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छप्पर में तड़पकर मर गया अधेड़
प्रतापगढ़ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Aug 2016 12:08 AM IST
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रानीगंज थाना क्षेत्र के नजियापुर गांव में रहने वाला एक अधेड़ तड़प-तड़पकर मर गया। तीन बाद शुक्रवार को गांववालों को इसकी जानकारी हुई। इस दौरान भूख से मौत की अफवाह से प्रशासनिक अमले मेें हड़कंप मच गया। हालांकि मौके पर तहसीलदार को भेजकर जांच कराने के बाद प्रशासन ने इस बात को नकार दिया है। डीएम ने बताया कि मृतक की झोपड़ी में खाद्य सामग्री मिली है, उसकी मौत भूख से हुई।
नजियापुर निवासी रामऋंगार गौड़ (40) की दिमागी हालत करीब 10 वर्ष पूर्व खराब हो गई थी। इसके चलते बेटे विनय उर्फ अनिल को उसके पास छोड़कर उसकी पत्नी अलग रहने लगी। इलाज के अभाव में रामऋंगार की बीमारी बढ़ती गई। कुछ माह पूर्व विनय भी हादसे में घायल होने के बाद शहर में अपनी बुआ के घर आकर रहने लगा। रामऋंगार छप्पर में रहता था। खुद खाना भी बनाता था। बरसात में उसका छप्पर भी क्षतिग्रस्त हो गया था। शनिवार सुबह रास्ते से गुजरते हुए लोगों ने आवाज लगाई, लेकिन रामऋंगार टस से मस नहीं हुआ। नजदीक से देखा तो वह मरा पड़ा था। शोर पर गांव के लोग जमा हो गए। खबर फैली कि मौत भूख से हुई। लोगों ने सूचना देकर उसकी बहन व बेटे को बुलाया।
शव सड़ चुका था ऐसे में अनुमान लगाया गया कि मौत दो-तीन दिन पहले हुई। छप्पर के नीचे एक कोने में खाद्य सामग्री रखी हुई थी और कुछ बर्तन भी पड़े थे। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी थी, लेकिन वह भीगी हुई थी। बीमारी के चलते ही बस्ती के लोग पास नहीं जाते थे, यही वजह है कि उसकी मौत की जानकारी तीन दिन बाद हो सकी। मौके पर पहुंचे लेखपाल, कानूनगो व प्रभारी थानाध्यक्ष प्रमोद पांडेय ने छानबीन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों का कहना था कि रामऋंगार की हरकतों से गांव के लोग दहशत में रहते थे। पहले लोग उसे घर के बाहर खाने-पीने का सामान दे देते थे। चार माह से रामऋंगार धनुष लेकर लोगों को दौड़ाने लगा था। जिसके चलते लोग उससे दूरी बनाने लगे।
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नजियापुर निवासी रामऋंगार गौड़ (40) की दिमागी हालत करीब 10 वर्ष पूर्व खराब हो गई थी। इसके चलते बेटे विनय उर्फ अनिल को उसके पास छोड़कर उसकी पत्नी अलग रहने लगी। इलाज के अभाव में रामऋंगार की बीमारी बढ़ती गई। कुछ माह पूर्व विनय भी हादसे में घायल होने के बाद शहर में अपनी बुआ के घर आकर रहने लगा। रामऋंगार छप्पर में रहता था। खुद खाना भी बनाता था। बरसात में उसका छप्पर भी क्षतिग्रस्त हो गया था। शनिवार सुबह रास्ते से गुजरते हुए लोगों ने आवाज लगाई, लेकिन रामऋंगार टस से मस नहीं हुआ। नजदीक से देखा तो वह मरा पड़ा था। शोर पर गांव के लोग जमा हो गए। खबर फैली कि मौत भूख से हुई। लोगों ने सूचना देकर उसकी बहन व बेटे को बुलाया।
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शव सड़ चुका था ऐसे में अनुमान लगाया गया कि मौत दो-तीन दिन पहले हुई। छप्पर के नीचे एक कोने में खाद्य सामग्री रखी हुई थी और कुछ बर्तन भी पड़े थे। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी थी, लेकिन वह भीगी हुई थी। बीमारी के चलते ही बस्ती के लोग पास नहीं जाते थे, यही वजह है कि उसकी मौत की जानकारी तीन दिन बाद हो सकी। मौके पर पहुंचे लेखपाल, कानूनगो व प्रभारी थानाध्यक्ष प्रमोद पांडेय ने छानबीन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों का कहना था कि रामऋंगार की हरकतों से गांव के लोग दहशत में रहते थे। पहले लोग उसे घर के बाहर खाने-पीने का सामान दे देते थे। चार माह से रामऋंगार धनुष लेकर लोगों को दौड़ाने लगा था। जिसके चलते लोग उससे दूरी बनाने लगे।
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