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बीएसएनएल का टेलीफोन एक्सचेंज जलकर राख

Sat, 05 May 2018 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Sat, 05 May 2018 11:07 PM IST
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BSNL telephone exchange office burnt
मास्क पहनकर आग बुझाते दमकलकर्मी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
शनिवार की सुबह बीएसएनएल के मुख्य कार्यालय में शार्ट सर्किट के कारण ट्रांसमिशन स्विच रूम में आग लग गई। देखते ही देखते एक्सचेंज जलकर राख हो गया। पांच घंटे की मशक्कत के बाद फायरब्रिगेड ने आग पर काबू पाया। आग लगने से पूरे जिले की संचार सेवाएं ध्वस्त हो गईं। 2.5 लाख उपभोक्ता परेशान हो गए। सरकारी व प्राइवेट कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। बैंकों में लेनदेन नहीं हुआ।
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नगर कोतवाली के शुकुलपुर दहिलामऊ में दूरसंचार विभाग का मुख्य कार्यालय है। शनिवार सुबह करीब 9.25 बजे अचानक खतरे का सायरन बजने लगा। आवाज सुनकर टेलीकाम मैकेनिक अशोक मौर्या और टेलीकाम अफसर एलबी मौर्य स्विच रूम की ओर भागे। धुएं के गुबार के बीच सुरक्षाकर्मी भी पहुंचे। देखा तो ट्रांसमिशन स्विच रूम से आग की लपटें उठ रही थीं। आग बुझाने में नाकाम कर्मचारियों ने फायरब्रिगेड को सूचना दी। इस पर दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे। सूचना पर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह, एएसपी राकेश कुमार सिंह, सीओ सिटी रमेशचंद्र भी पहुंचे।
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दोपहर में करीब 2.30 बजे आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक एक्सचेंज का स्विच रूम पूरी तरह जलकर राख हो चुका था। मशीनें भी जल चुकी थीं। अग्निकांड से पूरे जिले की संचार सेवाएं ध्वस्त हो र्गइं। टेलीफोन व मोबाइल खिलौना बने रहे। 2.5 लाख उपभोक्ता नेटवर्क गायब होने से परेशान हो गए। टीडीएम डीपी शर्मा ने बताया कि शार्ट सर्किट के कारण एसी ब्लास्ट हो गया, जिससे आग ट्रांसमिशन के स्विच रूम तक पहुंच गई। आग से पूरे जिले की संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है। नुकसान का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। अधिकारियों के साथ बैठक चल रही है, ताकि ठप संचार व्यवस्था जल्द से जल्द बहाल हो सके।
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आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेडकर्मी हुए घायल
बीएसएनएल कार्यालय के ट्रांसमिशन स्विच रूम तक पहुंची आग बुझाने के लिए फायरब्रिगेड के कर्मचारी जूझते रहे। खिड़कियों के शीशे तोड़ने के बाद आग बुझाने का प्रयास होता रहा। सीढ़ी के सहारे जवान आग बुझाने में जुटे रहे। धुएं के गुबार से सभी का सांस लेना मुश्किल हो रहा था। इस दौरान शीशा व पत्थर गिरने से फायरब्रिगेड के जवान प्रवीण कुमार व अश्वनी घायल हो गए। चिलबिला के राजा जायसवाल भी आग बुझाने के दौरान घायल हो गए। घायलों को अस्पताल ले जाया गया। मौके पर मौजूद प्रभारी एफएसओ अधिकारियों को घटना की जानकारी देने के बाद जवानों को हौसला बढ़ाने के अलावा आग बुझाने के लिए इधर से उधर भागते रहे।

जब कर्मचारी करने लगे पत्थरबाजी
बीएसएनएल कार्यालय के स्विच रूम में लगी आग धीरे-धीरे फैलती गई। तार जलने के कारण कार्यालय में हर ओर धुआं भर गया था। चूंकि खिड़कियां व दरवाजे बंद थे। इसलिए धुएं के गुबार को कम करने के लिए स्थानीय निवासी धर्मेेंद्र सिंह बंद खिड़कियों को तोड़ने की बात करते हुए पत्थर चलाने लगे। यह देख कर्मचारी भी पत्थरबाजी कर खिड़कियों का शीशा तोड़ने लगे। शीशा टूटने के बाद धुएं का गुबार बाहर की ओर से निकलने लगा।

सैकड़ों कबूतर जल मरे
दूरसंचार कार्यालय परिसर में पीछे वाले इलाके में कबूतरों ने अपना ठिकाना बना रखा था। बड़ी संख्या में कबूतर वहां रहते थे। शनिवार को लगी आग की चपेट में आने से सैकड़ों कबूतर जल मरे। बहुत से कबूतर एसी के बीच में रहते थे। विस्फोट के साथ ही धुएं का गुबार उठा। जिसके चलते कबूतर मूर्छित होकर गिर पड़े।

टीडीएम भी कार्यालय में फंसे
दूरसंचार विभाग के जिला प्रबंधक देव प्रियेश शर्मा घटना के समय अपने कार्यालय में मौजूद थे। सुरक्षाकर्मी भागकर पहुंचे और आग लगने की जानकारी टीडीएम को दी। बीमारी के चलते टीडीएम अस्पताल से कुछ दिन पहले ही कार्यभार संभाले थे। अभी भी उनकी तबियत ठीक नहीं थी। फिलहाल गार्ड टीडीएम को सुरक्षित बाहर ले आए। परिसर में मातहतों के साथ आग लगने की जानकारी वह अधिकारियों को देते रहे।

पीड़ितों को नहीं मिल सकी पुलिस की मदद
आग लगने के कारण बीएसएनएल की सेवाएं सुबह से ही ध्वस्त हो गई थीं। जिला प्रशासन से लेकर पुलिस विभाग के पास बीएसएनएल के सीयूजी नंबर हैं। आग लगने के बाद सबसे अधिक समस्या पीड़ितों को हुई। वे मदद के लिए अधिकारियों के साथ ही थानाध्यक्षों के पास फोन करते रहे, लेकिन सेवाएं बाधित होने के कारण बात नहीं हो पा रही थी। अधिकारियों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ा। वे आपस में किसी से बात नहीं कर पा रहे थे। जिन लोगों के पास दूसरे नेटवर्क के सिम थे, वे बातचीत करते रहे।

बीएसएनएल के 157 बीटीएस ठप
दूरसंचार कार्यालय के स्विच रूम में आग लगने के बाद जिले में लगाए गए 157 बीटीएस काम करना बंद कर दिए। आसपास के लोग मोबाइल सेवा बाधित होने के कारण बीटीएस स्थल पर पहुंचे। वे मामला समझने के लिए परेशान रहे। बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को समस्या की जानकारी देने वाला कोई नहीं था।

आग जनरेटर रूम तक पहुंचने पर धधक जाता परिसर
दूर संचार कार्यालय के स्विच रूम के नीचे जनरेटर रूम है। जहां जनरेटर के लिए डीजल रखा हुआ है। यदि शनिवार को आग लगने के बाद लपटें जनरेटर तक पहुंचती तो पूरा परिसर आग से धधक उठता। इससे अनहोनी की प्रबल संभावना थी।

इलाहाबाद फायरब्रिगेड भी मदद को पहुंची
दूर संचार केंद्र में लगी आग को बुझाने के लिए 6 टैंकर लगाए गए थे। जो लगातार पुलिस लाइन से पानी लेकर पहुंच रहे थे। आग न बुझने पर इलाहाबाद से फायरब्रिगेड बुला ली गई। हालांकि जब तक वे पहुंचे तब तक आग पर काबू पा लिया गया था।

पहली बार मास्क पहनकर आग बुझाते दिखे जवान
दूर संचार कार्यालय में लगी आग को बुझाने के लिए पहली बार फायर ब्रिगेड के जवान मास्क व आक्सीजन सिलेंडर लेकर जुटे रहे। हालांकि सिलेंडर केवल दस मिनट तक ही उनका साथ दे सका। धुंए के गुबार के बीच घुसकर आग बुझाने के लिए फायरब्रिगेड कर्मियों ने यह कदम उठाया। हालांकि इससे आग बुझाने में काफी मदद मिली।

10 दिन में संचार व्यवस्था सुधरने की संभावना
दूर संचार केंद्र में आग लगने से मशीनें जलकर राख हो गईं। केबिल भी पूरी तरह जल गए। जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो फिर से संचार व्यवस्था पटरी पर लाने में 10 दिन से अधिक समय लग सकता है। इसके लिए देर रात तक अधिकारियों की टीम कार्यालय में डटी रही।

लखनऊ से पहुंचे अफसरों ने लिया जायजा
दूरसंचार केंद्र में आग लगने की जानकारी मिलने पर लखनऊ से अधिकारी इंजीनियरों की टीम के साथ पहुंचे। नुकसान देखने के साथ ही क्षति का आकलन करने लगे। देर रात तक अधिकारियों की टीम इंजीनियरों के साथ सर्वे करती रही।


दूसरे नेटवर्क का सिम लेने की तैयारी
दूरसंचार एक्सचेंज में लगी आग के चलते अधिकारियों व पुलिस अफसरों के मोबाइल खिलौना बने रहे। ग्राहक भी समस्या की जानकारी के बाद दूसरे नेटवर्क का सिम खरीदने के लिए स्टोर पर पहुंचे। संभावना जताई जा रही है कि यदि अधिक दिनों तक व्यवस्था ध्वस्त रही तो अधिकारियों व पुलिस विभाग को दूसरे नेटवर्क का सिम उपलब्ध कराया जा सकता है।
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