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मयखानों पर दिखा असर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Mon, 14 Nov 2016 11:40 PM IST
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पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद पियक्कड़ भी सदमे में हैं। दरअसल उन्हें पांच सौ और हजार रुपये के नोट देने पर दुकानदार शराब नहीं दे रहे हैं। सौ और पचास के फुटकर नोट गायब हो गए हैं। ऐसे पियक्कड़ भी पागलों की तरह घूम रहे हैं। शराब की बिक्री घट गई है। मॉडल शॉप पर भी अब पहले जैसी भीड़ नहीं जुट रही है। देसी, विदेशी और बीयर की बिक्री पचास प्रतिशत तक घट गई है।
एक हजार व पांच सौ रुपये की नोटबंदी के असर से हर कोई प्रभावित है। चाहे कोई सरकारी विभाग हो या फिर बिजनेसमैन। नोटबंदी के असर से मयखाने भी अछूते नहीं रहे। देशी, अंग्रेजी के अलावा बीयर की बिक्री पर इसका प्रभाव पड़ा है। बताते हैं कि प्रतिदिन लगभग 50 लाख के आसपास शराब की बिक्री हो जाती थी। वह अब सिमटकर आधी रह गई है। अभी बियर के व्यवसाय में लगभग 40 फीसदी की गिरावट आई है। अंग्रेजी और देशी शराब की बिक्री 65 फीसदी गिर गई है। यहां तक कि फुटकर रुपये न होने के कारण मय के शौकीन मॉडल शापों पर भी नहीं दिखाई पड़ रहे हैं।
शराब कारोबारियों के सामने भी नोटबंदी समस्या बन गई है। बहुत से ग्राहक दो हजार की नोट देकर पांच सौ रुपये की शराब खरीदते हैं। दुकानदार फुटकर न होने के कारण शराब ही देने से मना कर देते हैं। ऐसे में सेल्समैन से विवाद भी होता रहता है। अभी तक आबकारी विभाग अपने राजस्व को लेकर चिंतित नहीं था लेकिन भारी गिरावट के चलते अफसर परेशान हैं। जिला आबकारी अधिकारी बच्चालाल ने बताया कि नोटबंदी का असर शराब के कारोबार पर पड़ा है। लोग फुटकर रुपये से घर के खर्च चलाने की सोच रहे हैं। वे शराब पीने से बच रहे हैं।
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एक हजार व पांच सौ रुपये की नोटबंदी के असर से हर कोई प्रभावित है। चाहे कोई सरकारी विभाग हो या फिर बिजनेसमैन। नोटबंदी के असर से मयखाने भी अछूते नहीं रहे। देशी, अंग्रेजी के अलावा बीयर की बिक्री पर इसका प्रभाव पड़ा है। बताते हैं कि प्रतिदिन लगभग 50 लाख के आसपास शराब की बिक्री हो जाती थी। वह अब सिमटकर आधी रह गई है। अभी बियर के व्यवसाय में लगभग 40 फीसदी की गिरावट आई है। अंग्रेजी और देशी शराब की बिक्री 65 फीसदी गिर गई है। यहां तक कि फुटकर रुपये न होने के कारण मय के शौकीन मॉडल शापों पर भी नहीं दिखाई पड़ रहे हैं।
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शराब कारोबारियों के सामने भी नोटबंदी समस्या बन गई है। बहुत से ग्राहक दो हजार की नोट देकर पांच सौ रुपये की शराब खरीदते हैं। दुकानदार फुटकर न होने के कारण शराब ही देने से मना कर देते हैं। ऐसे में सेल्समैन से विवाद भी होता रहता है। अभी तक आबकारी विभाग अपने राजस्व को लेकर चिंतित नहीं था लेकिन भारी गिरावट के चलते अफसर परेशान हैं। जिला आबकारी अधिकारी बच्चालाल ने बताया कि नोटबंदी का असर शराब के कारोबार पर पड़ा है। लोग फुटकर रुपये से घर के खर्च चलाने की सोच रहे हैं। वे शराब पीने से बच रहे हैं।
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