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रेलवे ट्रैक घटना की जांच करने प्रतापगढ़ पहुंचा आतंक निरोधी दस्ता
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 04 Apr 2016 10:54 PM IST
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ईडी ने नारंग की दो करोड़ उनतीस लाख चवालीस हजार से ज्यादा की संपत्ति एवं बैंक धनराशि को जब्त किया है।
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इलाहाबाद रेल खंड पर पहले चार स्लीपर और बाद में ट्रैक प्लेट गायब करने की घटना ने रेलवे में हड़कंप मचा दिया है। जिस तरह से छह दिन के भीतर दो बार रेलवे पटरी के साथ छेड़छाड़ की गई उससे पता चलता है कि यह साजिश ट्रेन हादसे को अंजाम देने के लिए की गई थी। यही वजह थी कि रविवार को साजिश का पता लगाने के लिए रेलवे ने बड़े ही गोपनीय तरीके से आतंकी निरोधी दस्ते को प्रतापगढ़ भेजा। दस्ते ने प्रतापगढ़ स्टेशन पहुंचकर आरपीएफ के साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारियों से गहन पूछताछ की। उनका बयान लिया। रिपोर्ट तैयार करने के बाद ये लोग दिल्ली लौट गए।
दो महीने पहले रायबरेली और कौशांबी में रेलखंड पर ट्रैक को क्षतिग्रस्त कर ट्रेन पलटाने की साजिश की जा चुकी है। इन घटनाओं को आतंकी साजिश से जोड़कर देखा गया था। मामले की जांच अभी चल रही है। उसी से मिलती जुलती घटना 28 मार्च को प्रतापगढ़ में हुई थी। इलाहाबाद रेल खंड पर प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के निकट होम सिग्नल के भीतर चार स्लीपर रहस्यमय तरीके से गायब कर दिए गए थे। स्लीपर गायब होेने के बार भी इस पर ट्रेनें दौड़ती रहीं। अमर उजाला ने इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद होश में आए रेल प्रशासन और आरपीएफ ने पड़ताल शुरू कर दी। इस घटना के कुछ दिन बाद दो अप्रैल को इसी रेल खंड पर एक सुनियोजित साजिश के तहत ट्रैक प्लेट खोलकर गायब कर दी गई। जिससे रेल लाइन दो खंड में बंट गई।
उसी समय इलाहाबाद जा रही सरयू एक्सप्रेस कीमैन की सतर्कता से पलटने से बच गई। गनीमत रही कि घोर लापरवाही के बाद भी दोनो ही बार ट्रेन हादसा होने से बच गया। मगर दोनों ही घटनाओं ने रेल महकमे को हिलाकर रख दिया है। अधिकारियों को इसमें साजिश की बू आने लगी। यही वजह थी कि रविवार को दिल्ली से एक विशेष आतंकी निरोधी दस्ता प्रतापगढ़ भेजा गया। दस्ते में शामिल अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर उनका बयान लिया। आरपीएफ के प्रभारी इंस्पेक्टर एपी यादव ने बताया कि घटना की जांच करने के लिए रविवार को आतंकी निरोधी दस्ता प्रतापगढ़ आया था। थाने पर बैठकर उन लोगों ने घटना के बारे में पूछताछ की और बयान लेकर चले गए।
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दो महीने पहले रायबरेली और कौशांबी में रेलखंड पर ट्रैक को क्षतिग्रस्त कर ट्रेन पलटाने की साजिश की जा चुकी है। इन घटनाओं को आतंकी साजिश से जोड़कर देखा गया था। मामले की जांच अभी चल रही है। उसी से मिलती जुलती घटना 28 मार्च को प्रतापगढ़ में हुई थी। इलाहाबाद रेल खंड पर प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के निकट होम सिग्नल के भीतर चार स्लीपर रहस्यमय तरीके से गायब कर दिए गए थे। स्लीपर गायब होेने के बार भी इस पर ट्रेनें दौड़ती रहीं। अमर उजाला ने इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद होश में आए रेल प्रशासन और आरपीएफ ने पड़ताल शुरू कर दी। इस घटना के कुछ दिन बाद दो अप्रैल को इसी रेल खंड पर एक सुनियोजित साजिश के तहत ट्रैक प्लेट खोलकर गायब कर दी गई। जिससे रेल लाइन दो खंड में बंट गई।
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उसी समय इलाहाबाद जा रही सरयू एक्सप्रेस कीमैन की सतर्कता से पलटने से बच गई। गनीमत रही कि घोर लापरवाही के बाद भी दोनो ही बार ट्रेन हादसा होने से बच गया। मगर दोनों ही घटनाओं ने रेल महकमे को हिलाकर रख दिया है। अधिकारियों को इसमें साजिश की बू आने लगी। यही वजह थी कि रविवार को दिल्ली से एक विशेष आतंकी निरोधी दस्ता प्रतापगढ़ भेजा गया। दस्ते में शामिल अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर उनका बयान लिया। आरपीएफ के प्रभारी इंस्पेक्टर एपी यादव ने बताया कि घटना की जांच करने के लिए रविवार को आतंकी निरोधी दस्ता प्रतापगढ़ आया था। थाने पर बैठकर उन लोगों ने घटना के बारे में पूछताछ की और बयान लेकर चले गए।
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