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न्यायपीठ में तोड़फोड़, सदस्य को पीटा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 17 Jun 2015 12:04 AM IST
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कटरा रोड स्थित न्यायपीठ बाल कल्याण समिति में बच्ची के लिए लोगों ने बवाल किया। कार्यालय में तोड़फोड़ करने के साथ ही सदस्य को पीटा। बवाल की खबर पर पहुंची पुलिस से भी लोग भिड़ने को तैयार थे। आक्रोशित लोगों को किसी तरह पुलिस ने समझा बुझाकर शांत कराया। देर शाम तक पुलिस कार्यालय के बाहर मुस्तैद रही। शिवपुरी पूरे नरसिंहभान निवासी सुधा व सुनीता दर्जन भर से अधिक महिलाओं के साथ मंगलवार को न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के कार्यालय पहुंचीं। वे गत दिनों रामकृष्ण बाल कल्याण समिति वाराणसी भेजी गई साढ़े चार साल की प्रियांशी से बात कराने की जिद करने लगीं। उस समय कार्यालय में समिति के सदस्य दिवाकर दिग्गज, रमा मिश्रा, शैल बाला सिंह और डॉ. वीके सिंह मौजूद थे। इस दौरान उन लोगों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर प्रारंभ हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो शोर शराबे के बीच बवाल होने लगा। बवालियों ने बाल कल्याण समिति के सदस्य दिवाकर दिग्गज को पीट दिया। यह देख दूसरे सदस्य बीच-बचाव की कोशिश किए तो वे उनसे भी उलझने लगे।
वे अपनी जान बचाकर भीतर की ओर भागे। लोगों ने कार्यालय में तोड़फोड़ के साथ ही मेज, कुर्सी उलट पलट दिया। सदस्यों के खिलाफ उग्र लोग नारेबाजी करने लगे। बवाल की खबर लोगों ने पुलिस को दी। मौके पर एक्शन मोबाइल, चौकी प्रभारी भंगवा चुंगी एसएम कासिम समेत भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया। महिला थानाध्यक्ष दुर्गावती भी पहुंचीं। पुलिस ने सभी को पहले अर्दब में लेने की कोशिश की तो उग्र महिलाएं पुलिस से भी भिड़ने को तैयार हो गईं। आक्रोशित लोगों को शांत कराने के बाद पुलिस दोनों पक्षों की बात सुनी। पुलिस ने प्रियांशी से भी बात कराने की कोशिश की लेकिन उससे बात नहीं हो सकी। इसे लेकर काफी देर तक हंगामा होता रहा। पुलिस के समझाने पर प्रियांशी के लिए मारपीट पर उतारू लोग वापस लौट गए।
अधिकारियों के आदेश पर वहां पुलिस तैनात कर दी गई। बतादें कि नगर कोतवाली के सरोज चौराहा निवासी सुनीता को कटरा रोड स्थित कमला नर्सिंग होम के करीब 23 फरवरी 2011 को नवजात बच्ची घायल अवस्था में मिली थी। कुछ दिनों बाद उसे अपनी भाभी सुधा पत्नी लवकुश सिंह के हवाले कर दिया। साढ़े चार साल बाद शुक्रवार को उसके घर पर कोतवाली पुलिस पहुंची और बच्ची को सुधा के साथ बाल कल्याण समिति उठा लाई। उस दिन भी बवाल हुआ था। हालांकि बाद में प्रियांशी को समिति के लोगों ने वाराणसी भेज दिया। बच्ची की साढ़े चार साल तक परवरिश करने वाले सुधा व सुनीता का आरोप था कि समिति के लोगों ने भरोसा दिलाया था कि वही बच्ची उन्हें मिलेगी। आरोप है कि वे मंगलवार को जब वे प्रियांशी की कुशलता पूछने व उसे वापस कराने के लिए गए तो समिति के सदस्य दिवाकर दिग्गज दूसरी बच्ची दिलाने के लिए 50 हजार रुपये की मांग करने लगे। इसी को लेकर विवाद हुआ।
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वे अपनी जान बचाकर भीतर की ओर भागे। लोगों ने कार्यालय में तोड़फोड़ के साथ ही मेज, कुर्सी उलट पलट दिया। सदस्यों के खिलाफ उग्र लोग नारेबाजी करने लगे। बवाल की खबर लोगों ने पुलिस को दी। मौके पर एक्शन मोबाइल, चौकी प्रभारी भंगवा चुंगी एसएम कासिम समेत भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया। महिला थानाध्यक्ष दुर्गावती भी पहुंचीं। पुलिस ने सभी को पहले अर्दब में लेने की कोशिश की तो उग्र महिलाएं पुलिस से भी भिड़ने को तैयार हो गईं। आक्रोशित लोगों को शांत कराने के बाद पुलिस दोनों पक्षों की बात सुनी। पुलिस ने प्रियांशी से भी बात कराने की कोशिश की लेकिन उससे बात नहीं हो सकी। इसे लेकर काफी देर तक हंगामा होता रहा। पुलिस के समझाने पर प्रियांशी के लिए मारपीट पर उतारू लोग वापस लौट गए।
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अधिकारियों के आदेश पर वहां पुलिस तैनात कर दी गई। बतादें कि नगर कोतवाली के सरोज चौराहा निवासी सुनीता को कटरा रोड स्थित कमला नर्सिंग होम के करीब 23 फरवरी 2011 को नवजात बच्ची घायल अवस्था में मिली थी। कुछ दिनों बाद उसे अपनी भाभी सुधा पत्नी लवकुश सिंह के हवाले कर दिया। साढ़े चार साल बाद शुक्रवार को उसके घर पर कोतवाली पुलिस पहुंची और बच्ची को सुधा के साथ बाल कल्याण समिति उठा लाई। उस दिन भी बवाल हुआ था। हालांकि बाद में प्रियांशी को समिति के लोगों ने वाराणसी भेज दिया। बच्ची की साढ़े चार साल तक परवरिश करने वाले सुधा व सुनीता का आरोप था कि समिति के लोगों ने भरोसा दिलाया था कि वही बच्ची उन्हें मिलेगी। आरोप है कि वे मंगलवार को जब वे प्रियांशी की कुशलता पूछने व उसे वापस कराने के लिए गए तो समिति के सदस्य दिवाकर दिग्गज दूसरी बच्ची दिलाने के लिए 50 हजार रुपये की मांग करने लगे। इसी को लेकर विवाद हुआ।
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