प्रतापगढ़ : फर्जी अभिलेख पर नौकरी कर जालसाजों ने बेसिक शिक्षा विभाग को लगाया तीन करोड़ का चूना
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की धड़-पकड़ जारी है। अभिलेखों के सत्यापन में खेल का खुलासा होने पर इन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। मगर तब तक यह विभाग से वेतन के रुप में लाखों रुपये ऐंठ देते हैं।
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बेसिक शिक्षा में फर्जी अभिलेखों में नौकरी करके जालसाजों ने बेसिक शिक्षा विभाग को 3.05 करोड़ रुपये का चूना लगा चुके हैं। विभाग ने पांच वर्षो में 78 शिक्षकों को बर्खास्त किया। जिसमें 17 शिक्षकों के बगैर वेतन भुगतान हुए ही बाहर का रास्ता दिखाया गया। जबकि 61 शिक्षकों से 3.05 करोड़ रुपये की रिकवरी होनी है, मगर अभी तक किसी भी शिक्षक ने एक पाई नहीं लौटाया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की धड़-पकड़ जारी है। अभिलेखों के सत्यापन में खेल का खुलासा होने पर इन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। मगर तब तक यह विभाग से वेतन के रुप में लाखों रुपये ऐंठ देते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में बीते पांच वर्षो में 78 शिक्षक ऐसे पकड़े गए, जिनके अभिलेख फर्जी मिलने पर उन्हें बर्खास्त किया गया । इनमें से 17 शिक्षक ऐसे थे, जो वेतन भुगतान के पहले ही अफसरों के गिरफ्त में आ गए और 61 शिक्षक-शिक्षिकाएं ऐसी थी।
जिन्होंने चार से सात साल नौकरी करके लाखों रुपये वेतन के रूप में हासिल किया। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद जब विभाग ने वेतन के रुप में ली गई धनराशि की रिकवरी करने का नोटिस जारी किया। मगर फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति ने अभी तक एक रुपये वापस नहीं किया है। विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाय तो फर्जीवाड़े में शामिल 61 शिक्षकों से 3.05 करोड़ रुपये की रिकवरी होनी है। नोटिस जारी हो रहा है, मगर कोई वापस करने को तैयार नहीं है।
सबसे अधिक राजकुमारी ने 26 साल की थी नौकरी
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेख पर सबसे अधिक समय तक नौकरी करने का रिकार्ड बेलखरनाथधाम ब्लाक की राजकुमारी ने बनाय है। उन्होंने 26 साल की नौकरी में 17.23 लाख रुपये वेतन लिया था। विभाग ने रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया, मगर अभी तक वापस नहीं किया है।
छह माह से चार शिक्षकों की दबा रखी थी फाइल
बेसिक शिक्षा विभाग को चार शिक्षकों का अभिलेख फर्जी होने की जानकारी छह माह पहले हो गई थी। विभाग ने वेतन भुगतान पर रोक तो लगा दिया था, मगर बर्खास्तगी से बीएसए कतरा रहे थे। छह माह बाद बीएसए ने बृहस्पतिवार को वंदना सिंह, मो. इकबाल, नौशाद अली, राम प्रकाश धोबी को बर्खास्त करने का फैसला लिया।
जिन शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन अभी तक नहीं हुआ था, उसके लिए अभियान चलाया गया है। जिसमें अभिलेख फर्जी मिलने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। रिकवरी के लिए नोटिस जारी की गई है। - भूपेंद्र सिंह, बीएसए
स्कूल से गायब 12 शिक्षक -शिक्षिकाओं का कटा वेतन
बेसिक शिक्षा विभाग के औचक निरीक्षण अभियान में गायब मिले छह शिक्षक और छह शिक्षिकाओं का एक-एक दिन का वेतन काटा गया है। बीएसए भूपेंद्र सिंह ने शिक्षकों से समय से स्कूल पहुंचने को कहा है। कालाकांकर ब्लाक के कंपोजिट स्कूल ऐंठू में तैनात नितिन कुमार और नरेंद्र कुमार, कंपोजिट कियावां में शिवाकांत पांडेय, आसपुर देवसरा के गौरामाफी व्दितीय में तैनात नरेंद्र सरोज, सांगीपुर के पूरे कुशही में शिवशंकर, कुंडा के बहादुर में सुनील कुमार श्रीवास्तव का एक-एक दिन का मानदेय काटा गया है। आसपुर देवसरा के डभियार की ज्योति शिखा सिंह, गौरा के संडिला की श्यामकली, मानधाता के पुरेली की प्रीती सिंह, सदर के कैथन का पुरवा की सरिता पांडेय , पट्टी के सराय मधई की शशि मिश्रा, कालाकांकर के कियावां की लवली श्रीवास्तव के गायब मिलने पर बीएसए ने एक दिन के वेतन भुगतान पर रोक लगा दिया है।