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बिहार: मौत भी जुदा न कर सकी दोस्ती, जाति की दीवार तोड़ एक ही कब्र में दफन हुईं दो सहेलियां

Fri, 11 Sep 2026 03:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 11 Sep 2026 03:56 PM IST
सार

गयाजी के गुरुआ प्रखंड में तालाब में डूबने से दो 13 वर्षीय सहेलियों की मौत हो गई। अलग-अलग जाति के परिवारों से आने वाली सुप्रिया और सुहानी की दोस्ती को परिजनों ने आखिरी सम्मान देते हुए दोनों को एक ही कब्र में सुपुर्द-ए-खाक किया।

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मृतिका सुप्रिया और सुहानी का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गयाजी जिले के गुरुआ प्रखंड के नवावचक गांव में दो मासूम सहेलियों की मौत ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। अलग-अलग जाति के परिवारों से आने वाली 13 वर्षीय सुप्रिया और सुहानी की तालाब में डूबने से मौत हो गई। इसके बाद दोनों परिवारों ने समाज के लिए मिसाल पेश करते हुए बेटियों को एक ही कब्र में दफन किया। उनकी आखिरी विदाई ने इंसानियत और दोस्ती की ऐसी तस्वीर दिखाई, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है।

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स्कूल से लौटते वक्त हुआ दर्दनाक हादसा
गुरुआ प्रखंड के नवावचक गांव निवासी मनोज चौधरी की 13 वर्षीय पुत्री सुप्रिया कुमारी और अमरेन्द्र यादव की 13 वर्षीय पुत्री सुहानी कुमारी आपस में गहरी दोस्त थीं। दोनों रोज की तरह स्कूल से पढ़ाई कर घर लौट रही थीं। रास्ते में तालाब के किनारे रुककर दोनों पैर धोने लगीं। इसी दौरान एक बच्ची का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के लिए दूसरी सहेली भी पानी में उतर गई, लेकिन दोनों पानी में डूब गईं।

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एक-दूसरे को बचाने में चली गई जान
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। काफी प्रयास के बाद दोनों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों की मौत की खबर सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। पूरे गांव में मातम पसर गया और हर किसी की आंखें नम हो गईं।

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दोस्ती को मिला आखिरी सम्मान
सबसे भावुक पल तब आया, जब अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई। एक बच्ची चौधरी परिवार से थी, जबकि दूसरी यादव परिवार की बेटी थी। बावजूद इसके, दोनों परिवारों ने जाति के भेदभाव को दरकिनार कर अपनी बेटियों की दोस्ती को सबसे बड़ा सम्मान देने का फैसला किया। परिजनों और ग्रामीणों की सहमति से दोनों सहेलियों को एक ही कब्र में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।



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इलाके में बनी चर्चा, समाज के लिए छोड़ गईं संदेश
दो मासूम सहेलियों की यह आखिरी विदाई अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव के लोग कह रहे हैं कि जिन दो बच्चियों ने जीवनभर दोस्ती निभाई, उन्हें मौत भी अलग नहीं कर सकी। दोनों परिवारों के इस फैसले ने इंसानियत, आपसी प्रेम और सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की है। उनकी दोस्ती समाज से एक सवाल भी पूछती है। जब दो मासूमों की दोस्ती में कभी जाति की दीवार नहीं थी, तो समाज में यह दीवार क्यों?

दोनों सहेलियों की फाइल फोटो

मृतिका की फाइल फोटो

 

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