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भूख प्यास से तड़प-तड़प तक मवेशियों की मौत, ग्रामीणों में मचा हड़कंप
Wed, 13 Feb 2019 12:13 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 13 Feb 2019 12:13 AM IST
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आवारा पशु
- फोटो : अमर उजाला
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आवारा पशुओं को पकडक़र कबीर आश्रम में जबरन बंधवा दिया गया था। चारा पानी के अभाव में तड़प-तड़प कर 6 मवेशियों ने दम तोड़ दिया। इस बात की खबर फैलते ही हडक़ंप मच गया। आक्रोशित ग्रामीण आश्रम पर पहुंचे और शेष बचे जानवरों को खोलकर भगा दिया।
देवसरा इलाके के गोदलपट्टी स्थित कबीर आश्रम के आसपास के गांवों से ग्रामीण दर्जनों अवारा पश्ुाओं को तीन दिन पूर्व आश्रम के बाग में पेड़ों से बांध कर चले गए थे। आश्रम में रहने वाले लोग विरोध करते रहे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं सुना। तीन दिनों से मवेशी बिना चारा व पानी के तड़पते रहे। चारा पानी के अभाव में मंगलवार को 6 मवेशियों ने दम तोड़ दिया। मवेशियों के मौत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो हड़कंप मच गया।
आक्रोशित ग्रामीण आश्रम पहुंचे और शेष मवेशियों को पेड़ से खोलकर आजाद कर दिया। आश्रम के महंत करुणेश दास ने बताया कि वह आश्रम पर अकेले रहते हैं। ग्रामीणों द्वारा भारी तादाद में पशुओं को आश्रम पर बांध दिया गया था।
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इस बाबत उन्होने स्थानीय प्रशासन समेत जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी लेकिन बीते तीन दिनों से मवेशियों का सुध लेने कोई नहीं आया। ऐसे में वह क्या कर सकते है। पशुओं की मौत का मामला जब स्थानीय लोगों के संज्ञान तक पहुंचा तो इसे उन लोगों ने खुद आकर वहां से आजाद कर दिया।
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देवसरा इलाके के गोदलपट्टी स्थित कबीर आश्रम के आसपास के गांवों से ग्रामीण दर्जनों अवारा पश्ुाओं को तीन दिन पूर्व आश्रम के बाग में पेड़ों से बांध कर चले गए थे। आश्रम में रहने वाले लोग विरोध करते रहे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं सुना। तीन दिनों से मवेशी बिना चारा व पानी के तड़पते रहे। चारा पानी के अभाव में मंगलवार को 6 मवेशियों ने दम तोड़ दिया। मवेशियों के मौत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो हड़कंप मच गया।
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आक्रोशित ग्रामीण आश्रम पहुंचे और शेष मवेशियों को पेड़ से खोलकर आजाद कर दिया। आश्रम के महंत करुणेश दास ने बताया कि वह आश्रम पर अकेले रहते हैं। ग्रामीणों द्वारा भारी तादाद में पशुओं को आश्रम पर बांध दिया गया था।
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इस बाबत उन्होने स्थानीय प्रशासन समेत जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी लेकिन बीते तीन दिनों से मवेशियों का सुध लेने कोई नहीं आया। ऐसे में वह क्या कर सकते है। पशुओं की मौत का मामला जब स्थानीय लोगों के संज्ञान तक पहुंचा तो इसे उन लोगों ने खुद आकर वहां से आजाद कर दिया।