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आसान नहीं नए सत्र का संचालन
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 20 Jan 2015 11:20 PM IST
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जिले के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेज में एक अप्रैल से नए सत्र का शुभारंभ करना आसान नहीं होगा। बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन, गृहपरीक्षा और रिजल्ट घोषित करने में शिक्षकों को माथा पच्ची करनी होगी। ऐसे में एक अप्रैल से छात्र-छात्राओं का दाखिला कॉलेज में कैसे होगा, यह विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सीबीएसई के पैटर्न पर शिक्षासत्र का निर्धारण करने का निर्णय लिया है। विभागीय अधिकारियों ने इसके लिए कवायद शुरू कर दिया है। नए शिक्षासत्र के मुताबिक 31 मार्च को सत्र का समापन हो रहा है। मगर आलम यह है 19 फरवरी से 23 मार्च तक बोर्ड परीक्षाएं होंगी।
इसके बाद मूल्यांकन, गृह परीक्षा और रिजल्ट तैयार कर बच्चों को वितरित करने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होगी। इन सबके लिए कॉलेजों के पास मात्र ढाई माह का समय है। अगर देखा जाए तो 23 मार्च तक बोर्ड परीक्षा होगी तो सात दिन में गृह परीक्षाएं कैसे सम्पन्न हो सकेंगी। बच्चों को रिजल्ट देने के लिए कम से कम दस दिन का समय होना चाहिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक अप्रैल से नए शिक्षासत्र की शुरुआत मुश्किल ही है। फिलहाल अधिकारी दावा करने से नहीं चूक रहे हैं। एडीआईओएस आरके वर्मा ने बताया कि सभी कॉलेजों को पत्र भेजकर शिक्षासत्र दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है।
कक्षा नौ और 11 के छात्र-छात्राओं का नामांकन फार्म डीआईओएस कार्यालय में जमा करने के लिए पूर्व में एक अक्तूबर का समय निर्धारित था। नए शिक्षासत्र से नामांकन फार्म 31 अगस्त तक प्रत्येक दशा में जमा करना होगा। हाईस्कूल और इंटर कॉलेज में पूर्व में जो व्यवस्था थी, उसके मुताबिक एक जुलाई से 30 जून तक शिक्षासत्र की गणना होती थी, मगर अब शिक्षासत्र की गणना एक अप्रैल से 31 मार्च तक होगी। पहले एक जुलाई से नई कक्षाओं में छात्र-छात्राओं का दाखिला लिया जाता था और कॉलेजों की मान्यता के लिए 30 जून की तिथि निश्चित की गई थी। नया शिक्षासत्र लागू होने से एक अप्रैल से नई कक्षाओं में छात्र-छात्राओं का नाम लिखा जाएगा और मान्यता के लिए लंबित फाइलों का 31 मार्च तक प्रत्येक दशा में निपटारा कर दिया जाएगा।
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इसके बाद मूल्यांकन, गृह परीक्षा और रिजल्ट तैयार कर बच्चों को वितरित करने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होगी। इन सबके लिए कॉलेजों के पास मात्र ढाई माह का समय है। अगर देखा जाए तो 23 मार्च तक बोर्ड परीक्षा होगी तो सात दिन में गृह परीक्षाएं कैसे सम्पन्न हो सकेंगी। बच्चों को रिजल्ट देने के लिए कम से कम दस दिन का समय होना चाहिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक अप्रैल से नए शिक्षासत्र की शुरुआत मुश्किल ही है। फिलहाल अधिकारी दावा करने से नहीं चूक रहे हैं। एडीआईओएस आरके वर्मा ने बताया कि सभी कॉलेजों को पत्र भेजकर शिक्षासत्र दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है।
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कक्षा नौ और 11 के छात्र-छात्राओं का नामांकन फार्म डीआईओएस कार्यालय में जमा करने के लिए पूर्व में एक अक्तूबर का समय निर्धारित था। नए शिक्षासत्र से नामांकन फार्म 31 अगस्त तक प्रत्येक दशा में जमा करना होगा। हाईस्कूल और इंटर कॉलेज में पूर्व में जो व्यवस्था थी, उसके मुताबिक एक जुलाई से 30 जून तक शिक्षासत्र की गणना होती थी, मगर अब शिक्षासत्र की गणना एक अप्रैल से 31 मार्च तक होगी। पहले एक जुलाई से नई कक्षाओं में छात्र-छात्राओं का दाखिला लिया जाता था और कॉलेजों की मान्यता के लिए 30 जून की तिथि निश्चित की गई थी। नया शिक्षासत्र लागू होने से एक अप्रैल से नई कक्षाओं में छात्र-छात्राओं का नाम लिखा जाएगा और मान्यता के लिए लंबित फाइलों का 31 मार्च तक प्रत्येक दशा में निपटारा कर दिया जाएगा।
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