{"_id":"77e93838249d6189464a93cadfff36c9","slug":"crime-news-hindi-news-1362","type":"story","status":"publish","title_hn":"घटना की सच्चाई छुपाते रहे अफसर ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
घटना की सच्चाई छुपाते रहे अफसर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 25 Feb 2016 11:52 PM IST
विज्ञापन
मानिकपुर थाने में हुए हमले की घटना को अफसर छोटी बताने में जुटे रहे। किसी ने हमलावरों के तीन मिनट तो किसी ने पांच मिनट थाने पर मौजूद होने की बात बताई जबकि लोगों का कहना है कि 10 से 15 मिनट तक वह थाने पर फायरिंग और बमबाजी करते रहे। इसके साथ ही वह एसओ को गालियां देते हुए बाहर निकलने के लिए कहते रहे।
मानिकपुर थाने में बुधवार की रात दो बाइकों से आए छह बदमाशों ने हमला कर दिया। वह काफी देर तक थाने पर आतंक मचाते रहे। उनके आतंक का ही असर था कि किसी भी सिपाही और दरोगा की हिम्मत नहीं पड़ी कि वह जवाबी फायरिंग करते या फिर उन्हें ललकारते दौड़ाता।
यही नहीं इस दौरान तुरंत उनकी नाकेबंदी भी करने का प्रयास नहीं किया गया। जो भी कार्रवाई शुरू हुई उनके जाने के बाद ही हुई। बावजूद इसके डीआईजी जितेंद्र कुमार शाही उन्हें तीन मिनट तक ही थाने पर होने की बात कहते रहे। उधर एसपी माधव प्रसाद ने हमलावरों के पांच मिनट तक होने की बात बताई है। यही नहीं बगल में ही मंदिर पर सो रहा चौकीदार सुखलाल हमलावरों के फायरिंग शुरू करने के तुरंत बाद ही एसओ के पास पहुंच गया था। हमलावरों की फायरिंग से एसओ सहित दरोगाओं और सिपाहियों पर भी दहशत तारी हो गई थी। अगर इसी दौरान उनकी नाकेबंदी करने का प्रयास किया गया होता तो वह रात में ही पकड़ में आ गए होते।
विज्ञापन
विज्ञापन
मानिकपुर थाने में बुधवार की रात दो बाइकों से आए छह बदमाशों ने हमला कर दिया। वह काफी देर तक थाने पर आतंक मचाते रहे। उनके आतंक का ही असर था कि किसी भी सिपाही और दरोगा की हिम्मत नहीं पड़ी कि वह जवाबी फायरिंग करते या फिर उन्हें ललकारते दौड़ाता।
विज्ञापन
यही नहीं इस दौरान तुरंत उनकी नाकेबंदी भी करने का प्रयास नहीं किया गया। जो भी कार्रवाई शुरू हुई उनके जाने के बाद ही हुई। बावजूद इसके डीआईजी जितेंद्र कुमार शाही उन्हें तीन मिनट तक ही थाने पर होने की बात कहते रहे। उधर एसपी माधव प्रसाद ने हमलावरों के पांच मिनट तक होने की बात बताई है। यही नहीं बगल में ही मंदिर पर सो रहा चौकीदार सुखलाल हमलावरों के फायरिंग शुरू करने के तुरंत बाद ही एसओ के पास पहुंच गया था। हमलावरों की फायरिंग से एसओ सहित दरोगाओं और सिपाहियों पर भी दहशत तारी हो गई थी। अगर इसी दौरान उनकी नाकेबंदी करने का प्रयास किया गया होता तो वह रात में ही पकड़ में आ गए होते।
विज्ञापन