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हादसे के लिए होटल प्रबंधन जिम्मेदार

Fri, 19 Jun 2015 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Fri, 19 Jun 2015 11:29 PM IST
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Hotel Management is responsible for the accident
बाबागंज स्थित होटल गोयल रेजीडेंसी में शुक्रवार तड़के आग लगने और धुएं से दम घुटने के कारण दस लोगों की मौत के मामले में होटल प्रबंधन की लापरवाही साफ उजागर हो रही है। प्रशासन को शुरुआती जांच में पता चला है कि होटल को फायर विभाग से एनओसी नहीं मिली थी। बिना एनओसी के होटल का संचालन नियमत: गलत है, लेकिन संचालक ने इसकी फिक्र नहीं की। बिना एनओसी के ही होटल का संचालन किया जाता रहा। फायर विभाग ने भी इस मामले में न तो कोई जांच की और न ही कार्रवाई। अब जबकि इतना बड़ा हादसा हो गया तो सबको इसकी याद आई।
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होटल में नीचे आर्यन रेस्टोरेंट चलता है। ऊपर के तीन फ्लोर पर लोगों के ठहरने के लिए कमरे बने हुए थे। हर जगह सुरक्षा के मानकों को लेकर लापरवाही बरती गई। होटल सेफ्टी को लेकर किसी तरह के इंतजाम नहीं किए गए थे। बताते हैं कि रात के समय सबसे नीचे मेन गेट का शटर बंद कर दिया जाता था। इसके ऊपर के फ्लोर पर जहां यात्री ठहरते थे, वहां भी शीशे का दरवाजा लगाया गया था। रात में उसे भी लॉक कर दिया जाता था। शुक्रवार की भोर में जब शार्ट सर्किट के कारण हादसा हुआ तब भी दोनों गेट बंद थे। नीचे आग लगने के बाद ऊपर धुआं तेजी से फैला। ज्यादातर लोग उस समय नींद में थे।
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चारों तरफ से शीशे से पैक होने और खिड़की न होने के कारण लोगों का दम घुटने लगा। दरवाजा बंद होने के कारण कमरे में बंद लोगों को भागने का भी मौका नहीं मिल सका। कुछ लोगों की नींद खुली तो हड़बड़ी में ऊपर से कूद पड़े। कई कर्मचारियों ने भी कूदकर अपनी जान बचाई। होटल के कमरा नंबर 115 में ठहरे इलाहाबाद निवासी मनोज शर्मा ने सुबह करीब पौने पांच बजे पत्नी से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि होटल की पूरी बिल्डिंग में धुआं में फैला हुआ है और मेरा दम घुट रहा है। उनकी पत्नी ममता शर्मा से जानकारी मिलने के बाद प्रतापगढ़ निवासी संजय द्विवेदी दस मिनट के भीतर होटल पहुंच गए। उस समय चारों तरफ सिर्फ धुआं और आग थी। संजय किसी तरह हिम्मत बांधकर अंदर घुसे और कमरे का दरवाजा तोड़ा। अंदर मनोज बेसुध पड़े थे। उन्हें किसी तरह जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी सांस थम चुकी थी। शुरुआत में ही आग पर काबू पा लिया गया होता और इतनी बड़ी घटना नहीं होती।
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