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थानाध्यक्ष आसपुर देवसरा को खुद अपने खिलाफ लिखना पड़ा केस
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:06 AM IST
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आसपुर देवसरा थाने में तत्कालीन उपजिलाधिकारी व सीओ पट्टी समेत 13 लोगों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर जमीन कब्जा कराने व धमकाने का मुकदमा दर्ज हुआ है। साथ ही वर्तमान एसओ देवसरा को भी थाने में अपने ही खिलाफ केस दर्ज करना पड़ गया।
देवसरा थाना क्षेत्र के पूरे धनी निवासी अरुण कुमार उपाध्याय ने सीजेएम कोर्ट में एक वाद 154 सीआपीसी के तहत दायर किया। जिसमे अरुण ने आरोप लगाया कि उसकी आबादी की जमीन को लेकर बेचूराम आदि ने बदनीयती से दीवानी वाद मुंसिफ कुंडा के न्यायालय में दाखिल किया था। जिसमे 23 फरवरी 1981 को फैसला हो गया था। जिसके बाद तहसील प्रशासन ने उस जमीन पर उसका कब्जा कराते हुए मेड़बंदी करा दी। 23 जून 2014 को पड़ोस के जोखनलाल, हीरालाल, राकेश कुमार व जमुना प्रसाद की साजिश से तत्कालीन एसडीएम जयनाथ, सीओ पट्टी ज्ञानेंद्रनाथ प्रसाद, तहसीलदार चंद्रेश सिंह, एसओ देवसरा, देवसरा के पुलिसकर्मी, कानूनगो, लेखपाल व कुछ अन्य तहसीलकर्मी उसके घर पहुंचे। जबरन पुरानी मेड़ तोड़वाकर कब्जा करा दिया। अधिकारियों की साजिश से पड़ोसियों ने दबंगई के बल पर उसकी जमीन पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया। उसके बड़े पिता राजपति को पुलिस अपने साथ ले गई। साथ ही उसके खिलाफ शांति भंग के तहत कार्रवाई भी की। इस पर उसने न्यायालय के आदेश की अवमानना के साथ ही एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की। जिसे निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। आरोप है कि वर्तमान एसओ ने न्यायालय के आदेश को मानने से इंकार कर दिया। साथ्ा ही पीड़ित को थ्ााने से भ्ागा दिया।इस बाबत उसने पुलिस अधिकारियों को शिकायती पत्र भी दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को एसओ देवसरा दीन दयाल को अपने खिलाफ केस दर्ज करने की संस्तुति करनी पड़ी। इस मामले में तत्कालीन एसडीएम समेत 13 लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
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देवसरा थाना क्षेत्र के पूरे धनी निवासी अरुण कुमार उपाध्याय ने सीजेएम कोर्ट में एक वाद 154 सीआपीसी के तहत दायर किया। जिसमे अरुण ने आरोप लगाया कि उसकी आबादी की जमीन को लेकर बेचूराम आदि ने बदनीयती से दीवानी वाद मुंसिफ कुंडा के न्यायालय में दाखिल किया था। जिसमे 23 फरवरी 1981 को फैसला हो गया था। जिसके बाद तहसील प्रशासन ने उस जमीन पर उसका कब्जा कराते हुए मेड़बंदी करा दी। 23 जून 2014 को पड़ोस के जोखनलाल, हीरालाल, राकेश कुमार व जमुना प्रसाद की साजिश से तत्कालीन एसडीएम जयनाथ, सीओ पट्टी ज्ञानेंद्रनाथ प्रसाद, तहसीलदार चंद्रेश सिंह, एसओ देवसरा, देवसरा के पुलिसकर्मी, कानूनगो, लेखपाल व कुछ अन्य तहसीलकर्मी उसके घर पहुंचे। जबरन पुरानी मेड़ तोड़वाकर कब्जा करा दिया। अधिकारियों की साजिश से पड़ोसियों ने दबंगई के बल पर उसकी जमीन पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया। उसके बड़े पिता राजपति को पुलिस अपने साथ ले गई। साथ ही उसके खिलाफ शांति भंग के तहत कार्रवाई भी की। इस पर उसने न्यायालय के आदेश की अवमानना के साथ ही एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की। जिसे निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। आरोप है कि वर्तमान एसओ ने न्यायालय के आदेश को मानने से इंकार कर दिया। साथ्ा ही पीड़ित को थ्ााने से भ्ागा दिया।इस बाबत उसने पुलिस अधिकारियों को शिकायती पत्र भी दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को एसओ देवसरा दीन दयाल को अपने खिलाफ केस दर्ज करने की संस्तुति करनी पड़ी। इस मामले में तत्कालीन एसडीएम समेत 13 लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
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