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कहीं भूख से तो नहीं हुई बंदी की मौत!

Tue, 12 Sep 2017 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Tue, 12 Sep 2017 12:02 AM IST
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जेल से जिला अस्पताल लाए गए बंदी की मौत की गुत्थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उलझ गई है। सूत्रों की मानी जाए तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके पेट में भोजन नहीं मिला है। हृदय के पास खून जमा हुआ था। संदेह के दायरे में आने के कारण चिकित्सकों ने विसरा प्रिजर्व कर लिया है।
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जिला कारागार में चोरी के मामले में निरुद्ध उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के दसौली बाघनाथ निवासी सोनू पाठक (28) पुत्र भुवनचंद्र की शनिवार की रात जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इससे नाराज बंदियों ने रात में खाना नहीं खाया। रविवार की सुबह जेल के बंदियों  ने नाश्ता लेने से इनकार कर दिया। जेल प्रशासन के रवैए से आक्रोशित बंदियों ने भूख हड़ताल का एलान कर हंगामा करना शुरू कर दिया। तोड़फोड़ भी की गई। बंदी की मौत के बाद जेल के साथ जिला प्रशासन के माथे पर बल पड़ गए। रविवार को दिनभर उसके परिजनों के आने का इंतजार किया गया। देर रात बगैर परिजनों के आए ही दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच सोनू के शव का पोस्टमार्टम किया। चिकित्सकों की टीम में डा. चंदन त्रिपाठी व डा. आफताब आलम शामिल रहे। बताया जाता रहा कि सेप्टीसीमिया के  कारण सोनू की मौत हुई। डॉक्टर बताते हैं कि यह  बीमारी खून में इंफेक्शन के कारण होती है। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सोनू के पेट में न भोजन मिला है और न पानी। जबकि मौत के 24 घंटे बाद पोस्टमार्टम होने पर मृतक के ख्राने और पानी के बारे में जानकारी मिल जाती है। ऐसे में सोनू की मौत को लेकर संदेह गहरा गया है। आशंका जताई जा रही है कि जेल में वह कहीं अनशन पर तो नहीं बैठा था। जिसके कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई। वहीं दूसरी ओर जेल प्रशासन ने बंदी सोनू परिजनों के आए बिना ही उसके शव का पोस्टमार्टम करवाकर फ्रीजर में रखवा दिया है। इस मामले में सीएमओ का कहना है कि अभी मैंने पीएम रिपोर्ट नहीं देखी है। इसलिए कुछ बताने की स्थिति में नहीं हूं।
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जिस मृतक के परिजन साथ में नहीं होते हैं उनके शव को 72 घंटे तक मर्चरी में रखवा दिया जाता है। 72 घंटे तक कोई नहीं आता है तो चिकित्सक पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार के लिए शव पुलिस को सौंप देते हैं। सोनू के मामले में आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। आननफानन में प्रशासन ने शव का  पंचायतनामा भरवाकर पोस्टमार्टम करवा दिया। जबकि चिकित्सक पहले इनकार कर रहे थे।
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