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तड़तड़ा रहीं गोलियां, कहां से आ रही बुलेट
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 06 Feb 2018 11:49 PM IST
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शहर से लेकर गांव तक जिले में इन दिनों हर दिन गोलियां तड़तड़ा रही हैं। लूट, छिनैती संग खूनी खेल खेलने वाले बदमाश लोगों को भयभीत करने के लिए अंधाधुंध फायरिंग करने लगते हैं। सवाल यह है कि जिले में इतनी गोलियां आ कहां से रही हैं। कौन सप्लाई कर रहा है। पुलिस केवल असलहा तस्करों को पकडने के लिए नजरें गड़ाए रहती है, लेकिन उसकी निगाह कारतूस की खेप लाने वाले बदमाशों पर नहीं होती। कुछ असलहों की दुकानों से भी ब्लैक में कारतूसों की बिक्री होने की बात सामने आ चुकी है।
जिले में कुल 18 शस्त्र की दुकानें थीं। जिसमें से तीन शस्त्र दुकानदारों ने अपनी दुकानें प्रशासन को सरेंडर कर दी हैं। इस साल एक शस्त्र की दुकान खुली। अब पूरे जिले में केवल 16 दुकानें संचालित हैं। शहर से लेकर गांव में हर ओर अवैध असलहों से गोलियां तड़तड़ा रही हैं। लूट, छिनैती में बदमाश असलहों का प्रयोग करते हैं। वे घटना के दौरान अपनी जान बचाने के लिए फायरिंग करने लगते हैं। शस्त्र लाइसेंस धारकों को दुकानों से कोटे के हिसाब से ही कारतूस मिलती है। इसके लिए भी उन्हें कारतूसों का खोखा जमा करना पड़ता है और खर्च कारतूसों का ब्यौरा भी देना पड़ता है। 24 घंटे के भीतर लालगंज के पूरे तिलकराम, देवसरा के उमरा नाला, सिनेमा रोड पर दस राउंड फायरिंग और मंगलवार की शाम महेशगंज में मंदिर परिसर के करीब सात राउंड फायरिंग अवैध असलहों से की गई। बदमाशों को इस बात की परवाह नहीं होती कि कारतूस खत्म न हो जाए।
अब ऐसे में यह गंभीर प्रश्र है कि इतनी गोलियां आ कहां से रही हैं? पुलिस भी कभी इसकी गंभीरता से पड़ताल नहीं करती। कई सालों से असलहे पुलिस बरामद करती रही है, लेकिन बड़े पैमाने पर कारतूस की खपत की ओर पुलिस का ध्यान ही नहीं जाता। यदि कारतूसों के मिलने पर प्रतिबंध लग जाए तो अपराधिक घटनाओं में कमी आने से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस सूत्रों की मानें तो जिले की कुछ शस्त्र की लाइसेंसी दुकानों से ब्लैक में कारतूस बेंचा जाता है। बिहार से भी कारतूस लाकर तस्कर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं। इस बाबत सीओ सिटी रमेशचंद्र का कहना है कि असलहा तस्करों पर कार्रवाई के लिए सभी थानेदारों को निर्देश दिया गया है। शस्त्र की दुकानों का औचक निरीक्षण कर बिक्री व उपलब्ध कारतूस व असलहों का मिलान होता है। कारतूसों की सप्लाई को लेकर तस्करों पर भी नजर रखी जा रही है।
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जिले में कुल 18 शस्त्र की दुकानें थीं। जिसमें से तीन शस्त्र दुकानदारों ने अपनी दुकानें प्रशासन को सरेंडर कर दी हैं। इस साल एक शस्त्र की दुकान खुली। अब पूरे जिले में केवल 16 दुकानें संचालित हैं। शहर से लेकर गांव में हर ओर अवैध असलहों से गोलियां तड़तड़ा रही हैं। लूट, छिनैती में बदमाश असलहों का प्रयोग करते हैं। वे घटना के दौरान अपनी जान बचाने के लिए फायरिंग करने लगते हैं। शस्त्र लाइसेंस धारकों को दुकानों से कोटे के हिसाब से ही कारतूस मिलती है। इसके लिए भी उन्हें कारतूसों का खोखा जमा करना पड़ता है और खर्च कारतूसों का ब्यौरा भी देना पड़ता है। 24 घंटे के भीतर लालगंज के पूरे तिलकराम, देवसरा के उमरा नाला, सिनेमा रोड पर दस राउंड फायरिंग और मंगलवार की शाम महेशगंज में मंदिर परिसर के करीब सात राउंड फायरिंग अवैध असलहों से की गई। बदमाशों को इस बात की परवाह नहीं होती कि कारतूस खत्म न हो जाए।
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अब ऐसे में यह गंभीर प्रश्र है कि इतनी गोलियां आ कहां से रही हैं? पुलिस भी कभी इसकी गंभीरता से पड़ताल नहीं करती। कई सालों से असलहे पुलिस बरामद करती रही है, लेकिन बड़े पैमाने पर कारतूस की खपत की ओर पुलिस का ध्यान ही नहीं जाता। यदि कारतूसों के मिलने पर प्रतिबंध लग जाए तो अपराधिक घटनाओं में कमी आने से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस सूत्रों की मानें तो जिले की कुछ शस्त्र की लाइसेंसी दुकानों से ब्लैक में कारतूस बेंचा जाता है। बिहार से भी कारतूस लाकर तस्कर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं। इस बाबत सीओ सिटी रमेशचंद्र का कहना है कि असलहा तस्करों पर कार्रवाई के लिए सभी थानेदारों को निर्देश दिया गया है। शस्त्र की दुकानों का औचक निरीक्षण कर बिक्री व उपलब्ध कारतूस व असलहों का मिलान होता है। कारतूसों की सप्लाई को लेकर तस्करों पर भी नजर रखी जा रही है।
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