प्रतापगढ़ डबल मर्डर: करोड़ों की संपत्ति और नाजायज संबंधों के खेल में हुई हत्या
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बलीपुर गाजी चौराहा निवासी सरस्वती देवी पत्नी मोतीलाल गुप्ता ने कई साल पहले अपनी पूरी संपत्ति अपने बेटे धर्मेंद्र के बजाए पोते अनमोल के नाम से वसीयत कर दी थी। उसके बेटे धर्मेंद्र ने पान की दुकान खोल रखी थी, लेकिन उसकी मानसिक हालत बेहतर न होने के कारण सरस्वती उसे घर पर ही रोके रहती थी। कुछ दिनों तक घर के बाहर मिठाई की दुकान का काम भी धर्मेंद्र देखता था। पुलिस सूत्रों को मानें तो पूरी संपत्ति अनमोल के नाम वसीयत होने के बाद परिवार के लोगों में नाराजगी थी। बहू राधा ने विरोध किया था कि तीनों पोतों के नाम वसीयत होनी चाहिए, लेकिन सरस्वती पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। सास-बहू में छोटी-छोटी बातों को लेकर भी तकरार होती रहती थी।
इस बीच प्रयागराज के मऊआइमा इलाके के रहने वाले राजू का सरस्वती के घर में आना-जाना शुरू हो गया। देखते ही देखते वह परिवार के लोगों का करीबी बन गया। हाल ही में एसपी कार्यालय के सामने की संपत्ति करीब बीस लाख और कोषागार के चौराहे के पास की संपत्ति 18 लाख रुपये में सरस्वती ने बेची थी। सरस्वती के नाम से काफी रुपये डाकघर में जमा हैं। मंगलवार को घटना के बाद घर पहुंची बहू राधा पहले तो शवों को देखकर बिलखने लगी। फिर वह दूसरे कमरे की ओर भागी वहां सामान अस्त-व्यस्त देख जोर-जोर से चिल्लाने लगी कि जेवरात व रुपये हत्यारे लूट ले गए हैं। उसके मासूम बेटे व सास का कत्ल पड़ोसियों ने ही कराया है। पुलिस उन लोगों के घर पहुंची, लेकिन वहां महिलाएं ही मिलीं। उधर, हिरासत में लिए गए राजू ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि राधा से उसके गहरे ताल्लुकात थे।
एक साल से राजू का सरस्वती के घर आना-जाना था
राजू को लेकर पहले भी हो चुका था विवाद, करीब एक साल से राजू का सरस्वती के घर आना-जाना था। तीन माह पहले राजू के परिवार वाले उसे खोजते हुए पहुंच गए थे। उन लोगों का सरस्वती के परिवार वालों से विवाद भी हुआ था। एक माह पहले भी राजू की पत्नी व ससुर कई लोगों के साथ आया था। हालांकि बाद में राजू ने परिवार के लोगों को मैनेज कर लिया। राजू से पूछताछ पर भड़क उठी राधा, मकान का करा रहा था निर्माण सरस्वती के नए मकान का निर्माण राजू ही करवा रहा था। डेरवा इलाके के मजदूर मकान के निर्माण में लगाए गए थे। यहां तक कि कुछ दिन पहले तक राजू का विरोध करने वाला उसका ससुर खुद आकर मजदूरी करने लगा था।
चर्चाओं पर यकीन करें तो सरस्वती के घर डेरा जमाए राजू की नजर संपत्ति पर गड़ गई थी। पुलिस ने जब राजू के बारे में राधा व धर्मेंद्र से पूछताछ शुरू की तो वह उसे कभी रिश्तेदार तो कभी परिचित बताते रहे। राधा भी राजू के पक्ष में खड़ी रही। पुलिस राजू को पूछताछ के लिए किनारे ले जाने लगी तो राधा विरोध पर उतर आई। हालांकि बाद में एसपी का निर्देश मिलते ही कोतवाली व स्वॉट टीम राजू को पुलिस लाइन उठा ले गई।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के करीब दादी सरस्वती देवी व पोते अनमोल की बेरहमी से हत्या करने वाला हथियार पुलिस खोजती रही। पहले तो आशंका जताई कि ईंट से कूंचकर हत्या की गई होगी। फिर राजमिस्त्री की बंसुली समेत अन्य औजार खोजे जाने लगे, लेकिन कुछ नहीं मिला। ऐसा लग रहा था कि हत्या में घर बनाने के औजार ही प्रयोग किए गए। हत्या में प्रयुक्त हथियार की खोजबीन में पुलिस कई घंटे तक लगी रही। वजनदार डंडे के भी प्रयोग से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पुलिस को देर शाम तक ऐसा कोई भी औजार नहीं मिला। पुलिस वजनदार हथियार से सिर पर प्रहार कर मौत के घाट उतारने की बात कह रही है।