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भू-माफियाओं के आगे प्रशासन लाचार
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Fri, 15 Jan 2016 11:59 PM IST
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बेल्हा में भू-माफियाओं की ललचाई नजरें सरकारी जमीनों पर टिक गई हैं। शहर के निकट स्थित भूमि पर कब्जे का सिलसिला जारी है। नदी व नाले तक असुरक्षित हो गए हैं। यहां नदी ही नहीं नाले की भी जमीनों पर कब्जा हो रहा है। जिला प्रशासन सरकारी जमीन को बचा पाने में नाकाम है।
शहर में सरकारी व तालाबी जमीन भू-माफियाओं की नजर में चढ़ गई है।दहिलामऊ, टक्करगंज, हनुमान मंदिर गली के भीतर तालाब पर कब्जा बदस्तूर जारी हैै। सई किनारे बेल्हा देवी के आसपास प्लाटिंग का काम शुरू हो गया है। घाट किनारे भूमिधरी की थोड़ी सी जमीन लेकर बड़े क्षेत्रफल पर कब्जा जमाया जा रहा है। नया मालगोदाम रोड के आगे रेलवे फाटक के उस पार स्थित तालाब भी कब्जे की वजह से सिकुड़ने लगा है। सई नदी पुल पार कर थोड़ा आगे चिलबिला में वन विभाग की जमीन पर भी जबरिया कब्जा होने के साथ ही अब पितई का पुरवा देवकली में भी तालाब की जमीन को भूमाफिया पाट रहे हैं।
मामले की शिकायत करते हुए अधिवक्ताओं समेत ग्रामीणों ने गत दिनों अधिकारियों का घेराव भी किया था। इन जमीनों को सुरक्षित करने में जिला प्रशासन नाकाम है। बेशकीमती भूमि पर भू-माफिया कब्जा बढ़ाते जा रहे हैं। सरकारी जमीन को खाली कराने की मुहिम यहां काफी सुस्त है। जिला प्रशासन की चुप्पी पर भूमाफिया और प्रशासनिक मशीनरी में मिलीभगत की लोग आशंका जता रहें हैं। अनदेखी का यही आलम रहा तो वह दिन दूर नहीं जब शहर की तरह गांवों में भी तालाब देखने को नहीं मिलेंगे।
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जिले के धुरंधर राजनेता भी सरकारी जमीन पर कब्जे में पीछे नहीं हैं। राजनीति की दुनिया के जिले में कुछ चर्चित चेहरे भी भू-माफिया की भीड़ में हैं। माना जा रहा है कि इसीलिए अधिकारी माफिया पर कार्रवाई से घबरा रहे हैं। सरकार से मोटी पगार लेने वाले अधिकारियों को लोग नेताओं का शागिर्द कहने से भी गुरेज नहीं कर रहे।
सदर तहसील में नौकरी करने वाले कई लेखपाल ऐसे हैं जो नौकरी करने पहुंचे तो आम आदमी थे। देखते ही देखते सरकारी जमीनों व तालाबों की बेशकीमती जमीन के अभिलेखों में हेरफेर कर मालामाल होने लगे। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में आज के समय में आलीशान भवन के साथ ही प्लाटिंग का काम जोर शोर से चल रहा है। वे खुद को बचाने के लिए परिवार या रिश्तेदारों को आगे कर प्रापर्टी बना रहे हैं। ताकि जांच भी हो तो वे बच सकें। सदर तहसील में तैनात लेखपालों की संख्या अब तो बढ़ती ही जा रही है। जिनकी पैनी नजर अपने हल्के की सरकारी जमीनों के साथ तालाबों पर है।
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शहर में सरकारी व तालाबी जमीन भू-माफियाओं की नजर में चढ़ गई है।दहिलामऊ, टक्करगंज, हनुमान मंदिर गली के भीतर तालाब पर कब्जा बदस्तूर जारी हैै। सई किनारे बेल्हा देवी के आसपास प्लाटिंग का काम शुरू हो गया है। घाट किनारे भूमिधरी की थोड़ी सी जमीन लेकर बड़े क्षेत्रफल पर कब्जा जमाया जा रहा है। नया मालगोदाम रोड के आगे रेलवे फाटक के उस पार स्थित तालाब भी कब्जे की वजह से सिकुड़ने लगा है। सई नदी पुल पार कर थोड़ा आगे चिलबिला में वन विभाग की जमीन पर भी जबरिया कब्जा होने के साथ ही अब पितई का पुरवा देवकली में भी तालाब की जमीन को भूमाफिया पाट रहे हैं।
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मामले की शिकायत करते हुए अधिवक्ताओं समेत ग्रामीणों ने गत दिनों अधिकारियों का घेराव भी किया था। इन जमीनों को सुरक्षित करने में जिला प्रशासन नाकाम है। बेशकीमती भूमि पर भू-माफिया कब्जा बढ़ाते जा रहे हैं। सरकारी जमीन को खाली कराने की मुहिम यहां काफी सुस्त है। जिला प्रशासन की चुप्पी पर भूमाफिया और प्रशासनिक मशीनरी में मिलीभगत की लोग आशंका जता रहें हैं। अनदेखी का यही आलम रहा तो वह दिन दूर नहीं जब शहर की तरह गांवों में भी तालाब देखने को नहीं मिलेंगे।
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जिले के धुरंधर राजनेता भी सरकारी जमीन पर कब्जे में पीछे नहीं हैं। राजनीति की दुनिया के जिले में कुछ चर्चित चेहरे भी भू-माफिया की भीड़ में हैं। माना जा रहा है कि इसीलिए अधिकारी माफिया पर कार्रवाई से घबरा रहे हैं। सरकार से मोटी पगार लेने वाले अधिकारियों को लोग नेताओं का शागिर्द कहने से भी गुरेज नहीं कर रहे।
सदर तहसील में नौकरी करने वाले कई लेखपाल ऐसे हैं जो नौकरी करने पहुंचे तो आम आदमी थे। देखते ही देखते सरकारी जमीनों व तालाबों की बेशकीमती जमीन के अभिलेखों में हेरफेर कर मालामाल होने लगे। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में आज के समय में आलीशान भवन के साथ ही प्लाटिंग का काम जोर शोर से चल रहा है। वे खुद को बचाने के लिए परिवार या रिश्तेदारों को आगे कर प्रापर्टी बना रहे हैं। ताकि जांच भी हो तो वे बच सकें। सदर तहसील में तैनात लेखपालों की संख्या अब तो बढ़ती ही जा रही है। जिनकी पैनी नजर अपने हल्के की सरकारी जमीनों के साथ तालाबों पर है।