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लॉकडाउन में सरकार को 27 करोड़ का नुकसान
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Government lost 27 crores in lockdown
लॉकडाउन में सरकार को व्यापार कर के रूप में मिलने वाले राजस्व के 27 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लॉकडाउन के तीन माह में 31.45 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य था, जो महज 4.49 करोड़ तक ही सिमटकर रह गया। इससे 26.96 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कारोबार ठप होने से जिले के 60 प्रतिशत व्यवसायियों ने रिटर्न दाखिल करने से हाथ खड़ा कर दिए। हालांकि, सरकार ने 31 अक्तूबर तक रिटर्न दाखिल करने का मौका दिया है।
वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए घोषित लॉकडाउन से राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। वाणिज्य कर विभाग से व्यापार कर के रूप में प्राप्त होने वाले राजस्व को बड़ा झटका लगा है। लॉकडाउन के तीन माह में 31.45 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य था, जो महज 4.49 करोड़ तक सिमटकर रह गया। इससे सरकार को 26.96 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है।
अप्रैल में 9.05 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य था, मगर सिर्फ 1.08 करोड़ रुपये ही मिले। मई में राजस्व वसूली ने अब तक का रिकार्ड ही तोड़ दिया। इस माह 10.70 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य था, मगर मात्र 67 लाख रुपये ही मिले। जून माह में 11.70 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखकर अफसरों को तेजी दिखाने और व्यवसायियों से संपर्क कर राजस्व जमा करने का दबाव बनाने के बावजूद 2.74 करोड़ रुपये ही मिल सके। जिले के 60 प्रतिशत व्यवसायियों ने लॉकडाउन में रिटर्न ही फाइल नहीं किया।
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कचहरी बंद होने से नहीं दाखिल हुआ रिटर्न
जिला कचहरी हॉटस्पॉट के दायरे में आने और लंबे समय के लिए बंद होने से व्यवसायियों का संपर्क वकीलों से टूट गया, इससे वह रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कोरोना संक्रमण कम होते ही स्थितियां सामान्य हो जाएंगी।
रिसोर्स ऑफ रेवन्यू की हो रही खोज
राजस्व जुटाने में फेल शीर्ष अधिकारी अब रिसोर्स ऑफ रेवन्यू के लिए दबाब बना रहे हैं। हालात यह है कि जिन व्यवसायियों रजिस्ट्रेशन कराया है, वह रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं। विभाग नए कारोबारियों को खोजकर लक्ष्य पूरा करने का दबाव बना रहा है। विभाग का दावा है कि 200 नए व्यवसायियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, मगर अभी राजस्व में कोई अपेक्षित सुधार नहीं आया है।
लॉकडाउन में व्यवसाय ठप होने से राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। अनलॉक-2 में भी नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही है। जब तक कारोबार में तेजी नहीं आएगी, तब तक राजस्व में अपेक्षाकृत सुधार होना मुश्किल है।
वीके यादव, उपायुक्त, वाणिज्य कर
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वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए घोषित लॉकडाउन से राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। वाणिज्य कर विभाग से व्यापार कर के रूप में प्राप्त होने वाले राजस्व को बड़ा झटका लगा है। लॉकडाउन के तीन माह में 31.45 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य था, जो महज 4.49 करोड़ तक सिमटकर रह गया। इससे सरकार को 26.96 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है।
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अप्रैल में 9.05 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य था, मगर सिर्फ 1.08 करोड़ रुपये ही मिले। मई में राजस्व वसूली ने अब तक का रिकार्ड ही तोड़ दिया। इस माह 10.70 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य था, मगर मात्र 67 लाख रुपये ही मिले। जून माह में 11.70 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखकर अफसरों को तेजी दिखाने और व्यवसायियों से संपर्क कर राजस्व जमा करने का दबाव बनाने के बावजूद 2.74 करोड़ रुपये ही मिल सके। जिले के 60 प्रतिशत व्यवसायियों ने लॉकडाउन में रिटर्न ही फाइल नहीं किया।
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कचहरी बंद होने से नहीं दाखिल हुआ रिटर्न
जिला कचहरी हॉटस्पॉट के दायरे में आने और लंबे समय के लिए बंद होने से व्यवसायियों का संपर्क वकीलों से टूट गया, इससे वह रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कोरोना संक्रमण कम होते ही स्थितियां सामान्य हो जाएंगी।
रिसोर्स ऑफ रेवन्यू की हो रही खोज
राजस्व जुटाने में फेल शीर्ष अधिकारी अब रिसोर्स ऑफ रेवन्यू के लिए दबाब बना रहे हैं। हालात यह है कि जिन व्यवसायियों रजिस्ट्रेशन कराया है, वह रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं। विभाग नए कारोबारियों को खोजकर लक्ष्य पूरा करने का दबाव बना रहा है। विभाग का दावा है कि 200 नए व्यवसायियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, मगर अभी राजस्व में कोई अपेक्षित सुधार नहीं आया है।
लॉकडाउन में व्यवसाय ठप होने से राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। अनलॉक-2 में भी नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही है। जब तक कारोबार में तेजी नहीं आएगी, तब तक राजस्व में अपेक्षाकृत सुधार होना मुश्किल है।
वीके यादव, उपायुक्त, वाणिज्य कर