{"_id":"25a78a7df4a20f841481962cac1f9e71","slug":"eight-were-not-even-admitted-patient-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ बाद भी भर्ती नहीं हो सके मरीज ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आठ बाद भी भर्ती नहीं हो सके मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 28 Jun 2015 02:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गड़वारा। सदर तहसील के गड़वारा बाजार में आठ वर्ष पहले करोड़ों की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शोपीस बनकर रह गया है। यहां तैनात स्टाफ रात में घर निकल जाते हैं। रात में आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य केन्द्र पर ताला लटकता मिलता है। इससे क्षेत्रीय लोग परेशान हैं। कई बार इसकी शिकायत सीएमओ से की गई, मगर कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मुख्यालय से बारह किमी दूर स्थित गड़वारा बाजार में पूर्व खादी ग्रामोद्योग मंत्री स्व. राजाराम पांडेय की पहल पर आठ वर्ष पहले करोड़ों की लागत तैयार सीएचसी में इलाज के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। यहां कुल तीन लोगों की तैनाती की गई है। डॉक्टर करमचन्द्र, फार्मासिस्ट पीपी ओझा व चौकीदार गणेश शुक्ला। आठ वर्ष बीत जाने के बाद न तो सीएचसी को डॉक्टर मिले और न ही स्टाफ नर्स। यह अस्पताल सुबह नौ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक ही संचालित होता है। इसके बाद आने वाले मरीज को चौकीदार सीधे जिला अस्पताल भेज देता है। 30 बेड के बने इस अस्पताल में आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। स्वीपर न होने के कारण अस्पताल की सफाई भी नहीं हो पा रही है।
इनसेटअराजकतत्वों की भेंट चढ़े कर्मचारियों के आवास
गड़वारा स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य कर्मियों के रुकने के लिए बने आवास अराजकतत्वों की भेंट चढ़ गए। कर्मचारियों के न रुकने के कारण यहां असामाजिक तत्वों ने डेरा जमा लिया है। लोग कहीं आवासों के शीशे तोड़ रहे हैं तो कहीं लोहे के सामान तोड़कर उठा ले जा रहे हैं। इस ओर भी किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। डॉक्टर करमचन्द्र ने बताया कि इमरजेंसी सेवा अभी चालू नहीं की गई है। दो बजे तक अस्पताल खोलने का नियम है। इसके बाद मेरी ड्यूटी संडवा चंद्रिका सीएचसी में लगाई जाती है।
विज्ञापन
वर्जन
अगर डॉक्टर रात में अपना सेंटर छोड़कर गायब हो जाता है और इमरजेंसी केस नहीं देख रहा है तो गलत है। मामले की शिकायत मिली है। गोपनीय तरीके से जांच कराई जा रही है। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
मुख्यालय से बारह किमी दूर स्थित गड़वारा बाजार में पूर्व खादी ग्रामोद्योग मंत्री स्व. राजाराम पांडेय की पहल पर आठ वर्ष पहले करोड़ों की लागत तैयार सीएचसी में इलाज के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। यहां कुल तीन लोगों की तैनाती की गई है। डॉक्टर करमचन्द्र, फार्मासिस्ट पीपी ओझा व चौकीदार गणेश शुक्ला। आठ वर्ष बीत जाने के बाद न तो सीएचसी को डॉक्टर मिले और न ही स्टाफ नर्स। यह अस्पताल सुबह नौ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक ही संचालित होता है। इसके बाद आने वाले मरीज को चौकीदार सीधे जिला अस्पताल भेज देता है। 30 बेड के बने इस अस्पताल में आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। स्वीपर न होने के कारण अस्पताल की सफाई भी नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
इनसेटअराजकतत्वों की भेंट चढ़े कर्मचारियों के आवास
गड़वारा स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य कर्मियों के रुकने के लिए बने आवास अराजकतत्वों की भेंट चढ़ गए। कर्मचारियों के न रुकने के कारण यहां असामाजिक तत्वों ने डेरा जमा लिया है। लोग कहीं आवासों के शीशे तोड़ रहे हैं तो कहीं लोहे के सामान तोड़कर उठा ले जा रहे हैं। इस ओर भी किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। डॉक्टर करमचन्द्र ने बताया कि इमरजेंसी सेवा अभी चालू नहीं की गई है। दो बजे तक अस्पताल खोलने का नियम है। इसके बाद मेरी ड्यूटी संडवा चंद्रिका सीएचसी में लगाई जाती है।
विज्ञापन
वर्जन
अगर डॉक्टर रात में अपना सेंटर छोड़कर गायब हो जाता है और इमरजेंसी केस नहीं देख रहा है तो गलत है। मामले की शिकायत मिली है। गोपनीय तरीके से जांच कराई जा रही है। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।