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नामी दुकानों तक ही सिमटी जांच
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 10 Mar 2017 11:39 PM IST
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मिठाई व घी के नमूने
- फोटो : अमर उजाला
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होली के मौके पर जांच के बहाने फूड विभाग अपनी जेब गरम करने में लगा है। त्योहार को देखते हुए जिले में बड़े पैमाने पर खाद्य सामाग्रियों के साथ खोवा में मिलावाट की जा रही है। मिलावाटी खोवा डंप कर दुकानदार बेच रहे हैं, लेकिन विभाग के अफसरों को इसकी जांच करने की फुर्सत नहीं है। अधिकारी सिर्फ जिले की बड़ी नामी-गिरामी दुकानों पर जाकर सैंपल भर रहे हैं। वही सैंपल जांच के लिए भेजा जाता है जहां सेटिंग नहीं हो पाती है। आरोप है कि खोवा और किराना के कई दुकानदारों से मिलीभगत कर अफसर अपनी जेब भरने में लगे हैं।
होली के त्योहार पर मुनाफाखोरों ने खाद्य सामाग्रियों और खोवे में बड़े पैमाने पर मिलावट की है। मिलावटखोर खोवा में डिटरजेंट तक मिलाकर बेच रहे हैं। बासी खोवा भी खूब खपाया जा रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसर भी वाकिफ हैं, लेकिन एक खोवा में मिलावट कर बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। दरअसल विभाग के अफसर इन दिनों सिर्फ जिले की बड़ी और नामी दुकानों को खंगालने में जुटे हैं। हर बड़ी दुकान पर पहुंचकर सैंपल लिया जा रहा है। कई दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सेटिंग होने के बाद या तो नमूना जांच के लिए नहीं भेजा जाता है या फिर बदल दिया जाता है। सूत्रों की मानी जाए तो दुकान पर लेनदेन नहीं सेट होता है तो संचालक शाम को कार्यालय पहुंच जाता है। यहां जिम्मेदार अधिकारियों की जेब गर्म करके अपना सैंपल बदलवा देता है। इसके बाद कहीं उसे जांच के लिए भेजा जाता है। वहीं खोवा बेचने वाले व्यापारी पहले से सर्तक हैं।
होली के त्योहार पर मुनाफाखोरों ने खाद्य सामाग्रियों और खोवे में बड़े पैमाने पर मिलावट की है। मिलावटखोर खोवा में डिटरजेंट तक मिलाकर बेच रहे हैं। बासी खोवा भी खूब खपाया जा रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसर भी वाकिफ हैं, लेकिन एक खोवा में मिलावट कर बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। दरअसल विभाग के अफसर इन दिनों सिर्फ जिले की बड़ी और नामी दुकानों को खंगालने में जुटे हैं। हर बड़ी दुकान पर पहुंचकर सैंपल लिया जा रहा है। कई दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सेटिंग होने के बाद या तो नमूना जांच के लिए नहीं भेजा जाता है या फिर बदल दिया जाता है। सूत्रों की मानी जाए तो दुकान पर लेनदेन नहीं सेट होता है तो संचालक शाम को कार्यालय पहुंच जाता है। यहां जिम्मेदार अधिकारियों की जेब गर्म करके अपना सैंपल बदलवा देता है। इसके बाद कहीं उसे जांच के लिए भेजा जाता है। वहीं खोवा बेचने वाले व्यापारी पहले से सर्तक हैं।
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