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खाकी और ‘खादी’ के गठजोड़ का खुलेगा राज
Updated Fri, 13 Jul 2018 12:14 AM IST
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प्रतापगढ़। पूर्व शहर कोतवाल अनिल कुमार हत्याकांड की जांच करने के लिए सीबीआई यहां पहुंच गई है। जांच एजेंसी की तफ्तीश में खाकी व खादी के गठजोड़ का का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इंस्पेक्टर की हत्या की साजिश रचने वाले लोग बेनकाब हो सकते हैं। तत्कालीन अफसर से लेकर सिपाही तक से पूछताछ होगी। इंस्पेक्टर की पत्नी आरती ने पुलिस अफसरों के साथ ही नेताओं की साजिश से हत्या होने की आशंका जाहिर की है। परिवार के लोगों को उम्मीद है कि सीबीआई जांच के बाद ही हकीकत सामने आएगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद इंस्पेक्टर अनिल कुमार हत्याकांड की जांच करने गुरुवार को सीबीआई टीम बेल्हा पहुंची। एएसपी आरए मिश्र ने घटनास्थल का जायजा लिया। घटनास्थल से लेकर जिला अस्पताल की दूरी समझी। होटल मैनेजर अमित सिंह से तमाम सवाल किए। घटना के समय कौन-कौन मौजूद था। मॉडल शाप में कितने लोग बैठकर शराब पी रहे थे। उन्हें घटना की जानकारी कैसे मिली। इसके बाद उन्होंने कौन सा कदम उठाया। उस समय उनके कार्यालय में कितने लोग मौजूद थे। सीबीआई के अफसर मैनेजर से सवाल पर सवाल करते रहे। पूछा कि घटना के समय पूर्व शहर कोतवाल बलिराम मिश्र किस वजह से आसपास मौजूद थे।
इंस्पेक्टर अनिल की पत्नी ने बलिराम मिश्र, पूर्व स्वाट टीम प्रभारी मनोज शुक्ला के साथ ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक व नेताओं के गठजोड़ से हत्या की साजिश का आरोप लगाया है। अधिवक्ता इंद्रमणि की हत्या से जुड़े लोगों तक इंस्पेक्टर अनिल पहुंच गए थे। वह खुलासा भी करना चाहते थे, लेकिन साजिश के तहत उनका निलंबन कर दिया गया। अफसरों के दबाव के बाद वह काफी तनाव में रहते थे। घर पर बातचीत के दौरान अनहोनी की आशंका भी जता रहे थे। सूत्रों की मानें तो सीबीआई जांच के बाद खाकी व खादी गठजोड़ का राज भी सामने आ जाएगा। साजिश करने वाले बेनकाब होंगे।
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सवालों से छूटा मैनेजर को पसीना : कहां से उतरे, कैसे गिरे थे इंस्पेक्टर
सीबीआई के अपर पुलिस अधीक्षक आरए मिश्र ने होटल वैष्णवी पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। पहले मॉडल शाप वाले स्थान को देखा। पूछा कि यहां तो होटल नहीं बल्कि अस्पताल है। नर्सिंगहोम के मैनेजर से जानकारी करने के बाद टीम ने होटल के मैनेजर अमित सिंह से पूछताछ की। एएसपी खुद होटल के कमरे से लेकर ऊपरी मंजिल तक पहुंचे। वहां से नीचे तक देखा। इसके बाद कदमों से सीढ़ियों में उतरने में लगे वक्त को समझा। मैनेजर से पूछा कि कहां से इंस्पेक्टर उतरे थे और गोली लगने के बाद कैसे जमीन पर गिरे। जहां इंस्पेक्टर गिरे थे, उस स्थान पर काफी देर तक खड़े होकर जायजा लिया और मैनेजर से सवाल पर सवाल करते रहे। अस्पताल कौन ले गया। किस वाहन से ले जाया गया। उनका कार चालक कहां था। करीब दो घंटे तक मैनेजर से कार्यालय में एसी वाले कमरे में पूछताछ होती रही। इस दौरान सवालों का जवाब देने में मैनेजर को पसीना छूटता रहा।
पकड़े गए हत्यारोपियों को भागते समय किसने देखा
इंस्पेक्टर को गोली मारने के बाद हत्यारों को भागते हुए किसने देखा था। यह सवाल सीबीआई अफसर ने मैनेजर से किया। मैनेजर अमित सिंह ने बताया कि होटल पहली मंजिल पर था। नीचे मॉडल शाप था। जहां बैठक हत्यारोपी जीशान और राजू उर्फ बोचा शराब पी रहे थे। उनका दहिलामऊ के रहने वाले युवकों से विवाद हो गया। वह फायरिंग करते हुए बाहर की ओर भागे थे। फायरिंग की आवाज सुनकर इंस्पेक्टर अनिल भी अपने कमरे से नीचे की ओर आ रहे थे। इस बीच उनको गोली लग गई। हत्यारोपियों को भागते समय दहिलामऊ के रहने वाले मोनू पटवा ने देखा था। उसे बुलाने के लिए शहर कोतवाल को सीबीआई अफसरों ने निर्देश दिया।
सीबीआई टीम ने देखा कमरा नंबर 101
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने पहुंची सीबीआई होटल वैष्णवी के कमरा नंबर 101 के बाहर पहुंचकर रुक गई। पहले मैनेजर से पूछताछ की। इसके बाद कमरे के भीतर का नजारा देखा। वहां मरीज भर्ती थे। मैनेजर ने बताया कि अब इसे किराए पर दे दिया गया है।
इंस्पेक्टर के कार चालक से खुल सकता है राज
इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या के समय चश्मदीद गवाह उनका कार चालक था। घटना के समय वह अस्पताल पहुंचा। उसके चेहरे पर भी बारूद के निशान थे। वह खुद को इंस्पेक्टर अनिल के पीछे आने की बात बताता रहा। हालांकि घटना के दूसरे दिन से ही वह गायब हो गया। करीब 15 दिन बाद उसका पता चला। पुलिस ने उससे पूछताछ की। जिसके बाद कोई नतीजा न निकलने पर उसे जाने दिया।
राजू उर्फ बोचा और जीशान से भी सीबीआई करेगी सवाल
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम हत्यारोपी राजू उर्फ बोचा और जीशान से भी पूछताछ करेगी। मौजूदा समय में राजू उर्फ बोचा जमानत पर जेल से बाहर है और जीशान पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से भागने के कारण अभी भी जेल में निरुद्ध है। पुलिस अभिरक्षा से फरारी के दौरान जीशन को एसटीएफ ने गाजियाबाद से पकड़ा था।
बहुत तनाव में रहते थे इंस्पेक्ट अनिल
अधिवक्ता इंद्रमणि मिश्रा की हत्या के बाद आरोपियों तक पहुंचने में जुटे तत्कालीन शहर कोतवाल अनिल कुमार दावा कर रहे थे कि जल्द ही हत्यारोपी जेल की सलाखों के भीतर होंगे। उन्होंने हत्या करने व कराने वालों को चिह्नित कर लिया है। निलंबन के पहले वह काफी तनाव में थे। पत्नी आरती की मानें तो असली कातिलों तक पहुंच चुके इंस्पेक्टर अनिल के ऊपर अफसरों व नेताओं का लगातार दबाव था। जबकि वह घटना का सही खुलासा करना चाहते थे। इस बात को इंस्पेक्टर अनिल ने अपने कुछ साथियों से व्हटसएप पर चैट कर बताया भी था। वह खुद की जान पर मंडरा रहे खतरे को भी भलीभांति समझ रहे थे। तभी तो अवकाश लेकर पत्नी के पास पहुंचे इंस्पेक्टर अनिल ने मंडरा रहे खतरे से अवगत कराया था।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद इंस्पेक्टर अनिल कुमार हत्याकांड की जांच करने गुरुवार को सीबीआई टीम बेल्हा पहुंची। एएसपी आरए मिश्र ने घटनास्थल का जायजा लिया। घटनास्थल से लेकर जिला अस्पताल की दूरी समझी। होटल मैनेजर अमित सिंह से तमाम सवाल किए। घटना के समय कौन-कौन मौजूद था। मॉडल शाप में कितने लोग बैठकर शराब पी रहे थे। उन्हें घटना की जानकारी कैसे मिली। इसके बाद उन्होंने कौन सा कदम उठाया। उस समय उनके कार्यालय में कितने लोग मौजूद थे। सीबीआई के अफसर मैनेजर से सवाल पर सवाल करते रहे। पूछा कि घटना के समय पूर्व शहर कोतवाल बलिराम मिश्र किस वजह से आसपास मौजूद थे।
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इंस्पेक्टर अनिल की पत्नी ने बलिराम मिश्र, पूर्व स्वाट टीम प्रभारी मनोज शुक्ला के साथ ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक व नेताओं के गठजोड़ से हत्या की साजिश का आरोप लगाया है। अधिवक्ता इंद्रमणि की हत्या से जुड़े लोगों तक इंस्पेक्टर अनिल पहुंच गए थे। वह खुलासा भी करना चाहते थे, लेकिन साजिश के तहत उनका निलंबन कर दिया गया। अफसरों के दबाव के बाद वह काफी तनाव में रहते थे। घर पर बातचीत के दौरान अनहोनी की आशंका भी जता रहे थे। सूत्रों की मानें तो सीबीआई जांच के बाद खाकी व खादी गठजोड़ का राज भी सामने आ जाएगा। साजिश करने वाले बेनकाब होंगे।
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सवालों से छूटा मैनेजर को पसीना : कहां से उतरे, कैसे गिरे थे इंस्पेक्टर
सीबीआई के अपर पुलिस अधीक्षक आरए मिश्र ने होटल वैष्णवी पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। पहले मॉडल शाप वाले स्थान को देखा। पूछा कि यहां तो होटल नहीं बल्कि अस्पताल है। नर्सिंगहोम के मैनेजर से जानकारी करने के बाद टीम ने होटल के मैनेजर अमित सिंह से पूछताछ की। एएसपी खुद होटल के कमरे से लेकर ऊपरी मंजिल तक पहुंचे। वहां से नीचे तक देखा। इसके बाद कदमों से सीढ़ियों में उतरने में लगे वक्त को समझा। मैनेजर से पूछा कि कहां से इंस्पेक्टर उतरे थे और गोली लगने के बाद कैसे जमीन पर गिरे। जहां इंस्पेक्टर गिरे थे, उस स्थान पर काफी देर तक खड़े होकर जायजा लिया और मैनेजर से सवाल पर सवाल करते रहे। अस्पताल कौन ले गया। किस वाहन से ले जाया गया। उनका कार चालक कहां था। करीब दो घंटे तक मैनेजर से कार्यालय में एसी वाले कमरे में पूछताछ होती रही। इस दौरान सवालों का जवाब देने में मैनेजर को पसीना छूटता रहा।
पकड़े गए हत्यारोपियों को भागते समय किसने देखा
इंस्पेक्टर को गोली मारने के बाद हत्यारों को भागते हुए किसने देखा था। यह सवाल सीबीआई अफसर ने मैनेजर से किया। मैनेजर अमित सिंह ने बताया कि होटल पहली मंजिल पर था। नीचे मॉडल शाप था। जहां बैठक हत्यारोपी जीशान और राजू उर्फ बोचा शराब पी रहे थे। उनका दहिलामऊ के रहने वाले युवकों से विवाद हो गया। वह फायरिंग करते हुए बाहर की ओर भागे थे। फायरिंग की आवाज सुनकर इंस्पेक्टर अनिल भी अपने कमरे से नीचे की ओर आ रहे थे। इस बीच उनको गोली लग गई। हत्यारोपियों को भागते समय दहिलामऊ के रहने वाले मोनू पटवा ने देखा था। उसे बुलाने के लिए शहर कोतवाल को सीबीआई अफसरों ने निर्देश दिया।
सीबीआई टीम ने देखा कमरा नंबर 101
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने पहुंची सीबीआई होटल वैष्णवी के कमरा नंबर 101 के बाहर पहुंचकर रुक गई। पहले मैनेजर से पूछताछ की। इसके बाद कमरे के भीतर का नजारा देखा। वहां मरीज भर्ती थे। मैनेजर ने बताया कि अब इसे किराए पर दे दिया गया है।
इंस्पेक्टर के कार चालक से खुल सकता है राज
इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या के समय चश्मदीद गवाह उनका कार चालक था। घटना के समय वह अस्पताल पहुंचा। उसके चेहरे पर भी बारूद के निशान थे। वह खुद को इंस्पेक्टर अनिल के पीछे आने की बात बताता रहा। हालांकि घटना के दूसरे दिन से ही वह गायब हो गया। करीब 15 दिन बाद उसका पता चला। पुलिस ने उससे पूछताछ की। जिसके बाद कोई नतीजा न निकलने पर उसे जाने दिया।
राजू उर्फ बोचा और जीशान से भी सीबीआई करेगी सवाल
इंस्पेक्टर अनिल हत्याकांड की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम हत्यारोपी राजू उर्फ बोचा और जीशान से भी पूछताछ करेगी। मौजूदा समय में राजू उर्फ बोचा जमानत पर जेल से बाहर है और जीशान पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से भागने के कारण अभी भी जेल में निरुद्ध है। पुलिस अभिरक्षा से फरारी के दौरान जीशन को एसटीएफ ने गाजियाबाद से पकड़ा था।
बहुत तनाव में रहते थे इंस्पेक्ट अनिल
अधिवक्ता इंद्रमणि मिश्रा की हत्या के बाद आरोपियों तक पहुंचने में जुटे तत्कालीन शहर कोतवाल अनिल कुमार दावा कर रहे थे कि जल्द ही हत्यारोपी जेल की सलाखों के भीतर होंगे। उन्होंने हत्या करने व कराने वालों को चिह्नित कर लिया है। निलंबन के पहले वह काफी तनाव में थे। पत्नी आरती की मानें तो असली कातिलों तक पहुंच चुके इंस्पेक्टर अनिल के ऊपर अफसरों व नेताओं का लगातार दबाव था। जबकि वह घटना का सही खुलासा करना चाहते थे। इस बात को इंस्पेक्टर अनिल ने अपने कुछ साथियों से व्हटसएप पर चैट कर बताया भी था। वह खुद की जान पर मंडरा रहे खतरे को भी भलीभांति समझ रहे थे। तभी तो अवकाश लेकर पत्नी के पास पहुंचे इंस्पेक्टर अनिल ने मंडरा रहे खतरे से अवगत कराया था।