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बेटियों की सच्ची दोस्त मां, झिझक छोड़ खुलकर करें बात
Sun, 21 Apr 2019 11:50 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 21 Apr 2019 11:50 PM IST
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साकेत गर्ल्स कालेज में अमर उजाला के सपनों की उड़ान कार्यक्रम में बेटियों के साथ सेल्फी लेतीं माडल सौम्या शर्मा।
- फोटो : प्रतापगढ़
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उम्र के साथ शारीरिक परिवर्तन होना प्रकृति का नियम है। शरीर में होने वाले परिवर्तन से घबराने के बजाए मां से सुझाव लें और उस पर अमल करें। किशोरियों को पीरियड आना एक सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे समय में बेटियां अपनी मां, बहन को पूरी बात बताएं। यह बातें एमआरएस इंडिया ग्लैक्सी 2018 की विजेता सौम्या शर्मा ने कहीं। कहा कि बेटियों की सच्ची दोस्त मां होती है, झिझक छोड़कर खुलकर बात करें।
डिजिटल युग में बेटियां खुद भी इसके बारे में जानकारी हासिल कर सकती हैं। बालिकाओं में शारीरिक परिवर्तन संबंधी समस्याओं को लेकर रविवार को अमर उजाला एवं व्हिस्पर च्वाइस की ओर से साकेत गर्ल्स पीजी कालेज दहिलामऊ में रविवार को सपनों की उड़ान कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बालिकाओं की समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई।
महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल सक्सेना ने कहा कि 12 से 15 वर्ष की आयु में पीरियड आना सामान्य बात है। मां को चाहिए कि बेटी की समस्या को गंभीरता से समझें और पीरियड के समय पैड का सही तरीके से इस्तेमाल करने के बारे में बताए। सेहत के लिए स्वच्छता अपनाएं और स्वच्छ रहने के लिए पैड का प्रयोग करें। पैड लगाने और निकालने के बाद हाथ को साबुन से भलीभांति साफ करें। सीओ सदर बबिता सिंह ने कहा कि बेटियों की मां को उन दिनों को याद कराया, जब उन्हें पहला पीरियड आया था।
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उन्होंने कहा कि उस समय मां अपनी बेटी को पूरी जानकारी देने में संकोच करती थी, मगर आज यह जानकारी उन्हें पहले दी जा रही है। जिला क्रीड़ा अधिकारी भानु प्रसाद ने कहा कि पीरियड का पहला अनुभव सभी के लिए कष्टप्रद होता है। जानकारी के अभाव में बालिकाएं डर जाती हैं। समाजसेविका साधना खंडेलवाल ने कहा कि पीरियड आने के पहले ही अगर मां बालिकाओं को सजग कर दें तो शायद उनका भय कम हो जाए।
उन्होंने कहा कि आज की बेटी कल की मां है। इसलिए उन्हें स्वस्थ रहने के लिए पूरी जानकारी दें। व्हिस्पर च्वाइस की ओर डीटीसी दीपांजलि ने लाइव डेमो दिखाकर पैड के प्रयोग के बारे में बेटियों को विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन चेष्टा पाठक ने किया। कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाली बालिकाओं को व्हिस्पर पैड और प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
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डिजिटल युग में बेटियां खुद भी इसके बारे में जानकारी हासिल कर सकती हैं। बालिकाओं में शारीरिक परिवर्तन संबंधी समस्याओं को लेकर रविवार को अमर उजाला एवं व्हिस्पर च्वाइस की ओर से साकेत गर्ल्स पीजी कालेज दहिलामऊ में रविवार को सपनों की उड़ान कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बालिकाओं की समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई।
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महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल सक्सेना ने कहा कि 12 से 15 वर्ष की आयु में पीरियड आना सामान्य बात है। मां को चाहिए कि बेटी की समस्या को गंभीरता से समझें और पीरियड के समय पैड का सही तरीके से इस्तेमाल करने के बारे में बताए। सेहत के लिए स्वच्छता अपनाएं और स्वच्छ रहने के लिए पैड का प्रयोग करें। पैड लगाने और निकालने के बाद हाथ को साबुन से भलीभांति साफ करें। सीओ सदर बबिता सिंह ने कहा कि बेटियों की मां को उन दिनों को याद कराया, जब उन्हें पहला पीरियड आया था।
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उन्होंने कहा कि उस समय मां अपनी बेटी को पूरी जानकारी देने में संकोच करती थी, मगर आज यह जानकारी उन्हें पहले दी जा रही है। जिला क्रीड़ा अधिकारी भानु प्रसाद ने कहा कि पीरियड का पहला अनुभव सभी के लिए कष्टप्रद होता है। जानकारी के अभाव में बालिकाएं डर जाती हैं। समाजसेविका साधना खंडेलवाल ने कहा कि पीरियड आने के पहले ही अगर मां बालिकाओं को सजग कर दें तो शायद उनका भय कम हो जाए।
उन्होंने कहा कि आज की बेटी कल की मां है। इसलिए उन्हें स्वस्थ रहने के लिए पूरी जानकारी दें। व्हिस्पर च्वाइस की ओर डीटीसी दीपांजलि ने लाइव डेमो दिखाकर पैड के प्रयोग के बारे में बेटियों को विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन चेष्टा पाठक ने किया। कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाली बालिकाओं को व्हिस्पर पैड और प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।