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प्रेमी के साथ मिलकर पति को मार डाला
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 23 Jan 2016 11:24 PM IST
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बाघराय थाना क्षेत्र के गलगली गांव निवासी बसंतलाल (40) को उसकी पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया। सुबह उसका रक्तरंजित शव चारपाई पर पड़ा मिला। उसके मुंह से खून निकला हुआ था और कई जगहों पर चोट के निशान थे। मृतक की मां की तहरीर पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
बाघराय थाना क्षेत्र के गलगली गांव निवासी बसंतलाल (40) पुत्र झुरई कामकाज के सिलसिले में पूना में रहता था। प्रधानी के चुनाव के समय वह घर आया था। शनिवार को सुबह नौ बजे उसकी पत्नी घर के बाहर अलाव के पास बैठी थी। इस दौरान गांव का रामखेलावन आया और बसंत को बुलाने लगा। इस पर पत्नी पुष्पा ने कहा कि वह अंदर जाकर उसे जगा ले। वह अंदर गया तो चारपाई पर बसंत की लाश पड़ी थी।
उसके मुंह से खून निकला हुआ था और शरीर पर चोटों के निशान थे। परिजनों में चीखपुकार मच गई। थोड़ी ही दूरी पर उसकी मां सुखिया देवी रहती थी। उसे इसकी जानकारी हुई तो वह चीख-चीख कर बहू पर बदचलन होने और प्रेमी के साथ मिलकर बेटे की गला दबाकर हत्या करने की बात कहने लगी। सूचना पर बाघराय के साथ ही जेठवारा एसओ, एडिशनल एसपी भी मौके पर पहुंच गए। मृतक की मां सुखिया देवी की तहरीर पर पत्नी पुष्पा व गांव के ही उसके कथित प्रेमी केशव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
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बसंत के घर में दो हिस्से हैं, लेकिन बाहर निकलने का एक ही रास्ता है। बताया गया कि रात में एक तरफ उसकी पत्नी अपनी दो बेटियों के साथ सोई थी और दूसरी तरफ वह सोया था। बसंत के शव को देखकर लग रहा था कि उसने हत्यारों से बचने के लिए काफी संघर्ष किया। बावजूद इसके उसका रस्सी के सहारे गला घोंट दिया गया। ऐसा हो ही नहीं सकता कि उसके संघर्ष के दौरान पत्नी की आंख न खुले। फिलहाल उसकी पत्नी पुष्पा आरोप को गलत बता रही है।
सन 2012 में गांव के केशव यादव से पुष्पा का विवाद हो गया था। इसमें पुष्पा ने केशव के खिलाफ एससीएसटी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे से बचने के लिए केशव धीरे-धीरे पुष्पा के करीब आ गया। चर्चा है कि पुष्पा की सास सुखिया देवी व उसकी दो बेटियां उसे केशव से मिलने से मना करती थीं। बावजूद इसके केशव का आना जाना घर में लगा रहता था। बसंत के घर में न रहने से उसे कोई रोकने वाला भी नहीं था।
बसंतलाल प्रधानी के चुनाव के लिए आया था। उसे शनिवार को ही पूना के लिए रवाना होना था। शाम को उसे ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ग्रामीणों में चर्चा है कि अचानक केशव के आने की जानकारी बसंत को हो गई और उसी के चलते उसे मौत के घाट उतार दिया गया।
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बाघराय थाना क्षेत्र के गलगली गांव निवासी बसंतलाल (40) पुत्र झुरई कामकाज के सिलसिले में पूना में रहता था। प्रधानी के चुनाव के समय वह घर आया था। शनिवार को सुबह नौ बजे उसकी पत्नी घर के बाहर अलाव के पास बैठी थी। इस दौरान गांव का रामखेलावन आया और बसंत को बुलाने लगा। इस पर पत्नी पुष्पा ने कहा कि वह अंदर जाकर उसे जगा ले। वह अंदर गया तो चारपाई पर बसंत की लाश पड़ी थी।
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उसके मुंह से खून निकला हुआ था और शरीर पर चोटों के निशान थे। परिजनों में चीखपुकार मच गई। थोड़ी ही दूरी पर उसकी मां सुखिया देवी रहती थी। उसे इसकी जानकारी हुई तो वह चीख-चीख कर बहू पर बदचलन होने और प्रेमी के साथ मिलकर बेटे की गला दबाकर हत्या करने की बात कहने लगी। सूचना पर बाघराय के साथ ही जेठवारा एसओ, एडिशनल एसपी भी मौके पर पहुंच गए। मृतक की मां सुखिया देवी की तहरीर पर पत्नी पुष्पा व गांव के ही उसके कथित प्रेमी केशव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
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बसंत के घर में दो हिस्से हैं, लेकिन बाहर निकलने का एक ही रास्ता है। बताया गया कि रात में एक तरफ उसकी पत्नी अपनी दो बेटियों के साथ सोई थी और दूसरी तरफ वह सोया था। बसंत के शव को देखकर लग रहा था कि उसने हत्यारों से बचने के लिए काफी संघर्ष किया। बावजूद इसके उसका रस्सी के सहारे गला घोंट दिया गया। ऐसा हो ही नहीं सकता कि उसके संघर्ष के दौरान पत्नी की आंख न खुले। फिलहाल उसकी पत्नी पुष्पा आरोप को गलत बता रही है।
सन 2012 में गांव के केशव यादव से पुष्पा का विवाद हो गया था। इसमें पुष्पा ने केशव के खिलाफ एससीएसटी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे से बचने के लिए केशव धीरे-धीरे पुष्पा के करीब आ गया। चर्चा है कि पुष्पा की सास सुखिया देवी व उसकी दो बेटियां उसे केशव से मिलने से मना करती थीं। बावजूद इसके केशव का आना जाना घर में लगा रहता था। बसंत के घर में न रहने से उसे कोई रोकने वाला भी नहीं था।
बसंतलाल प्रधानी के चुनाव के लिए आया था। उसे शनिवार को ही पूना के लिए रवाना होना था। शाम को उसे ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ग्रामीणों में चर्चा है कि अचानक केशव के आने की जानकारी बसंत को हो गई और उसी के चलते उसे मौत के घाट उतार दिया गया।