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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Bypassing the order, poor children did not get admission

आदेश दरकिनार, गरीब बच्चों को नहीं मिला दाखिला

Wed, 18 Jul 2018 11:59 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
प्रतापगढ़ ब्यूरो Updated Wed, 18 Jul 2018 11:59 PM IST
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 जिले के निजी स्कूल मनमानी पर उतर आए हैं। अफसरों के आदेश के बाद भी 25 फीसदी गरीब बच्चों को दाखिला नहीं मिल रहा है। निजी स्कूलों की इस मनमानी पर रोक लगाने के लिए पहल भी निरर्थक साबित हो रही है। चालू शिक्षासत्र में 570 अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम पसंदीदा स्कूल में लिखाने के लिए आवेदन किए हैं। वहीं कुछ अभिभावक आदेश पत्र लेकर भटक रहे हैं।  
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शहर और ग्रामीण इलाकों के कान्वेंट स्कूलों को 25 प्रतिशत गरीबों बच्चों का दाखिला लेना अनिवार्य किया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (2005) के तहत बेसिक शिक्षा विभाग में आवेदन करने वाले अभिभावकों के बच्चों को दाखिला कराने के लिए पत्र जारी करता है। इन बच्चों की फीस निजी स्कूलों को सीधे शासन ऑनलाइन भुगतान करता है। जो निजी स्कूल केजी और कक्षा एक में बच्चों का दाखिला लेते हैं, उन्हें प्रतिवर्ष उसी के अनुपात में फीस की रकम अदा की जाती है। मगर, जिले में अधिकांश निजी स्कूल ऐसे हैं, जो बेसिक शिक्षा विभाग से पत्र जारी होने के बाद भी दाखिला नहीं लेते हैं। इससे बच्चे और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निजी स्कूलों की हठधर्मिता देखकर कुछ अभिभावक दौड़भाग करके टूट जाते हैं। इससे वह निजी स्कूलों में दाखिला कराने के बजाय सरकारी स्कूल में नाम लिखवाने को बाध्य जो जाते हैं। चालू शिक्षासत्र में 570 अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम निजी स्कूलों में नामांकित करने के लिए आवेदन किया था। इसमें से अधिकांश अभिभावक आदेश पत्र लेकर भटक रहे हैं।   
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बचाव के लिए निजी स्कूल संचालक दिखा देते हैं गरीब  
निजी स्कूलों ने अपने बचाव के लिए रास्ता भी निकाल लिया है। वह स्कूल में नामांकित बच्चों से फीस भी लेते हैं और उन्हीं बच्चों को गरीब भी दिखा देते हैं। हालांकि शासन से मिलने वाली फीस नहीं लेते हैं। मगर जब कोई अधिकारी जाता है, तो 25 प्रतिशत गरीब बच्चों के नाम में उन बच्चों की गणना करा देते हैं। इससे उनकी बचत हो जाती है।
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बीएसए कार्यालय में करना होता है आवेदन  
गरीब बच्चों के अभिभावकों को निजी स्कूलों में दाखिला कराने के लिए बीएसए कार्यालय में ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करना होता है। सिर्फ केजी और कक्षा एक में दाखिला कराने के लिए ही आवेदन किया जा सकता है। अगर कोई अभिभावक चाहे की कक्षा दो, पांच या छह में दाखिले के लिए आवेदन करे तो उसका आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।  

अफसरों की लापरवाही भुगत रहे हैं बच्चे  
निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों को दाखिला नहीं होने के पीछे अफसरों की लापरवाही होती है। बेसिक शिक्षा विभाग ने अभी तक न तो कोई कदम उठाया और न ही इस दिशा में कोई प्रयास किया। इसका परिणाम यह रहा कि बीएसए के आदेश के बाद भी बच्चों का दाखिला नहीं होता है।  


निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का दाखिला लेना अनिवार्य किया गया है। विभाग में आवेदन करने वाले अभिभावकों के शत-प्रतिशत बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में कराया जाता है। जो निजी स्कूल आदेश का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।  
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।
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