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तीन दिन के अवकाश के बाद भी दस बजे तक अस्पताल नहीं पहुंच सके डॉक्टर
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मेडिकल कालेज ओपीडी में चिकित्सकों के आने से परेशान मरीजों की रही भीड़। संवाद
- फोटो : PRATAPGARH
होली का अवकाश खत्म होने के बाद भी सोमवार को चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंच सके। इसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ा। सुबह आठ बजे से ही अस्पताल में मरीजों की कतार लगी थी। सीनियर व जूनियर चिकित्सकों के ड्यूटी पर नहीं लौटने से ओपीडी के साथ वार्डों में भर्ती मरीजों को परेशान होना पड़ा।
शुक्रवार को होली का त्योहार था। शनिवार और रविवार को भी अवकाश होने के कारण सोमवार को प्रताप बहादुर चिकित्सालय की ओपीडी का ताला खुला। सोमवार सुबह साढ़े सात बजे से मरीज अस्पताल पहुंचने लगे। एक रुपये का पर्चा खरीदकर ओपीडी में चिकित्सकों के चैंबर के सामने लाइन में खड़े हो गए। होली का त्योहार मनाने गए जूनियर और सीनियर चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंच सके। सुबह दस बजे सर्जन का कक्ष खाली पड़ा था।
नियमित चिकित्सक तो दूर, मेडिकल कॉलेज के जेआर और एसआर भी नहीं मौजूद थे। इससे मरीज काफी परेशान थे। यही हाल चर्म रोग विभाग का था। यहां पर उर्मिला नाम की महिला सुबह आठ बजे से डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थी। हड्डी रोग विभाग, अस्थि रोग विभाग का ताला ही नहीं खुला था।
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बगैर इलाज कराए लौट गए आधे से ज्यादा मरीज
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के पुरुष विंग में सुबह दस बजे तक ज्यादातर डॉक्टरों के चैंबर खाली थे। कुछ डॉक्टर सुबह नौ बजे आ गए थे। डॉक्टर मरीजों को जांच कराने के लिए पैथालॉजी में भेज दे रहे थे। पैथालॉजी में बैठे कर्मचारी दोपहर बाद रिपोर्ट देने की बात कह रहे थे। ऐसे में ज्यादातर मरीज बगैर इलाज कराए लौट गए।
अधिकांश डॉक्टर समय पर आ जाते हैं। मंगलवार से आठ बजे तक सीएमएस कार्यालय में उपस्थिति दर्ज न करने वाले जूनियर और सीनियर चिकित्सकों को अनुपस्थित मान लिया जाएगा। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। डॉक्टर सुरेश सिंह, सीएमएस, राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय
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शुक्रवार को होली का त्योहार था। शनिवार और रविवार को भी अवकाश होने के कारण सोमवार को प्रताप बहादुर चिकित्सालय की ओपीडी का ताला खुला। सोमवार सुबह साढ़े सात बजे से मरीज अस्पताल पहुंचने लगे। एक रुपये का पर्चा खरीदकर ओपीडी में चिकित्सकों के चैंबर के सामने लाइन में खड़े हो गए। होली का त्योहार मनाने गए जूनियर और सीनियर चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंच सके। सुबह दस बजे सर्जन का कक्ष खाली पड़ा था।
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नियमित चिकित्सक तो दूर, मेडिकल कॉलेज के जेआर और एसआर भी नहीं मौजूद थे। इससे मरीज काफी परेशान थे। यही हाल चर्म रोग विभाग का था। यहां पर उर्मिला नाम की महिला सुबह आठ बजे से डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थी। हड्डी रोग विभाग, अस्थि रोग विभाग का ताला ही नहीं खुला था।
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बगैर इलाज कराए लौट गए आधे से ज्यादा मरीज
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के पुरुष विंग में सुबह दस बजे तक ज्यादातर डॉक्टरों के चैंबर खाली थे। कुछ डॉक्टर सुबह नौ बजे आ गए थे। डॉक्टर मरीजों को जांच कराने के लिए पैथालॉजी में भेज दे रहे थे। पैथालॉजी में बैठे कर्मचारी दोपहर बाद रिपोर्ट देने की बात कह रहे थे। ऐसे में ज्यादातर मरीज बगैर इलाज कराए लौट गए।
अधिकांश डॉक्टर समय पर आ जाते हैं। मंगलवार से आठ बजे तक सीएमएस कार्यालय में उपस्थिति दर्ज न करने वाले जूनियर और सीनियर चिकित्सकों को अनुपस्थित मान लिया जाएगा। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। डॉक्टर सुरेश सिंह, सीएमएस, राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय