवाद हो गया। जबकि 15 मामले तो प्रयास के बाद भी नहीं सुलझे और उनमें एफआईआर का आदेश दिया गया।
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नगर कोतवाली क्षेत्र के पूरे केशवराय गायघाट निवासी इरशाद मुुंबई में रहता है। पत्नी को शक हुआ कि उसके पति का दूसरी महिला से मुंबई में संबंध हैं। बस वह पति से नाराज हुई और महिला सहायता प्रकोष्ठ में उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत कर दी। पति को बुलाया गया, लेकिन वह सामने नहीं आया।
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इस मामले में महिला प्रकोष्ठ ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। पूरे नरसिंहभान निवासी सुरेश कुमार का पत्नी से मामूली बात को लेकर मनमुटाव हो गया। रानीगंज की श्यामा देवी भी सुसराल में रहने के दौरान पति से नाराज होकर मायके चली गई। ये कुछ मामले हैं जिनमें न तो दहेज जैसी बात थी और न ही उत्पीड़न। बस शक या मनमुटाव हुआ और दांपत्य जीवन में दरार पड़ गई।  प्रकोष्ठ में दिए जाने वाले प्रार्थनापत्र में तो दहेज उत्पीड़न का ही आरोप होता है लेकिन जांच होती है तो कहीं पत्नी का शक कारण बनता है कहीं पति का।
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 बस शक से सड़क पर परिवार आ जाता है। इसी साल जुलाई, अगस्त सितंबर में प्रकोष्ठ के पास आए प्रार्थना पत्रों में अधिकांश में कहीं भी दहेज उत्पीड़न के आरोप सही नहीं मिले। प्रकोष्ठ ने 60 को तो फिर से मिला दिया, लेकिन 15 में सुलह नहीं हो सकी।


एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। शेष मामलाें में अभी सुलह के प्रयास चल रहे हैं। महिला प्रकोष्ठ प्रभारी का कहना है कि नए जमाने की लड़कियाें का भी ईगो बहुत टकराता है। ससुराल में जल्द एडजेस्ट नहीं कर पातीं।  वहीं महिला प्रकोष्ठ के सदस्य डा. पीयूष कांत शर्मा की मानें तो जो मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। उनमें परदेशी बालम के हैं। बीवियों को यह शिकायत रहती है कि वे कमाने के लिए बाहर जाते हैं और ससुराल में उनकी उपेक्षा        होती है।

 
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