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कुंडा के 43 गांवों से होकर निकलेगा गंगा एक्सप्रेसवे
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राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना गंगा एक्सप्रेसवे से कुंडा के 43 गांव प्रभावित होंगे। शासन ने इसका सर्वे करवा लिया है। अब उपजिलाधिकारी से जमीन अधिग्रहण करने के संबंध में सूचनाएं मांगी हैं। गंगा एक्सप्रेसवे 13 मीटर ऊंचा और 130 मीटर चौड़ा होगा।
राज्य सरकार की प्रस्तावित परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे कुंडा के 43 गांवों से होकर गुजरेगा। इसका रोडमैप तैयार हो चुका है। इसके साथ ही शासन ने इसका सर्वे भी करवा लिया है। इसके लिए सरकार किसानों की जमीनों को 130 मीटर तक अधिग्रहण करेगी। यह एक्सप्रेस वे 13 मीटर ऊंचा रहेगा। यह एक्सप्रेस वे गोगौरी गांव में रामवनगमन मार्ग से को काटता हुआ प्रयागराज की सीमा में प्रवेश करेगा।
पहले फेज में यह एक्सप्रेस वे मेरठ से गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बंदायू, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली के बाद प्रतापगढ़ की सीमा लालगंज तहसील के परशुरामपुर में दाखिल होगा। जनपद में लालगंज के बाद यह कुंडा तहसील के सांडा हर्षपुर, कोटिला बादी, गुजवर, चौरंग, सराय छत्ता, भवानीगंज कोटा, पूरे दयाल, रायअसकरनपुर, गिस्था, पनाहनगर, झींगुर, अठैसा, प्रीतमपुर, भैंसना, चेतरा, गोपालपुर, महेवा मलकिया, महेशगंज, बहोरिकपुर, सुल्तानपुर, कुशहा, रायगढ़, उमरापट्टी, पुवांसी, पूरे खांडे, मलावा छजईपुर, रोर, पूरे खोथई, त्रिलोकपुर, भटपुरवा, मैधार, भाव, शुकुलपुर, लालशाह का पुरवा, काशीपुर, धारूपुर, मुहम्मदपुर भाव, सराय बबुइन, धमावा, गोगौरी, भाट पुरवा, गोगौर, नौढिय़ा के बाद प्रयागराज की सीमा में दाखिल हो जाएगा।
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इन सभी गांवों के किसानों की जमीन सरकार अधिग्रहण करेगी। माना जा रहा है कि 2020 में ही जमीनों के अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद 2021 में इस पर काम शुरू हो जाएगा। यह एक्सप्रेसवे 2024 में पूरी तरह से तैयार होने का दावा किया जा रहा है। इधर जमीनों केे बारे में सूचनाएं इकट्ठी करने के लिए एसडीएम को पत्र लिखा गया है।
प्राकृतिक संपत्तियों के नुकसान को लेकर बदली गई दिशा
प्राकृतिक संपत्तियों को नुकसान न हो, इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे की दिशा बदली गई है। पूर्व में इस एक्सप्रेसवे को गंगा के किनारे से निकालने के लिए सर्वे किया गया था। इसके लिए जगह-जगह पत्थर भी लगा दिए गए थे। बाद में इस रोड पर चलने वाले वाहनेां के प्रदूषण के कारण गंगा में रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।
इसके साथ ही गंगा के किनारे फलपट्टी क्षेत्र को इसके चलते काफी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी। इन सारी समस्याओं को देखते हुए शासन ने इसका रूट चेंज करते हुए गंगा से इसकी दूरी 20 किमी के आसपास कर दी है। अब यह गांव और किसानों की जमीन को भी प्रभावित करेगा।
हाईवे के साथ दोनों तरफ बनेंगे सर्विस रूट
गंगा एक्सप्रेस वे 13 मीटर ऊंचा होने के चलते इसके दोनों तरफ सर्विस रूट बनाया जाएगा। यानी दोनों तरफ आम लोगों के लिए सड़कें बनेंगी। 130 मीटर की चौड़ाई के दायरे में ही सड़कें बनेंगी। लोगों को एक्सप्रेस वे पर चढ़ने के लिए जगह-जगह ब्रिज भी बनाए जाएंगे।
व्यवसाय के लिए लोगों को आमंत्रित करेगा शासन
गंगा एक्सप्रेसवे बनाने के साथ ही शासन आम लोगों को इस परियोजना के माध्यम से व्यवसाय के लिए भी जोड़ने का प्रयास करेगा। वह अपनी अधिग्रहीत जमीन पर अस्पताल, रेस्टोरेंट, होटल के साथ ही दुकानें भी खुलवाएगा। इसके लिए अधिग्रहीत जमीन को लोगों को लीज पर दिया जाएगा। लीज पर सरकारी जमीन को लेकर लोग अपना व्यवसाय कर सकेंगे।
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राज्य सरकार की प्रस्तावित परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे कुंडा के 43 गांवों से होकर गुजरेगा। इसका रोडमैप तैयार हो चुका है। इसके साथ ही शासन ने इसका सर्वे भी करवा लिया है। इसके लिए सरकार किसानों की जमीनों को 130 मीटर तक अधिग्रहण करेगी। यह एक्सप्रेस वे 13 मीटर ऊंचा रहेगा। यह एक्सप्रेस वे गोगौरी गांव में रामवनगमन मार्ग से को काटता हुआ प्रयागराज की सीमा में प्रवेश करेगा।
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पहले फेज में यह एक्सप्रेस वे मेरठ से गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बंदायू, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली के बाद प्रतापगढ़ की सीमा लालगंज तहसील के परशुरामपुर में दाखिल होगा। जनपद में लालगंज के बाद यह कुंडा तहसील के सांडा हर्षपुर, कोटिला बादी, गुजवर, चौरंग, सराय छत्ता, भवानीगंज कोटा, पूरे दयाल, रायअसकरनपुर, गिस्था, पनाहनगर, झींगुर, अठैसा, प्रीतमपुर, भैंसना, चेतरा, गोपालपुर, महेवा मलकिया, महेशगंज, बहोरिकपुर, सुल्तानपुर, कुशहा, रायगढ़, उमरापट्टी, पुवांसी, पूरे खांडे, मलावा छजईपुर, रोर, पूरे खोथई, त्रिलोकपुर, भटपुरवा, मैधार, भाव, शुकुलपुर, लालशाह का पुरवा, काशीपुर, धारूपुर, मुहम्मदपुर भाव, सराय बबुइन, धमावा, गोगौरी, भाट पुरवा, गोगौर, नौढिय़ा के बाद प्रयागराज की सीमा में दाखिल हो जाएगा।
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इन सभी गांवों के किसानों की जमीन सरकार अधिग्रहण करेगी। माना जा रहा है कि 2020 में ही जमीनों के अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद 2021 में इस पर काम शुरू हो जाएगा। यह एक्सप्रेसवे 2024 में पूरी तरह से तैयार होने का दावा किया जा रहा है। इधर जमीनों केे बारे में सूचनाएं इकट्ठी करने के लिए एसडीएम को पत्र लिखा गया है।
प्राकृतिक संपत्तियों के नुकसान को लेकर बदली गई दिशा
प्राकृतिक संपत्तियों को नुकसान न हो, इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे की दिशा बदली गई है। पूर्व में इस एक्सप्रेसवे को गंगा के किनारे से निकालने के लिए सर्वे किया गया था। इसके लिए जगह-जगह पत्थर भी लगा दिए गए थे। बाद में इस रोड पर चलने वाले वाहनेां के प्रदूषण के कारण गंगा में रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।
इसके साथ ही गंगा के किनारे फलपट्टी क्षेत्र को इसके चलते काफी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी। इन सारी समस्याओं को देखते हुए शासन ने इसका रूट चेंज करते हुए गंगा से इसकी दूरी 20 किमी के आसपास कर दी है। अब यह गांव और किसानों की जमीन को भी प्रभावित करेगा।
हाईवे के साथ दोनों तरफ बनेंगे सर्विस रूट
गंगा एक्सप्रेस वे 13 मीटर ऊंचा होने के चलते इसके दोनों तरफ सर्विस रूट बनाया जाएगा। यानी दोनों तरफ आम लोगों के लिए सड़कें बनेंगी। 130 मीटर की चौड़ाई के दायरे में ही सड़कें बनेंगी। लोगों को एक्सप्रेस वे पर चढ़ने के लिए जगह-जगह ब्रिज भी बनाए जाएंगे।
व्यवसाय के लिए लोगों को आमंत्रित करेगा शासन
गंगा एक्सप्रेसवे बनाने के साथ ही शासन आम लोगों को इस परियोजना के माध्यम से व्यवसाय के लिए भी जोड़ने का प्रयास करेगा। वह अपनी अधिग्रहीत जमीन पर अस्पताल, रेस्टोरेंट, होटल के साथ ही दुकानें भी खुलवाएगा। इसके लिए अधिग्रहीत जमीन को लोगों को लीज पर दिया जाएगा। लीज पर सरकारी जमीन को लेकर लोग अपना व्यवसाय कर सकेंगे।