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मिड- डे- मील मामले की हो जांच, दोषियोें पर हो कार्रवाई
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Mar 2018 12:01 AM IST
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मिड-डे-मील के इस खाने में देखा जा सकता है कि बच्चों को कितना पोषण मिलता है। दाल और सब्जी के नाम पर मानो हल्दी मिलाकर पानी दिया जा रहा हो।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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फतनपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में मिड- डे- मील में बरती गई लापरवाही के मामले में एबीवीपी के पदाधिकारियों ने तीन दिन के भीतर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गुरुवार को बीएसए को सौंपे गए ज्ञापन में पदाधिकारियों ने कहा कि बच्चों के साथ विद्यालय प्रशासन द्वारा घोर अनियमितता बरती गई है। इसमें किसी भी कीमत पर उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला संयोजक विवेक पांडेय ने कहा कि जिले में प्राथमिक विद्यालयोें की दशा बहुत ही दयनीय है। मिड डे मील से लेकर पठन- पाठन तक सारी व्यवस्था खस्ताहाल है। जांच के नाम पर महज कोरम पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि इस तरह का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अफसरों को तीन दिन के भीतर जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे की इससे अन्य विद्यालय सीख ले सके।
इस अवसर पर नगरमंत्री प्रवीण शुक्ल, नगर सहमंत्री आकाश सिंह, धीरज यादव, अर्पित तिवारी, सत्यम मिश्र, अभिषेक पांडेय, सुधांशु रंजन, उत्कर्ष कुमार, प्रशांत सिंह, हिमांशु पांडेय आदि मौजूद रहे।
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अस्पताल से बच्चों की हुई छुट्टी
फतनपुर प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को मिड डे मील का दूध पीने से बीमार सभी बच्चों की गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। गुरुवार को स्कूल में एक भी बच्चा नहीं पहुंचा। जांच करने के लिए अधिकारियों के पहुंचने की भनक पर कुछ बच्चों को लेकर अभिभावक स्कूल पहुंचे और नारेबाजी कर विरोध जताने लगे। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सभी को समझाबुझाकर शांत कराया।
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में बुधवार को मध्याह्न भोजन करने के दौरान दूध पीने से 75 बच्चों संग रसोइयां विमला देवी की तबीयत खराब हो गई थी। सभी को उल्टी-दस्त होने लगी। कुछ बच्चे बेहोश हो गए। सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को जिला अस्पताल व गौरा अस्पताल में भर्ती बच्चों को ठीक होने के बाद छुट्टी कर दी गई। अभिभावक बच्चों को लेकर घर चले गए। शाम को इलाहबाद स्थित चिल्ड्रेन अस्पताल में अुनज और बेबी की तबियत ठीक होने पर डाक्टरों ने डिस्चार्ज कर दिया। दोनों बच्चों को लेकर बीएसए प्रतापगढ़ लौटे। जिसके बाद जाकर जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। घटना के दूसरे दिन सस्पेंड शिक्षक कमलेश पाल, शिक्षिक वाल्मीकि सरोज, अंजू देवी व शिक्षामित्र स्कूल पहुंचे। रसोइयां स्कूल नहीं पहुंचे।
गुरुवार को स्वस्थ बच्चे भी स्कूल से दूरी बनाए रहे। इस बीच घटना की जांच करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी पट्टी सुधीर सिंह और सदर सत्यप्रकाश जांच करने स्कूल पहुंच गए। अधिकारियों के आने की भनक लगते ही आधा दर्जन बच्चों के साथ स्कूल पहुंचीं महिला अभिभावकों ने सभी को खरीखोटी सुनाई। शिक्षकों के मनमाने पर भड़ास निकालते हुए नारेबाजी करने लगीं। अधिकारियों ने सभी को समझाबुझाकर शांत कराया। खाद्य विभाग की टीम जांच करने के साथ ही लोगों का बयान लेने पहुंची। बवाल की आशंका को देखते हुए स्कूल में दो सिपाही तैनात थे। बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ये दूध वाले अंकल नहीं हैं...
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में जांच करने पहुंची टीम के सामने उस समय शिक्षकों की पोल खुलती नजर आई जब छात्रा नम्रता यादव निवासी चंदा का पुरा को लेकर उसकी मां स्कूल पहुंचीं। खंड शिक्षा अधिकारियों ने उससे दूधिए के बारे में पूछा तो उसने बताया कि यह दूध देने वाले अंकल नहीं हैं। जिसके बाद वहां मौजूद शिक्षक एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
सिर्फ दो लीटर दूध मंगाते थे, 13 लीटर का करते रहे दावा
जांच करने पहुंची टीम के सामने निलंबित शिक्षक कमलेश पाल ने बुधवार को घटना की जानकारी दी। उसने बताया कि हर बुधवार को 13 लीटर दूध मंगाया जाता था। 35 रुपये प्रति लीटर दूध क्रय किया जाता था। जबकि दूधिए मंत्री प्रसाद यादव का कहना था कि हर बुधवार को वह 11 लीटर दूध दे जाता था। स्कूल के बाहर मंडरा रहे बच्चों ने बताया कि केवल दो लीटर दूध लिया जाता था। रसोइयां केवल 10 लीटर दूध लेने की बात बताती रही। दूध को लेकर सभी अलग-अलग बयान देते रहे।
बेहोश हो रहे बच्चों को छोड़कर भागे थे शिक्षक
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की दूध पीने के बाद तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उल्टी-दस्त होती देख शिक्षकों ने सभी को बाहर कर समय से पहले स्कूल बंद कर दिया। इसके बाद शिक्षक वहां से भाग निकले। बच्चों की बातों पर यकीन करें तो दूध खत्म हो गया था। तब दूध कहां से रसोइघर में पहुंच गया। अपनी गर्दन बचाने के लिए शिक्षकों ने बाजार से असली दूध खरीदकर ला दिया। ताकि वह जांच में खुद को बेगुनाह साबित कर सकें। मासूम बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले शिक्षकों की संवेदनशून्यता की हर ओर निंदा होती रही। लोगों का कहना था कि शिक्षक अपनी गलतियों को छिपाने के लिए स्कूल बंदकर भागे। बच्चों को अस्पताल ले जाना भी गंवारा न समझा।
जांच करने पहुंचे एसओ ने जताई नाराजगी
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में बवाल की आशंका को देखते हुए जांच करने के लिए थानाध्यक्ष पहुंचे। देखा तो शिक्षक सफाई करने के साथ ही पानी का छिड़काव करा रहे थे। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और छिड़काव रोक दिया। हालांकि उनके जाने के बाद फिर से छिड़काव शुरू कर दिया गया।
पकौड़ा और जलेबी से गुस्सा दूर करने का किया प्रयास
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील का दूध पीने से 75 बच्चों समेत रसोइयां विमला की तबीयत बिगड़ गई थी। जिला अस्पताल में गुरुवार को डाक्टरों ने बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद डिस्चार्ज कर दिया। प्राइवेट स्कूल की बस से सभी को घर भेजने की व्यवस्था में शिक्षा विभाग के डीआई से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी अस्पताल में डटे रहे। इस बीच बस में सवार बच्चों के साथ सफर करने वाले अभिभावकों का गुस्सा दूर करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से पकौड़ा और जलेबी वितरित की जा रही थी। नजर पड़ने पर स्वास्थ्यकर्मी कहते नजर आए कि इतनी देखभाल अफसरों ने पहले की होती तो शायद आज यह नौबत न आती।
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जिला संयोजक विवेक पांडेय ने कहा कि जिले में प्राथमिक विद्यालयोें की दशा बहुत ही दयनीय है। मिड डे मील से लेकर पठन- पाठन तक सारी व्यवस्था खस्ताहाल है। जांच के नाम पर महज कोरम पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि इस तरह का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अफसरों को तीन दिन के भीतर जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे की इससे अन्य विद्यालय सीख ले सके।
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इस अवसर पर नगरमंत्री प्रवीण शुक्ल, नगर सहमंत्री आकाश सिंह, धीरज यादव, अर्पित तिवारी, सत्यम मिश्र, अभिषेक पांडेय, सुधांशु रंजन, उत्कर्ष कुमार, प्रशांत सिंह, हिमांशु पांडेय आदि मौजूद रहे।
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अस्पताल से बच्चों की हुई छुट्टी
फतनपुर प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को मिड डे मील का दूध पीने से बीमार सभी बच्चों की गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। गुरुवार को स्कूल में एक भी बच्चा नहीं पहुंचा। जांच करने के लिए अधिकारियों के पहुंचने की भनक पर कुछ बच्चों को लेकर अभिभावक स्कूल पहुंचे और नारेबाजी कर विरोध जताने लगे। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सभी को समझाबुझाकर शांत कराया।
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में बुधवार को मध्याह्न भोजन करने के दौरान दूध पीने से 75 बच्चों संग रसोइयां विमला देवी की तबीयत खराब हो गई थी। सभी को उल्टी-दस्त होने लगी। कुछ बच्चे बेहोश हो गए। सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को जिला अस्पताल व गौरा अस्पताल में भर्ती बच्चों को ठीक होने के बाद छुट्टी कर दी गई। अभिभावक बच्चों को लेकर घर चले गए। शाम को इलाहबाद स्थित चिल्ड्रेन अस्पताल में अुनज और बेबी की तबियत ठीक होने पर डाक्टरों ने डिस्चार्ज कर दिया। दोनों बच्चों को लेकर बीएसए प्रतापगढ़ लौटे। जिसके बाद जाकर जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। घटना के दूसरे दिन सस्पेंड शिक्षक कमलेश पाल, शिक्षिक वाल्मीकि सरोज, अंजू देवी व शिक्षामित्र स्कूल पहुंचे। रसोइयां स्कूल नहीं पहुंचे।
गुरुवार को स्वस्थ बच्चे भी स्कूल से दूरी बनाए रहे। इस बीच घटना की जांच करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी पट्टी सुधीर सिंह और सदर सत्यप्रकाश जांच करने स्कूल पहुंच गए। अधिकारियों के आने की भनक लगते ही आधा दर्जन बच्चों के साथ स्कूल पहुंचीं महिला अभिभावकों ने सभी को खरीखोटी सुनाई। शिक्षकों के मनमाने पर भड़ास निकालते हुए नारेबाजी करने लगीं। अधिकारियों ने सभी को समझाबुझाकर शांत कराया। खाद्य विभाग की टीम जांच करने के साथ ही लोगों का बयान लेने पहुंची। बवाल की आशंका को देखते हुए स्कूल में दो सिपाही तैनात थे। बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ये दूध वाले अंकल नहीं हैं...
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में जांच करने पहुंची टीम के सामने उस समय शिक्षकों की पोल खुलती नजर आई जब छात्रा नम्रता यादव निवासी चंदा का पुरा को लेकर उसकी मां स्कूल पहुंचीं। खंड शिक्षा अधिकारियों ने उससे दूधिए के बारे में पूछा तो उसने बताया कि यह दूध देने वाले अंकल नहीं हैं। जिसके बाद वहां मौजूद शिक्षक एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
सिर्फ दो लीटर दूध मंगाते थे, 13 लीटर का करते रहे दावा
जांच करने पहुंची टीम के सामने निलंबित शिक्षक कमलेश पाल ने बुधवार को घटना की जानकारी दी। उसने बताया कि हर बुधवार को 13 लीटर दूध मंगाया जाता था। 35 रुपये प्रति लीटर दूध क्रय किया जाता था। जबकि दूधिए मंत्री प्रसाद यादव का कहना था कि हर बुधवार को वह 11 लीटर दूध दे जाता था। स्कूल के बाहर मंडरा रहे बच्चों ने बताया कि केवल दो लीटर दूध लिया जाता था। रसोइयां केवल 10 लीटर दूध लेने की बात बताती रही। दूध को लेकर सभी अलग-अलग बयान देते रहे।
बेहोश हो रहे बच्चों को छोड़कर भागे थे शिक्षक
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की दूध पीने के बाद तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उल्टी-दस्त होती देख शिक्षकों ने सभी को बाहर कर समय से पहले स्कूल बंद कर दिया। इसके बाद शिक्षक वहां से भाग निकले। बच्चों की बातों पर यकीन करें तो दूध खत्म हो गया था। तब दूध कहां से रसोइघर में पहुंच गया। अपनी गर्दन बचाने के लिए शिक्षकों ने बाजार से असली दूध खरीदकर ला दिया। ताकि वह जांच में खुद को बेगुनाह साबित कर सकें। मासूम बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले शिक्षकों की संवेदनशून्यता की हर ओर निंदा होती रही। लोगों का कहना था कि शिक्षक अपनी गलतियों को छिपाने के लिए स्कूल बंदकर भागे। बच्चों को अस्पताल ले जाना भी गंवारा न समझा।
जांच करने पहुंचे एसओ ने जताई नाराजगी
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में बवाल की आशंका को देखते हुए जांच करने के लिए थानाध्यक्ष पहुंचे। देखा तो शिक्षक सफाई करने के साथ ही पानी का छिड़काव करा रहे थे। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और छिड़काव रोक दिया। हालांकि उनके जाने के बाद फिर से छिड़काव शुरू कर दिया गया।
पकौड़ा और जलेबी से गुस्सा दूर करने का किया प्रयास
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील का दूध पीने से 75 बच्चों समेत रसोइयां विमला की तबीयत बिगड़ गई थी। जिला अस्पताल में गुरुवार को डाक्टरों ने बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद डिस्चार्ज कर दिया। प्राइवेट स्कूल की बस से सभी को घर भेजने की व्यवस्था में शिक्षा विभाग के डीआई से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी अस्पताल में डटे रहे। इस बीच बस में सवार बच्चों के साथ सफर करने वाले अभिभावकों का गुस्सा दूर करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से पकौड़ा और जलेबी वितरित की जा रही थी। नजर पड़ने पर स्वास्थ्यकर्मी कहते नजर आए कि इतनी देखभाल अफसरों ने पहले की होती तो शायद आज यह नौबत न आती।