धान की फसलों पर संकट, अब तक सिर्फ 50 प्रतिशत ही हो सकी है रोपाई
बारिश न होने से धान की फसल पर संकट खड़ा हो गया है। जुलाई माह बीतने को है, मगर खेतों में धूल उड़ रही है। बारिश न होने से धान की रोपाई अब तक सिर्फ 50 प्रतिशत ही हो पाई है।
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जिले में धान की खेती प्रमुख रूप से होती है। इस बार धान की फसल का दायरा भी बढ़ा है। करीब 98 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य है। मई व जून के महीने में समुद्री तूफान की वजह से अच्छी बारिश हुई। इस दौरान किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली, मगर रोपाई के समय बारिश नहीं हो रही है। आसमान में सिर्फ बादलों की उमड़-घुमड़ बनी हुई है। बारिश नहीं होने से अब तक जिले में सिर्फ 50 प्रतिशत ही रोपाई हो पाई है। किसानों को बारिश का इंतजार है।
धान की नर्सरी तैयार है। खेतों की जुताई भी हो गई है, लेकिन बारिश न होने से खेतों से धूल उड़ रही है। अगैती रोपाई करने वाले किसान भी परेशान हैं। बारिश के अभाव में उनकी फसल सूख रही है। रानीगंज क्षेत्र के थरिया गांव के किसान मानिकचंद्र मिश्र, पट्टी क्षेत्र के शेखपुर अठगंवा के राजेंद्र यादव, कल्लू रजत, शिवगढ़ ब्लाक के छानापार बृजेश यादव, गोपाल के संजय यादव का कहना है कि धान की नर्सरी तैयार हुए पखवारे भर से अधिक हो गया है, मगर खेत में पानी नहीं है। जुताई किए गए खेतों से धूल उड़ रही है। यही हाल रहा तो इस बार रोपाई नहीं हो पाएगी। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि बारिश न होने से रोपाई पिछड़ रही है। रोपी गई फसल पर भी सिंचाई के अभाव में संकट खड़ा हो गया है। इससे पैदावार पर भी असर पड़ेगा।
नहर में टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी
नसीरपुर रजबहा में टेल तक पानी नहीं पहुंचने से 50 से अधिक गांवों के किसानों की फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बारिश न होने से धान की फसल सूख रही है। दरअसल, नहर की सफाई में जमकर खेल हुआ है। नसीरपुर रजबहा से हरिपालमऊ, भोजेमऊ, मधवापुर, बघेवरा, छानापार, नहरपुर, धनऊपुर, पांडेयतारा सहित सैकड़ों गांव जुड़े हैं। दिलीप पांडेय, राकेश पांडेय, ललित पांडेय, नागेंद्र सिंह, दिनेश सिंह, केशव प्रसाद शुक्ला आदि किसानों का कहना है कि यदि टेल तक पानी नहीं पहुंचा तो सिंचाई के अभाव में फसल बर्बाद हो जाएगी।