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शौच को निकली वृद्धा की नहर में डूबने से मौत
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 07 Sep 2017 11:36 PM IST
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विकासखंड गौरा के नौड़ेरा स्वरूपपुर गांव को जिला प्रशासन ने ओडीएफ गांव घोषित किया है। गुरुवार को यहां शौच के लिए बाहर गई वृद्धा की नहर में डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों की नजर पड़ी तो परिवार के लोग भागकर मौके पर पहुंचे। लाश देखते ही लोग रोने-पीटने लगे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
फतनपुर थाना क्षेत्र के नौड़ेरा स्वरूपपुर निवासी चंद्रमणि की माता लख्खी देवी (85) गुरुवार की सुबह शौच के लिए घर के करीब से गुजरी नहर की ओर गई थी। कुछ देर बाद उधर से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर नहर में डूबी वृद्धा पर पड़ी। लोगों ने शोर मचाया। जिसके बाद गांव के लोग मौके पर पहुंचे। इस बीच परिवार के लोग भी आ गए। शव देखते ही लोग रोने बिलखने लगे। घटना की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। खास बात यह थी कि ओडीएफ गांव घोषित होने के बाद भी वृद्धा शौच के लिए नहर की ओर आई थी। इस मामले में प्रधान दशरथ सोनी ने बताया कि वृद्धा शौच के लिए नहीं, बल्कि सुबह घूमने गई थी। प्रधान की बात मान ही ली जाए तो नहर के भीतर वह घूमने किस वजह से पहुंची। इसका जवाब किसी के पास नहीं था। वैसे ग्रामीणों की बात मानें तो ओडीएफ गांव घोषित होने के बाद भी बहुत सी महिलाएं व पुरुष सुबह शाम शौच के लिए मैदान व खेतों की ओर जाते हैं।
शासन का दबाव पड़ने के बाद जिला प्रशासन ने जिले में कई गांवों को आननफानन में शौचमुक्त घोषित कर दिया। इन गांवों में अफसर दो-चार दिन गए। भोर में सीटियां बजाईं। शौच के लिए बाहर जा रहे लोगों को गुलाब की माला पहनाई गई। फिर कुछ दिनों बाद ही गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया, जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। प्रशासन की तरफ से ओडीएफ घोषित किए गए कई गांवों में अभी भी लोग खुले में शौच जा रहे हैं, लेकिन अफसरों ने तो गांव को ओडीएफ घोषित कर अपनी पीठ थपथपा ली।
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फतनपुर थाना क्षेत्र के नौड़ेरा स्वरूपपुर निवासी चंद्रमणि की माता लख्खी देवी (85) गुरुवार की सुबह शौच के लिए घर के करीब से गुजरी नहर की ओर गई थी। कुछ देर बाद उधर से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर नहर में डूबी वृद्धा पर पड़ी। लोगों ने शोर मचाया। जिसके बाद गांव के लोग मौके पर पहुंचे। इस बीच परिवार के लोग भी आ गए। शव देखते ही लोग रोने बिलखने लगे। घटना की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। खास बात यह थी कि ओडीएफ गांव घोषित होने के बाद भी वृद्धा शौच के लिए नहर की ओर आई थी। इस मामले में प्रधान दशरथ सोनी ने बताया कि वृद्धा शौच के लिए नहीं, बल्कि सुबह घूमने गई थी। प्रधान की बात मान ही ली जाए तो नहर के भीतर वह घूमने किस वजह से पहुंची। इसका जवाब किसी के पास नहीं था। वैसे ग्रामीणों की बात मानें तो ओडीएफ गांव घोषित होने के बाद भी बहुत सी महिलाएं व पुरुष सुबह शाम शौच के लिए मैदान व खेतों की ओर जाते हैं।
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शासन का दबाव पड़ने के बाद जिला प्रशासन ने जिले में कई गांवों को आननफानन में शौचमुक्त घोषित कर दिया। इन गांवों में अफसर दो-चार दिन गए। भोर में सीटियां बजाईं। शौच के लिए बाहर जा रहे लोगों को गुलाब की माला पहनाई गई। फिर कुछ दिनों बाद ही गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया, जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। प्रशासन की तरफ से ओडीएफ घोषित किए गए कई गांवों में अभी भी लोग खुले में शौच जा रहे हैं, लेकिन अफसरों ने तो गांव को ओडीएफ घोषित कर अपनी पीठ थपथपा ली।
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