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भूसे की चिंगारी से भडक़ी आग, मची भगदड़

Tue, 15 May 2018 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Tue, 15 May 2018 11:45 PM IST
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fire on straw
धान की पुआल जलाना है प्रदूषण का कारण - फोटो : अमर उजाला
अंतू थाना क्षेत्र के पदुमपुर लंगड़ा का पुरवा में मंगलवार को फिर जले हुए दो घरों में आग धधक उठी। भूसे की चिंगारी भडक़ गई। जिससे लपटें उठने लगी। यह देख भगदड़ मच गई। पीड़ित परिवार के लोग गृहस्थी के जले सामान रोते हुए समेटते रहे। सफाई कर्मचारियों ने जले मकानों की साफ-सफाई की।
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लंगड़ा का पुरवा में रविवार की रात आंधी के दौरान चाय की भट्ठी से उड़ी चिंगारी ने कहर बरपाया था। आग से 50 घरों की गृहस्थी जलकर राख हो गई थी। सोमवार को मदद न मिलने व प्रशासनिक अमले के रवैए से आक्रोशित ग्रामीणों ने रेलवे लाइन बाधित करने के साथ ही रोड जाम कर विरोध जताया। मंगलवार दोपहर अचानक शिवबहादुर वर्मा और अशोक वर्मा के जले घर के मलबे में फिर आग धधक उठी। चिंगारी से भडक़ी आग हवा के कारण तेज हो गई। जिसके चलते लोग चीखते चिल्लाते हुए भागने लगे। कुछ लोग आग बुझाने में जुट गए। सूचना मिलने पर फायरब्रिगेड मौके पर पहुंची। जिसके बाद आग पर काबू पाया जा सका।
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भूसे की ढेर से फिर धधकी आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। जिसे बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को लाठी का सहारा लेना पड़ा। मंगलवार को गृहस्थी के जले हुए सामान पीड़ित परिवार के लोग रोते हुए समेटते रहे। खून-पसीने की कमाई का जला सामान देख महिलाओं की आंख से आंसू निकल रहे थे। अधिकारियों के आदेश पर मंगरौरा ब्लाक से पहुंचे 32 कर्मचारियों ने पीड़ितों के घर साफ-सफाई की कमान संभाली। गृहस्थी के जले सामान परिवार के लोगों की मौजूदगी में साफ करते रहे। ताकि वे लोग फिर से अपने जले आशियाने में रह सके। पीड़ितों की मदद के लिए रिश्तेदार भी आगे आए। बिस्तर, खाने-पीने की सामग्री और चारपाई भी लेकर पहुंचे। जिससे परिवार के लोगों को दिक्कत न हो सके।
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जले घरों के बाहर पालिथीन को बनाया सहारा
आग से जलकर राख के ढेर में तब्दील हो चुके मकानों को देख हर किसी के आंखों से आंसू निकल पड़ रहे थे। अंतू चेयरमैन अशोक कुमार से मिली मदद को छत बना लिया। घरों के बाहर उसे तानकर बच्चों संग महिलाएं बैठ गईं। रिश्तेदार भी उसी के नीचे चादर बिछाकर बैठते नजर आए। कुछ परिवारों ने सरपतों के सहारे छप्पर भी बना लिए। ताकि किसी तरह गुजर बसर कर सके।
 
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