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पंचमेवा- केले के भोग से प्रसन्न होती हैं लक्ष्मी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:22 PM IST
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पंचमेवा और केले का भोग लगाने और कमल पुष्प से पूजन करने पर मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न होती हैं। सहस्र कमल पर विराजमान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन करने पर उनकी कृपा बरसती है और भक्त को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देती है।
दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा विधि-विधान से होती है। उल्लू की सवारी करने वाली मां लक्ष्मी सहस्र कमलों की पंखुड़ियों पर विराजमान होती हैं। दिवाली के दिन कमल पुष्प अर्पित कर पंचमेवा और फलों में केला, सेब और नाशपाती का भोग लगाने पर वह जल्दी प्रसन्न होती हैं। भगवान गणेश की पूजा करने के साथ ही लड्डू से भोग लगाना चाहिए। भगवान गणेश चूहा की सवारी करते हैं, इसलिए गणेशजी को भोग लगाने के बाद लड्डू का कुछ टुकड़ा घरों में बिखेर देना चाहिए। पं.ओम प्रकाश पांडेय अनिरुध्द रामानुजदास ने बताया कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूजन में कमल का पुष्प, पंचमेवा और फल आवश्यक होता है। पंचमेवा और फल के अभाव में किया गया पूजन पूर्ण नहीं माना जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान गणेशजी चूहा की सवारी करते हैं, इसलिएलड्डू का भोग लगाने के बाद घरों में लड्डू के टुकड़े बिखेर देने चाहिए।
घर और बाहर जलाएं घी-सरसों के तेल के दीये
दिवाली पर घर और बाहर देशी घी और सरसों के तेल के दीये जलाएं। दीये जलाने से पहले थोड़ी सावधानी बरतें। कभी भी सूखे दीये में घी न डालें। दीया जलाने के तीन घंटे पहले इसे पानी में भिगो दें। उसके बाद इसे साफ कर पहले बाती और फिर घी या तेल डालना चाहिए। घी और सरसोें के तेल का दीया जलाने से पर्यावरण जहां शुद्ध होगा, वहीं दृश्य और अदृश्य कीड़े-मकोड़ों का नाश हो जाएगा। संक्रमण काल और बीमारियों से मुक्ति मिलेगी। बरसात के बाद पड़ने वाले दिवाली के त्योहार से वातावरण शुद्ध हो जाता है।
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ग्रामीण और शहरी इलाकों में देशी घी और सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए। वैसे तो देशी घी के बाद लोग तिल के तेल का दीये जलाते हैं, मगर सरसों के तेल के कई फायदे हैं। पर्यावरणविद् डॉ. पीयूषकांत शर्मा की मानें तो पर्यावरण को शुद्ध करने में देशी घी और सरसों के तेल सहायक होते हैं। बरसात में पनपने वाले कीट-पतंगों का नाश करने के लिए देशी घी और सरसों का तेल काफी कारगर होता है। तेल और घी जलने से उठने वाला धुआं दृश्य और अदृश्य कीट-पतंगों का नाश कर देते हैं। इससे वातावरण जहां शुद्ध होता है, वहीं तेल और घी के दिए से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसीलिए धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान हवन में घी की आहुति करके देवी- देवताओं का आह्वान किया जाता है।
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दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा विधि-विधान से होती है। उल्लू की सवारी करने वाली मां लक्ष्मी सहस्र कमलों की पंखुड़ियों पर विराजमान होती हैं। दिवाली के दिन कमल पुष्प अर्पित कर पंचमेवा और फलों में केला, सेब और नाशपाती का भोग लगाने पर वह जल्दी प्रसन्न होती हैं। भगवान गणेश की पूजा करने के साथ ही लड्डू से भोग लगाना चाहिए। भगवान गणेश चूहा की सवारी करते हैं, इसलिए गणेशजी को भोग लगाने के बाद लड्डू का कुछ टुकड़ा घरों में बिखेर देना चाहिए। पं.ओम प्रकाश पांडेय अनिरुध्द रामानुजदास ने बताया कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूजन में कमल का पुष्प, पंचमेवा और फल आवश्यक होता है। पंचमेवा और फल के अभाव में किया गया पूजन पूर्ण नहीं माना जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान गणेशजी चूहा की सवारी करते हैं, इसलिएलड्डू का भोग लगाने के बाद घरों में लड्डू के टुकड़े बिखेर देने चाहिए।
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घर और बाहर जलाएं घी-सरसों के तेल के दीये
दिवाली पर घर और बाहर देशी घी और सरसों के तेल के दीये जलाएं। दीये जलाने से पहले थोड़ी सावधानी बरतें। कभी भी सूखे दीये में घी न डालें। दीया जलाने के तीन घंटे पहले इसे पानी में भिगो दें। उसके बाद इसे साफ कर पहले बाती और फिर घी या तेल डालना चाहिए। घी और सरसोें के तेल का दीया जलाने से पर्यावरण जहां शुद्ध होगा, वहीं दृश्य और अदृश्य कीड़े-मकोड़ों का नाश हो जाएगा। संक्रमण काल और बीमारियों से मुक्ति मिलेगी। बरसात के बाद पड़ने वाले दिवाली के त्योहार से वातावरण शुद्ध हो जाता है।
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ग्रामीण और शहरी इलाकों में देशी घी और सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए। वैसे तो देशी घी के बाद लोग तिल के तेल का दीये जलाते हैं, मगर सरसों के तेल के कई फायदे हैं। पर्यावरणविद् डॉ. पीयूषकांत शर्मा की मानें तो पर्यावरण को शुद्ध करने में देशी घी और सरसों के तेल सहायक होते हैं। बरसात में पनपने वाले कीट-पतंगों का नाश करने के लिए देशी घी और सरसों का तेल काफी कारगर होता है। तेल और घी जलने से उठने वाला धुआं दृश्य और अदृश्य कीट-पतंगों का नाश कर देते हैं। इससे वातावरण जहां शुद्ध होता है, वहीं तेल और घी के दिए से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसीलिए धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान हवन में घी की आहुति करके देवी- देवताओं का आह्वान किया जाता है।