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असलहों के सौदागर बीडीसी सदस्य समेत दो पुलिस के हत्थे चढ़े

Mon, 18 Sep 2017 07:23 PM IST
Updated Mon, 18 Sep 2017 07:23 PM IST
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असलहों के सौदागर बीडीसी सदस्य समेत दो पुलिस के हत्थे चढ़े
प्रतापगढ़। असलहों के सौदागर सुलतानपुर के बीडीसी सदस्य समेत दो लोगों को स्वॉट टीम व अंतू पुलिस ने रविवार की रात तेजगढ़ पुल के करीब से धर दबोचा। पुलिस टीम पर फायर कर भागते हुए असलहों के सौदागर गिर पड़े, तभी दोनों को पुलिस ने दबोच लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से 315 बोर के 12 तमंचे, दो कारतूस व बाइक बरामद की। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया।
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सोमवार को पुलिस अधीक्षक शगुन गौतम ने बताया कि रविवार की रात स्वॉट टीम व अंतू पुलिस ने अपराधियों की धरपकड़ के दौरान तेजगढ़ सई नदी पुल के करीब मौजूद थे। बाइक से दो युवक लालगंज की ओर जाते दिखे। पुलिस ने रोकना चाहा तो दोनों भागने लगे। पीछा करने पर पुलिसकर्मियों पर फायर भी किए। इस बीच उनकी बाइक बेकाबू हो गई और दोनों सड़क पर गिर पड़े। इस पर पुलिस ने दोनों को दबोच लिया। एसपी ने बताया कि असलहों का सौदागर हनुमान प्रसाद तिवारी निवासी खारेपुर कोतवाली देहात सुलतानपुर का रहने वाला है। वह बीडीसी सदस्य भी है। उसके पास से एक तमंचा, एक कारतूस , खोखा व 14 सौ रुपये बरामद हुए। उसके दूसरे साथी भगत सिंह पुत्र मुंशी सिंह निवासी करमपुर थाना इज्जत नगर जनपद बरेली के पास से 11 तमंचा, कारतूस, बाइक और 16 सौ रुपये मिले।
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पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया कि वे असलहे बेचने के लिए लाए थे। तीन व साढ़े तीन हजार रुपये में तमंचे बिक जाते हैं। असलहों को हाथरस व अलीगढ़ से लाया था। बताया कि गोलू सरदार के मरने के बाद भगत सिंह और हनुमान उसके करीबियों से असलहे खरीदते थे। जिन लोगों का नाम पता चला है, उनके बारे में जांच कराई जा रही है। पुलिस अधीक्षक ने असलहों के सौदागर पकड़ने वाली पुलिस टीम को पांच हजार रुपये से पुरुस्कृत किया है। पुलिस की पकड़ में आए अंतर्जनपदीय असलहा सौदागर हनुमान तिवारी को पूर्व स्वाट टीम प्रभारी अमित पांडेय ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 3 जून को पुलिस ने असलहा बेचने के दौरान उसे दबोचा था।
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हनुमान की मानें तो जिले में 15 सौ से लेकर 2 हजार रुपये तक तमंचे बिक जाते हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने असलहा सौदागरों को दबोचने के लिए ग्राहक बनकर डील की थी। इसके लिए तीन हजार रुपये एडवांस भी दिए गए थे। हालांकि पुलिस की चाल आरोपी समझ नहीं सके। दूसरी बार क्षेत्र पंचायत सदस्य हुनमान तिवारी के हाथ लगने के पीछे पुलिस से सांठगांठ की भी चर्चाएं हैं। खास बात यह है कि असलहों के सौदागरों को पकड़ने वाली पुलिस के लंबे हाथ हर बार की तरह इस बार भी मुख्य आरोपी तक नहीं पहुंच पाते।
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