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किसानों के गले में कर्ज का फंदा
चंद्र प्रकाश उपाध्याय/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sat, 25 Apr 2015 02:03 AM IST
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प्रतापगढ़। पट्टी तहसील के किठौली गांव के किसान लक्ष्मी नारायण ने खरीफ और रबी की फसल की खेती के लिए बैंक से करीब एक लाख 85 हजार रुपये का लोन लिया था। तैयारी थी कि रबी की फसल होने के बाद अनाज बेचकर कर्ज चुका देंगे। लेकिन कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि अब खाने के लिए अनाज जुटाना पड़ेगा। पूरी फसल बर्बाद हो गई। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि कर्ज कैसे चुकाएंगे। कमोवेश यही हाल सरायगोहनी गांव के शोभनाथ का भी है।
इन्होंने बैंक से पचास का कर्ज लिया था। फसल बर्बाद होने से उनके सामने भी कर्ज चुकाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। बंशी पट्टी गांव के अनिल कुमार शुक्ला भी 60 हजार रुपये का ऋण चुकाने को लेकर तनाव में हैं। सदर तहसील के उमरी गांव के किसान नागेंद्र बहादुर सिंह की पांच बीघा गेहूं और चार बीघा आलू की फसल खराब हो गई। सिर पर एक लाख का लोन है। रायतारा गांव के नवरंग बहादुर की ढाई बीघे सरसों और साढ़े छह बीघे गेहूं की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई। इन्हें भी डेढ़ लाख का कर्ज चुकाना है।
पूरबगांव के मोहम्मद नईम को तीन बीघे खेत में मात्र तीन बोरी गेहूं मिला और एक लाख का कर्ज चुकाना है। ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं किसान फसल बर्बादी के बाद कर्ज चुकाने को लेकर तनाव में हैं। हालांकि अभी भी वे उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार ऋण माफी का आदेश जारी कर सकती है।
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आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 426452 किसान हैं। कृषि विभाग के मुताबिक 11851 किसानों ने केसीसी के तहत ऋण लिया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने तमाम सरकारी व निजी बैंकों से कर्ज ले रखे हैं। बैंकों से कितना कर्ज लिया है, इसकी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों और एलडीएम को नहीं है। अब जबकि फसल बर्बाद हो चुकी है, इन किसानों को ऋण चुकाने की चिंता सताने लगी है। इन किसानों में तमाम ऐसे हैं जिन्होंने गेहूं, आलू, चना, मटर और सरसों की फसल बेचकर कर्ज चुकाने की उम्मीद पाल रखी थी। लेकिन प्रकृति के कहर ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। कर्ज के दबाव में कुछ किसानों की जान भी जा चुकी है।
फसलों की तबाही के बाद अब कृषि विभाग और बैंकों के अधिकारी शासन के निर्देश पर लोन का आंकड़ा जुटाने में लग गए हैं। एलडीएम उमानाथ द्विवेदी ने बताया कि शासन के आदेश पर बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बारे में सभी बैंकों को आदेश जारी कर दिया गया है। सर्वे के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। वहीं जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह का कहना है कि जानकारी जुटाई जा रही है। जहां तक किसानों की लोन माफी का सवाल है तो शासन से अभी इस तरह का कोई आदेश नहीं मिला है।
शासन के आदेश पर तीस जून तक राजस्व वसूली रोक दी गई है। किसानों से न वसूली होगी और न ही कोई कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार सदर चंद्रेश सिंह ने बताया कि इसके आगे शासन के निर्देश पर ही कोई कदम उठाया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी के मुताबिक, फसल बर्बादी से परेशान किसानों को राहत देने के लिए शासन ने जिला प्रशासन को अब तक दो करोड़ सड़सठ लाख रुपये जारी किए हैं। जबकि जिले के किसानों की संख्या 426452 है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक किसान के हिस्से में 62 रुपये साठ पैसे ही आएंगे। जबकि शासन का यह भी आदेश है कि आलू-सरसों के किसानों को न्यूनतम मुआवजा एक हजार रुपये और गेहूं के किसानों को न्यूनतम डेढ़ हजार रुपये राहत राशि दी जाए। हालांकि जिला प्रशासन ने सदर तहसील के लिए 22 करोड़ सड़सठ लाख 50 हजार, रानीगंज तहसील 14 करोड़ 47 लाख 61 हजार, पट्टी तहसील के लिए 29 करोड़ 73 लाख 73 हजार, कुंडा 4 करोड़ 46 लाख 89 हजार, लालगंज तहसील के लिए 18 करोड़ 9 लाख 28 हजार रुपये की मांग की है।
किसानों को नहीं पता कि उनकी खेत में हुए नुकसान का सर्वे हुआ या नहीं। टेकार गांव के छोटेलाल, अंतू देहात के रामलौट वर्मा, बझान गांव के रामइकबाल सिंह, गौरा डांड़ के किसान तेज बहादुर आदि ने बताया कि कोई भी सरकारी कर्मचारी उनके यहां सर्वे करने नहीं आया। हमें नहीं पता कि नुकसान के मुआवजे के लिए तैयार हो रही सूची में हमारा नाम है या नहीं।
जिले में दो लाख चालीस हजार किसान बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हैं। शासन के निर्देशानुसार जिन किसानों का 35 से 100 फीसदी तक नुकसान हुआ है, उन्हें ही मुआवजा दिया जाना है। इसके लिए दो करोड़ सड़सठ लाख मिले हैं। डेढ़ सौ करोड़ रुपये की मांग की गई है। जैसे-जैसे धनराशि आएगी वैसे मुआवजा वितरित किया जाएगा। पहले उन किसानों को राहत दी जाएगी, जिनका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
अमृत त्रिपाठी, जिलाधिकारी
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इन्होंने बैंक से पचास का कर्ज लिया था। फसल बर्बाद होने से उनके सामने भी कर्ज चुकाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। बंशी पट्टी गांव के अनिल कुमार शुक्ला भी 60 हजार रुपये का ऋण चुकाने को लेकर तनाव में हैं। सदर तहसील के उमरी गांव के किसान नागेंद्र बहादुर सिंह की पांच बीघा गेहूं और चार बीघा आलू की फसल खराब हो गई। सिर पर एक लाख का लोन है। रायतारा गांव के नवरंग बहादुर की ढाई बीघे सरसों और साढ़े छह बीघे गेहूं की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई। इन्हें भी डेढ़ लाख का कर्ज चुकाना है।
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पूरबगांव के मोहम्मद नईम को तीन बीघे खेत में मात्र तीन बोरी गेहूं मिला और एक लाख का कर्ज चुकाना है। ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं किसान फसल बर्बादी के बाद कर्ज चुकाने को लेकर तनाव में हैं। हालांकि अभी भी वे उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार ऋण माफी का आदेश जारी कर सकती है।
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आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 426452 किसान हैं। कृषि विभाग के मुताबिक 11851 किसानों ने केसीसी के तहत ऋण लिया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने तमाम सरकारी व निजी बैंकों से कर्ज ले रखे हैं। बैंकों से कितना कर्ज लिया है, इसकी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों और एलडीएम को नहीं है। अब जबकि फसल बर्बाद हो चुकी है, इन किसानों को ऋण चुकाने की चिंता सताने लगी है। इन किसानों में तमाम ऐसे हैं जिन्होंने गेहूं, आलू, चना, मटर और सरसों की फसल बेचकर कर्ज चुकाने की उम्मीद पाल रखी थी। लेकिन प्रकृति के कहर ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। कर्ज के दबाव में कुछ किसानों की जान भी जा चुकी है।
फसलों की तबाही के बाद अब कृषि विभाग और बैंकों के अधिकारी शासन के निर्देश पर लोन का आंकड़ा जुटाने में लग गए हैं। एलडीएम उमानाथ द्विवेदी ने बताया कि शासन के आदेश पर बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बारे में सभी बैंकों को आदेश जारी कर दिया गया है। सर्वे के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। वहीं जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह का कहना है कि जानकारी जुटाई जा रही है। जहां तक किसानों की लोन माफी का सवाल है तो शासन से अभी इस तरह का कोई आदेश नहीं मिला है।
शासन के आदेश पर तीस जून तक राजस्व वसूली रोक दी गई है। किसानों से न वसूली होगी और न ही कोई कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार सदर चंद्रेश सिंह ने बताया कि इसके आगे शासन के निर्देश पर ही कोई कदम उठाया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी के मुताबिक, फसल बर्बादी से परेशान किसानों को राहत देने के लिए शासन ने जिला प्रशासन को अब तक दो करोड़ सड़सठ लाख रुपये जारी किए हैं। जबकि जिले के किसानों की संख्या 426452 है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक किसान के हिस्से में 62 रुपये साठ पैसे ही आएंगे। जबकि शासन का यह भी आदेश है कि आलू-सरसों के किसानों को न्यूनतम मुआवजा एक हजार रुपये और गेहूं के किसानों को न्यूनतम डेढ़ हजार रुपये राहत राशि दी जाए। हालांकि जिला प्रशासन ने सदर तहसील के लिए 22 करोड़ सड़सठ लाख 50 हजार, रानीगंज तहसील 14 करोड़ 47 लाख 61 हजार, पट्टी तहसील के लिए 29 करोड़ 73 लाख 73 हजार, कुंडा 4 करोड़ 46 लाख 89 हजार, लालगंज तहसील के लिए 18 करोड़ 9 लाख 28 हजार रुपये की मांग की है।
किसानों को नहीं पता कि उनकी खेत में हुए नुकसान का सर्वे हुआ या नहीं। टेकार गांव के छोटेलाल, अंतू देहात के रामलौट वर्मा, बझान गांव के रामइकबाल सिंह, गौरा डांड़ के किसान तेज बहादुर आदि ने बताया कि कोई भी सरकारी कर्मचारी उनके यहां सर्वे करने नहीं आया। हमें नहीं पता कि नुकसान के मुआवजे के लिए तैयार हो रही सूची में हमारा नाम है या नहीं।
जिले में दो लाख चालीस हजार किसान बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हैं। शासन के निर्देशानुसार जिन किसानों का 35 से 100 फीसदी तक नुकसान हुआ है, उन्हें ही मुआवजा दिया जाना है। इसके लिए दो करोड़ सड़सठ लाख मिले हैं। डेढ़ सौ करोड़ रुपये की मांग की गई है। जैसे-जैसे धनराशि आएगी वैसे मुआवजा वितरित किया जाएगा। पहले उन किसानों को राहत दी जाएगी, जिनका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
अमृत त्रिपाठी, जिलाधिकारी