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बेल्हा में धड़ाम हो गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा मिशन योजना
प्रतापगढ़ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2016 12:10 AM IST
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health
- फोटो : amar ujala
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गरीबाें के लिए संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा मिशन योजना बेल्हा में धड़ाम हो गई। अक्तूबर 2015 से लेकर अब तक इस योजना का लाभ किसी भी सदस्य को नहीं मिला है। जबकि शासन ने गरीब परिवार के लोगों के लिए ग्रीन कार्ड बनवाया था। इस कार्ड के माध्यम से 25 हजार रुपये तक सरकारी या फिर प्राइवेट अस्पताल में मरीजों का इलाज नि:शुल्क करने का दावा किया गया था।
बीपीएल सूची में शामिल गरीब परिवार के लोगों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा मिशन योजना संचालित की। बीपीएल सूची के पात्र परिवार के पांच सदस्यों का 25 रुपये में बीमा किया जा रहा था। विभाग की ओर से एक ग्रीन कार्ड बनाया जा रहा था। इस कार्ड पर मुखिया व उसके परिवार के पांचों सदस्यों के बीमार होने पर सरकारी के साथ प्राइवेट अस्पतालों में 25 हजार रुपये तक नि:शुल्क उपचार करने का दावा किया जाता था।
उपचार के बाद मरीज को घर जाते समय चिकित्सक दवा भी देते थे। साथ ही भर्ती मरीजों को अस्पताल की ओर से खाना भी दिया जाता था। बेल्हा में लगभग 99 हजार कार्ड जारी किए गए थे। इनमें से 1765 लोगों का ही नि:शुल्क उपचार किया गया। यह योजना एक अक्तूबर 2015 से बंद कर दी गई। इसके चलते कार्ड होते हुए भी लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोग परेशान हैं।
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एक करोड़ 80 लाख का हुआ क्लेम
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सैकड़ों लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज कराया था। प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने इलाज करने के बाद क्लेम दाखिल किया, मगर आज तक पास नहीं हो सका है।
कार्ड की अवधि सीमा खत्म हो गई है। एक अक्तूबर 2015 से यह योजना बंद हो गई है। चालू करना या फिर बंद कर देना यह तो शासन के स्तर पर ही हो सकता है। इलाज करने के बाद डॉक्टर जो क्लेम किए हैं उसे दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
यूके पांडेय, सीएमओ।
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बीपीएल सूची में शामिल गरीब परिवार के लोगों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा मिशन योजना संचालित की। बीपीएल सूची के पात्र परिवार के पांच सदस्यों का 25 रुपये में बीमा किया जा रहा था। विभाग की ओर से एक ग्रीन कार्ड बनाया जा रहा था। इस कार्ड पर मुखिया व उसके परिवार के पांचों सदस्यों के बीमार होने पर सरकारी के साथ प्राइवेट अस्पतालों में 25 हजार रुपये तक नि:शुल्क उपचार करने का दावा किया जाता था।
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उपचार के बाद मरीज को घर जाते समय चिकित्सक दवा भी देते थे। साथ ही भर्ती मरीजों को अस्पताल की ओर से खाना भी दिया जाता था। बेल्हा में लगभग 99 हजार कार्ड जारी किए गए थे। इनमें से 1765 लोगों का ही नि:शुल्क उपचार किया गया। यह योजना एक अक्तूबर 2015 से बंद कर दी गई। इसके चलते कार्ड होते हुए भी लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोग परेशान हैं।
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एक करोड़ 80 लाख का हुआ क्लेम
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सैकड़ों लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज कराया था। प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने इलाज करने के बाद क्लेम दाखिल किया, मगर आज तक पास नहीं हो सका है।
कार्ड की अवधि सीमा खत्म हो गई है। एक अक्तूबर 2015 से यह योजना बंद हो गई है। चालू करना या फिर बंद कर देना यह तो शासन के स्तर पर ही हो सकता है। इलाज करने के बाद डॉक्टर जो क्लेम किए हैं उसे दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
यूके पांडेय, सीएमओ।