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धान खरीद : सरकारी व्यवस्था ध्वस्त, किसान हैरान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Dec 2014 11:30 PM IST
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प्रतापगढ़। धूप और बारिश में पसीना बहाकर खेतों में धान पैदा करने वाले किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था से निराश होना पड़ रहा है। सवा दो महीने का समय बीतने के बाद भी किसी भी केंद्र पर खरीद शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में किसानों को सरकार और उसकी व्यवस्था से निराश होना पड़ रहा है।
किसान, साहूकाराें और दलालाें का शिकार न हाें। उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य मिले। सरकार ने 1360 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद का रेट तय कर जिले के अफसराें को 45 हजार एमटी धान खरीदने का लक्ष्य दे दिया। खाद्य विभाग, कोआपरेटिव, यूपी एग्रो सहित विभिन्न विभागाें के अधिकारियों ने पहली अक्तूबर 2014 को ही जिले में 43 क्रय केंद्र खोल दिया। केंद्राें पर खरीद के लिए 1 अक्तूबर 2014 से 31 जनवरी 2015 का समय निर्धारित किया गया। केंद्राें के कर्मचारियों को पहले से ही हाईब्रीड धान की खरीद करने को रोक दिया गया था। पुराने बीज वाले धान की खरीद के लिए भी मानक ऐसा तैयार किया कि किसी की उपज उस पर खरी नहीं उतर सकी। किसानों ने खरीद केंद्राें का चक्कर लगाया लेकिन हार गए। पूर्व में सक्रिय दलालों ने भी अधिकारियाें की गाइडलाइन देख हाथ खड़ा कर दिया। ऐसे में 100-200 क्विंटल धान बेचने वाले किसान बेहद निराश हैं। व्यापारी मुश्किल से एक हजार रुपये क्विंटल की कीमत पर धान खरीदने को राजी हो रहे हैं।
शहर के करीब महुली मंडी में खुले धान क्रय केंद्र पर 11 नमूने फेल हो चुके हैं। यहां भी हाईब्रीड धान की खरीद तो पहले से ही मना कर दी गई थी। कुछ किसान देसी मंसूरी का सेेंपल लेकर आए। खाद्य विभाग के साथ ही एफसीआई के भी कर्मचारियों ने सेंपल चेक किया लेकिन वह उनके मानक पर खरा नहीं उतर सका। किसानों को विश्वास था कि उनका धान हाईब्रीड नहीं है, उसे खरीद के लिए हरी झंडी मिल जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सेंपल की जांच में धान पतला होने के साथ पइया भी मिलीं।
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डिप्ट आरएमओ डीपी सिंह ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम का मानक ऐसा है कि कोई भी राइसमिलर उतना चावल देने को तैयार नहीं है। अभी एफसीआई का 10 हजार क्विंटल चावल पहले से ही बकाया है। ऐसे में केंद्रों को हाइब्रिड धान खरीदने से मना कर दिया गया है। देसी मंसूरी का भी सेंपल परखा जा रहा है। सेंपल की जांच में हमारे साथ ही एफसीआई के अधिकारी भी शामिल हैं। अभी कहीं का सेंपल पास नहीं हो सका है। इसलिए खरीद शुरू नहीं हो सकी।
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किसान, साहूकाराें और दलालाें का शिकार न हाें। उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य मिले। सरकार ने 1360 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद का रेट तय कर जिले के अफसराें को 45 हजार एमटी धान खरीदने का लक्ष्य दे दिया। खाद्य विभाग, कोआपरेटिव, यूपी एग्रो सहित विभिन्न विभागाें के अधिकारियों ने पहली अक्तूबर 2014 को ही जिले में 43 क्रय केंद्र खोल दिया। केंद्राें पर खरीद के लिए 1 अक्तूबर 2014 से 31 जनवरी 2015 का समय निर्धारित किया गया। केंद्राें के कर्मचारियों को पहले से ही हाईब्रीड धान की खरीद करने को रोक दिया गया था। पुराने बीज वाले धान की खरीद के लिए भी मानक ऐसा तैयार किया कि किसी की उपज उस पर खरी नहीं उतर सकी। किसानों ने खरीद केंद्राें का चक्कर लगाया लेकिन हार गए। पूर्व में सक्रिय दलालों ने भी अधिकारियाें की गाइडलाइन देख हाथ खड़ा कर दिया। ऐसे में 100-200 क्विंटल धान बेचने वाले किसान बेहद निराश हैं। व्यापारी मुश्किल से एक हजार रुपये क्विंटल की कीमत पर धान खरीदने को राजी हो रहे हैं।
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शहर के करीब महुली मंडी में खुले धान क्रय केंद्र पर 11 नमूने फेल हो चुके हैं। यहां भी हाईब्रीड धान की खरीद तो पहले से ही मना कर दी गई थी। कुछ किसान देसी मंसूरी का सेेंपल लेकर आए। खाद्य विभाग के साथ ही एफसीआई के भी कर्मचारियों ने सेंपल चेक किया लेकिन वह उनके मानक पर खरा नहीं उतर सका। किसानों को विश्वास था कि उनका धान हाईब्रीड नहीं है, उसे खरीद के लिए हरी झंडी मिल जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सेंपल की जांच में धान पतला होने के साथ पइया भी मिलीं।
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डिप्ट आरएमओ डीपी सिंह ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम का मानक ऐसा है कि कोई भी राइसमिलर उतना चावल देने को तैयार नहीं है। अभी एफसीआई का 10 हजार क्विंटल चावल पहले से ही बकाया है। ऐसे में केंद्रों को हाइब्रिड धान खरीदने से मना कर दिया गया है। देसी मंसूरी का भी सेंपल परखा जा रहा है। सेंपल की जांच में हमारे साथ ही एफसीआई के अधिकारी भी शामिल हैं। अभी कहीं का सेंपल पास नहीं हो सका है। इसलिए खरीद शुरू नहीं हो सकी।