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बेटे-बहू की मौत के गम में अधेड़ ने की खुदकुशी
Updated Sun, 23 Jul 2017 07:42 PM IST
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डेरवा। बेटे-बहू की मौत से आहत अधेड़ ने फांसी लगा कर जान दे दी। इसके पहले भी जान देने की कोशिश की थी, लेकिन लोगों ने उसे बचा लिया था।
जेठवारा थाना क्षेत्र के राम बख्स का पुरवा विकरा निवासी रामआसरे सरोज (48) पुत्र स्व. बद्री सरोज ने बीती रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे पंखे के चुल्ले में रस्सी बांध कर फांसी लगाकर जान दे दी। सुबह जब घर के लोगों ने उसके कमरे का दरवाजा खोला तो उसका शव लटकते देखा। इससे कोहराम मच गया। दरअसल तीन माह पहले रामआसरे की बहू उषा देवी (20) पत्नी दीपक ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। पत्नी की मौत के गम में उसके बेटे दीपक (25) ने भी 15 दिन बाद जहर खाकर जान दे दी थी। इनकी मौत के बाद राम आसरे की हालत मनोरोगी जैसी हो गई थी। उसने तीन बार जान देने की कोशिश की थी।
दो बार तो उसने फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की, लेकिन पड़ोसियों ने बचा लिया। पखवारे भर पहले उसने स्वयं अपनी कब्र खोदी और उसमें लेटकर मिट्टी डालने लगा। लोगों ने देखा तो उसे कब्र से बाहर निकालकर घर पहुंचाया था। शनिवार रात में उसने अपने कमरे में फांसी लगा ली। परिजनों व ग्राम प्रधान की सहमति से पंचनामा कर शव परिजनोें को सौंप दिया गया।
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जेठवारा थाना क्षेत्र के राम बख्स का पुरवा विकरा निवासी रामआसरे सरोज (48) पुत्र स्व. बद्री सरोज ने बीती रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे पंखे के चुल्ले में रस्सी बांध कर फांसी लगाकर जान दे दी। सुबह जब घर के लोगों ने उसके कमरे का दरवाजा खोला तो उसका शव लटकते देखा। इससे कोहराम मच गया। दरअसल तीन माह पहले रामआसरे की बहू उषा देवी (20) पत्नी दीपक ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। पत्नी की मौत के गम में उसके बेटे दीपक (25) ने भी 15 दिन बाद जहर खाकर जान दे दी थी। इनकी मौत के बाद राम आसरे की हालत मनोरोगी जैसी हो गई थी। उसने तीन बार जान देने की कोशिश की थी।
दो बार तो उसने फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की, लेकिन पड़ोसियों ने बचा लिया। पखवारे भर पहले उसने स्वयं अपनी कब्र खोदी और उसमें लेटकर मिट्टी डालने लगा। लोगों ने देखा तो उसे कब्र से बाहर निकालकर घर पहुंचाया था। शनिवार रात में उसने अपने कमरे में फांसी लगा ली। परिजनों व ग्राम प्रधान की सहमति से पंचनामा कर शव परिजनोें को सौंप दिया गया।
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