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अफसरों की लापरवाही पखवाड़े पर पड़ रही भारी
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नसबंदी का लक्ष्य पाने में छूट रहा पसीना
शासन ने दिया था 21 दिनों में 2452 नसबंदी का लक्ष्य
11 पुरुषों, 121 महिलाओं ने ही अब तक लिया जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़े में प्रतिभाग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग कागज पर जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा मना रहा है। 11 से 31 जुलाई तक 420 पुरुषों और 2032 महिलाओं की नसबंदी होनी थी, मगर अभी तक 11 पुरुष और 127 महिलाओं की ही नसबंदी हो सकी हैै। अब केवल सात दिन शेष हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर नसबंदी पखवाड़े को लेकर उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।
लगातार बढ़ रही जनसंख्या पर काबू पाने के लिए शासन ने जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा अभियान चलाया है। अभियान में ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रेरित कर नसबंदी कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी है। शासन की ओर से सीएमओ और सीएमएस को मिलाकर 2450 लोगों की नसबंदी कराने का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य में 420 पुरुषों व 2032 महिलाओं को प्रेरित कर उन्हें अस्पताल लाने, या फिर कैंप लगाकर नसबंदी कराने की अपेक्षा की गई है। मगर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते यह लक्ष्य पाना मुश्किल दिख रहा है। 14 दिन बीत गए मगर अब तक महज 11 पुरुष और 121 महिलाओं की ही नसबंदी हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के पास सात दिन शेष बचे हुए हैं। 1905 महिलाओं और 110 पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कहते हैं कि शासन की ओर से अधिक लक्ष्य मिल गया है। जिसके चलते अब लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। आशा बहुओं के भरोसे जनसंख्या नियंत्रण को मिला लक्ष्य पूरा करने की कोशिश हो रही है। आशा बहू भी इस बार जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़े में महिलाओं और पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करने में रुचि नहीं ले रही हैं।
इनसेट--------
अभियान का नहीं हो सका व्यापक प्रचार
जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा अभियान को कामयाब बनाने के लिए बीसीपीएम और डीसीपीएम के साथ आशा बहुओं को जिम्मेदारी दी गई है, वहीं सबसे अधिक एनएसबी करने वाले सर्जन के साथ महिला चिकित्सक को पुरस्कार मिलना है। इसके बावजूद चिकित्सक और आशा बीसीपीएम और डीसीपीएम इस अभियान को सफल बनाने के लिए रुचि नहीं ले रहे हैं। इसका प्रचार प्रसार तक नहीं कराया जा रहा। महिलाओं और पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहे हैं।
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वर्जन---------
जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा चल रहा है। स्वेच्छा से आने वाले लोगों की नसबंदी की जा रही है। डीसीपीएम, बीसीपीएम, आशा संगनी के साथ आशा बहुओं को नसबंदी पर जोर देने के लिए कहा गया है। यदि कर्मचारी लापरवाही बरतेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ
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शासन ने दिया था 21 दिनों में 2452 नसबंदी का लक्ष्य
11 पुरुषों, 121 महिलाओं ने ही अब तक लिया जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़े में प्रतिभाग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग कागज पर जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा मना रहा है। 11 से 31 जुलाई तक 420 पुरुषों और 2032 महिलाओं की नसबंदी होनी थी, मगर अभी तक 11 पुरुष और 127 महिलाओं की ही नसबंदी हो सकी हैै। अब केवल सात दिन शेष हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर नसबंदी पखवाड़े को लेकर उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।
लगातार बढ़ रही जनसंख्या पर काबू पाने के लिए शासन ने जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा अभियान चलाया है। अभियान में ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रेरित कर नसबंदी कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी है। शासन की ओर से सीएमओ और सीएमएस को मिलाकर 2450 लोगों की नसबंदी कराने का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य में 420 पुरुषों व 2032 महिलाओं को प्रेरित कर उन्हें अस्पताल लाने, या फिर कैंप लगाकर नसबंदी कराने की अपेक्षा की गई है। मगर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते यह लक्ष्य पाना मुश्किल दिख रहा है। 14 दिन बीत गए मगर अब तक महज 11 पुरुष और 121 महिलाओं की ही नसबंदी हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के पास सात दिन शेष बचे हुए हैं। 1905 महिलाओं और 110 पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कहते हैं कि शासन की ओर से अधिक लक्ष्य मिल गया है। जिसके चलते अब लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। आशा बहुओं के भरोसे जनसंख्या नियंत्रण को मिला लक्ष्य पूरा करने की कोशिश हो रही है। आशा बहू भी इस बार जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़े में महिलाओं और पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करने में रुचि नहीं ले रही हैं।
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इनसेट--------
अभियान का नहीं हो सका व्यापक प्रचार
जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा अभियान को कामयाब बनाने के लिए बीसीपीएम और डीसीपीएम के साथ आशा बहुओं को जिम्मेदारी दी गई है, वहीं सबसे अधिक एनएसबी करने वाले सर्जन के साथ महिला चिकित्सक को पुरस्कार मिलना है। इसके बावजूद चिकित्सक और आशा बीसीपीएम और डीसीपीएम इस अभियान को सफल बनाने के लिए रुचि नहीं ले रहे हैं। इसका प्रचार प्रसार तक नहीं कराया जा रहा। महिलाओं और पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहे हैं।
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वर्जन---------
जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा चल रहा है। स्वेच्छा से आने वाले लोगों की नसबंदी की जा रही है। डीसीपीएम, बीसीपीएम, आशा संगनी के साथ आशा बहुओं को नसबंदी पर जोर देने के लिए कहा गया है। यदि कर्मचारी लापरवाही बरतेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ