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फर्जीवाड़े में बर्खास्त 17 अध्यापकों पर सात साल बाद भी नहीं हुई एफआईआर

Wed, 29 Jan 2020 12:15 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 12:15 AM IST
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FIR registered on 17 sacked teachers in fraud, even after seven years
teacher
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी करने वाले 35 शिक्षकों की पहचान करने के बाद अफसर 17 को बचाने में जुटे रहे। 18 फर्जी शिक्षकों पर केस दर्ज हुआ, लेकिन 17 को अभयदान दे दिया गया। 17 अध्यापकों के खिलाफ सात साल बाद भी मुकदमा नहीं दर्ज हो पाया है। नेताओं के दबाव में अफसरों ने फर्जीवाड़े की फाइल ही दबाकर रख दी थी।
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शासन के शिकंजा कसने पर विभाग को याद आया और मंगलवार को बीएसए ने बीईओ को रिमाइंडर कर अविलंब मुकदमा दर्ज कराने को कहा है। उधर, विभाग ने फर्जीवाड़ा करके वेतन लेने वाले 18 शिक्षकों को वसूली का नोटिस थमाया था, मगर अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं मिल सकी है।
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बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी करने वालों को अफसर बचा रहे हैं। वर्ष 2013 से 2015 तक फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी करने वाले 17 शिक्षकों की पहचान हुई। ऑफ लाइन सत्यापन में खुलासा होने के बाद इन शिक्षकों को विभाग ने बर्खास्त तो कर दिया, मगर जब मुकदमा दर्ज कराने की बारी आई तो कन्नी काट गए। विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारियों को मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्र तो लिखा, मगर उसके बाद क्या हुआ, कभी पलट कर नहीं देखा।
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बस्ती और बदायूं में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद शासन ने बीएसए से एफआईआर की प्रति मांगी तो मुकदमा लिखाना याद आया। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर संबंधित थाने में अविलंब मुकदमा दर्ज कराने को कहा है। इधर विभाग ने 2015 के बाद फर्जीवाड़ा कर नियुक्ति पाने वाले 18 शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही उन्हें रिकवरी का नोटिस भी दिया, लेकिन वसूली नहीं हो पाई। इन फर्जी शिक्षकों ने 18-18 माह का वेतन लिया था।
17 शिक्षकों को नहीं मिला था वेतन
फर्जीवाड़े में धरे गए 17 अध्यापकों को विभाग से वेतन नहीं मिला था। हालांकि इन शिक्षकों ने स्वयं जो प्रमाणपत्र सत्यापन कराकर विभाग में जमा किया था, उसमें सब कुछ ठीक था। विभाग की गोपनीय जांच में अंकपत्र फर्जी मिलने का खुलासा हुआ था।

फर्जीवाड़े के जो मामले हमारे संज्ञान में आ रहे हैं, उनका मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। जिन 17 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था, वह पुराना मामला है। मेरे संज्ञान में नहीं था। शासन का पत्र आते ही खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर अविलंब मुकदमा दर्ज कराने को कहा गया है। अशोक कुमार सिंह, बीएसए
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